UP School Exam Pandit Controversy: यूपी में फिर गरमाया परीक्षा विवाद! आगरा में 7वीं के संस्कृत पेपर पर मचा सियासी घमासान

उत्तर प्रदेश के आगरा में कक्षा 7 की संस्कृत परीक्षा में एक पहेली (पंडित शब्द के प्रयोग) को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षक संघ ने इसे भावनाओं को आहत करने वाला बताया है, जबकि विभाग इसे साहित्यिक पहेली कह रहा है। पुलिस भर्ती विवाद के बाद अब शिक्षा विभाग पर भी सवाल उठने लगे हैं।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 18, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

UP School Exam Pandit Controversy: उत्तर प्रदेश में परीक्षाओं का विवादों से चोली-दामन का साथ होता जा रहा है। ताजनगरी आगरा में कक्षा सातवीं के संस्कृत के प्रश्न पत्र ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसने न केवल अभिभावकों बल्कि राजनीतिक और सामाजिक संगठनों को भी आक्रोशित कर दिया है।

एक पहेली और उपजा भारी विवाद

मंगलवार को जब आगरा के परिषदीय विद्यालयों के छात्र अपनी वार्षिक परीक्षा दे रहे थे, तब प्रश्न पत्र के पांचवें क्रमांक पर अंकित एक पहेली (प्रहेलिका) ने सबका ध्यान खींचा। सवाल था: “वह कौन है जो बिना पैर के दूर तक जाता है और साक्षर है लेकिन पंडित नहीं है?” देखते ही देखते इस प्रश्न का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने इसे हाथों-हाथ लिया और विभाग के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए इसे एक विशेष वर्ग की भावनाओं को आहत करने वाला कदम बताया।

शिक्षक संघ के गंभीर आरोप

शिक्षक नेता बृजेश दीक्षित और संघ के अन्य पदाधिकारियों ने विभाग की मंशा पर कड़े सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि संबंधित कक्षा की निर्धारित पाठ्यपुस्तकों में ऐसी किसी पहेली या संदर्भ का उल्लेख नहीं है। संघ का आरोप है कि जानबूझकर ऐसे शब्दों का चयन किया गया जिससे सामाजिक विद्वेष की स्थिति पैदा हो। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही करार देते हुए संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

शिक्षा विभाग की सफाई और अर्थ का अनर्थ

विवाद को बढ़ता देख जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और डायट प्राचार्य ने तुरंत स्पष्टीकरण जारी किया। प्रशासन का तर्क है कि यह पहेली संस्कृत साहित्य की एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध ‘प्रहेलिका’ है। विभाग के अनुसार, यहाँ ‘पंडित’ शब्द का अर्थ किसी जाति विशेष से नहीं, बल्कि ‘विद्वान’ या ‘ज्ञानी’ व्यक्ति से है। उन्होंने बताया कि इस पहेली का उत्तर ‘पत्र’ (लेटर) है, जो अक्षरों (साक्षर) से युक्त होने के बाद भी स्वयं विद्वान नहीं होता।

पुलिस भर्ती परीक्षा के जख्मों पर छिड़का नमक

यह मामला इसलिए भी तूल पकड़ रहा है क्योंकि कुछ समय पहले यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में भी ‘पंडित’ शब्द के प्रयोग पर भारी हंगामा हुआ था। उस समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं संज्ञान लेकर कड़े निर्देश जारी किए थे। अब एक बार फिर शिक्षा विभाग द्वारा उसी शब्द का प्रयोग किए जाने पर लोग इसे विभाग की असंवेदनशीलता मान रहे हैं। अभिभावकों का प्रश्न है कि क्या परीक्षा सेट करने वाली टीम सामाजिक संवेदनशीलता को पूरी तरह भूल चुकी है?

आगामी चुनौती और प्रशासन की सतर्कता

फिलहाल आगरा जिला प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में करने और शांति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, शिक्षक संघ ने अपने विरोध को और तेज करने तथा आंदोलन की चेतावनी दी है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि भविष्य में प्रश्न पत्रों के निर्माण के दौरान न केवल भाषाई शुद्धता, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक बारीकियों का ध्यान रखना भी अत्यंत आवश्यक हो गया है।

2