Chhattisgarh Politics : छत्तीसगढ़ की राजनीति में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर चल रहा सियासी विवाद अब सीधे आमने-सामने की बहस तक पहुंच गया है। रायपुर प्रेस क्लब में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा एक ही मंच पर पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच करीब 80 मिनट तक PM आवास योजना को लेकर चर्चा हुई। बहस के दौरान स्वीकृत मकानों, निर्माण, पूर्ण आवास और सरकारी आंकड़ों को लेकर दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे रखे।
भूपेश बघेल ने कांग्रेस सरकार के आंकड़े गिनाए
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बहस के दौरान अपनी तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत मकानों का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के दौरान करीब 7 लाख आवास स्वीकृत किए गए थे। बघेल ने कहा कि उनकी सरकार ने योजना को लेकर कई स्तरों पर काम किया और केंद्र से स्वीकृति मिलने के बाद प्रदेश में आवास निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

18 लाख आवास स्वीकृति का भी किया जिक्र
भूपेश बघेल ने अपने तर्क के दौरान 14 दिसंबर 2023 की पहली कैबिनेट बैठक का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उस बैठक में 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए थे। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से अलग-अलग समय पर मिली स्वीकृतियों को जोड़ते हुए उन्होंने आवासों की संख्या अधिक होने की बात कही। बघेल ने अलग-अलग आंकड़ों को सामने रखकर यह बताने की कोशिश की कि PM आवास योजना के तहत प्रदेश में बड़ी संख्या में मकानों को मंजूरी मिली थी।
18 लाख से 46 लाख तक के आंकड़ों पर चर्चा
बहस में आवासों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आने से मामला और दिलचस्प हो गया। भूपेश बघेल ने केंद्र से मिली विभिन्न स्वीकृतियों और अलग-अलग चरणों के आंकड़ों को जोड़ने की बात कही। इसी आधार पर उन्होंने कुल संख्या को काफी अधिक बताया। हालांकि, इन आंकड़ों की गणना और उनके आधार को लेकर विजय शर्मा ने सवाल उठाए और कहा कि अलग-अलग श्रेणियों के आंकड़ों को एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता।

विजय शर्मा ने कहा, पहले आंकड़ों की गणना सही हो
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भूपेश बघेल के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना पर चर्चा करते समय आंकड़ों की सही गणना जरूरी है। उन्होंने स्वीकृत, निर्माणाधीन और पूर्ण हो चुके मकानों को अलग-अलग श्रेणियों में देखने की जरूरत बताई। विजय शर्मा ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में गरीब परिवारों के आवास से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाए और कहा कि भाजपा सरकार ने आवास निर्माण के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय किया है।
स्वीकृत और बने मकानों की संख्या पर टकराव
बहस का सबसे अहम मुद्दा स्वीकृत और वास्तव में निर्मित मकानों की संख्या रहा। दोनों नेताओं ने अपने-अपने आंकड़ों के आधार पर अपनी सरकार के प्रदर्शन को बेहतर बताने की कोशिश की। भूपेश बघेल ने जहां स्वीकृत आवासों और केंद्र से मिली मंजूरियों को आधार बनाया, वहीं विजय शर्मा ने निर्माण और पूर्ण हुए मकानों की संख्या को ज्यादा महत्वपूर्ण बताया। इसी अंतर की वजह से दोनों नेताओं के दावों में बड़ा फर्क दिखाई दिया।

PM आवास पोर्टल और केंद्र की राशि का मुद्दा उठा
चर्चा के दौरान PM आवास योजना के पोर्टल और केंद्र से मिलने वाली राशि से जुड़े विषय भी सामने आए। भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल के दौरान योजना के पोर्टल और केंद्र से राशि मिलने में आई समस्याओं का जिक्र किया। दूसरी ओर विजय शर्मा ने कांग्रेस सरकार के दौरान योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए। दोनों नेताओं ने अपने-अपने कार्यकाल की परिस्थितियों और फैसलों को सामने रखते हुए योजना की स्थिति समझाने की कोशिश की।
भाजपा सरकार ने 18 लाख आवास बनाने का लक्ष्य बताया
विजय शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार ने छत्तीसगढ़ में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय गरीब परिवारों के आवास से जुड़े मामलों में रुकावटें आईं, जिसके कारण कई पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित रहे। शर्मा ने कहा कि वर्तमान सरकार आवास योजना को लेकर तय लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ रही है और पात्र लोगों तक योजना का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

2023 में स्वीकृत 84 हजार आवास पर भी सवाल
बहस के दौरान वर्ष 2023 में स्वीकृत करीब 84 हजार आवास का मुद्दा भी उठा। विजय शर्मा ने इस आंकड़े को लेकर भूपेश बघेल से सवाल किया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच सवाल-जवाब का दौर चला और आवासों की स्वीकृति तथा निर्माण की स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। इस चर्चा से साफ हुआ कि विवाद केवल राजनीतिक आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी आंकड़ों की व्याख्या को लेकर भी दोनों पक्षों में मतभेद है।
80 मिनट तक चली बहस में तीखे सवाल-जवाब
रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित यह बहस करीब 80 मिनट तक चली। कार्यक्रम के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के दावों और आंकड़ों पर सवाल उठाए। PM आवास योजना से जुड़े मुद्दे पर दोनों पक्षों ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं और विपक्षी सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े किए। आमने-सामने की इस चर्चा ने प्रदेश की राजनीति में काफी हलचल पैदा कर दी।
बहस के बाद सोशल मीडिया पर भी छिड़ी जंग
कार्यक्रम समाप्त होने के बाद PM आवास का मुद्दा सोशल मीडिया तक पहुंच गया। भाजपा और कांग्रेस नेताओं तथा समर्थकों की ओर से एक-दूसरे पर निशाना साधा गया। भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए विजय शर्मा के दावों पर तंज कसा, जबकि भाजपा की ओर से कांग्रेस सरकार के कार्यकाल और उसके दौरान आवास योजना की स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए। इस तरह प्रेस क्लब की बहस के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।

आंकड़ों की आधिकारिक तस्वीर पर अब सबकी नजर
PM आवास योजना को लेकर हुई इस बहस ने स्वीकृति, निर्माणाधीन और पूर्ण आवासों के आंकड़ों की पारदर्शिता का मुद्दा भी सामने ला दिया है। दोनों नेताओं ने अपने-अपने दावे जनता के सामने रखे हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति समझने के लिए इन आंकड़ों का आधिकारिक स्तर पर मिलान जरूरी होगा। खास तौर पर स्वीकृत और बनकर तैयार मकानों की अलग-अलग संख्या इस विवाद को समझने में अहम भूमिका निभाएगी।
PM आवास बना भाजपा-कांग्रेस के बीच नया सियासी मुद्दा
भूपेश बघेल और विजय शर्मा की आमने-सामने की बहस के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मुद्दा बन गई है। दोनों दल अब अपने-अपने आंकड़ों के जरिए जनता के सामने अपनी सरकार का प्रदर्शन बेहतर साबित करने में जुट सकते हैं। फिलहाल बहस ने यह साफ कर दिया है कि PM आवास योजना को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।
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