Afghanistan Snowstorm : अफगानिस्तान इस समय कुदरत के दोहरे मार की चपेट में है। देश के विभिन्न प्रांतों में जारी भारी बारिश और भीषण बर्फबारी ने तबाही मचा रखी है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ANDMA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस मौसमी आपदा में अब तक 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। यह संकट ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान पहले से ही संसाधनों की भारी कमी और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहा है। बर्फीले तूफान के कारण जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है और दूर-दराज के इलाकों का संपर्क मुख्य केंद्रों से कट गया है।
प्रभावित क्षेत्र और बुनियादी ढांचे को नुकसान: कई प्रांतों में रेड अलर्ट
प्रांतीय अधिकारियों के मुताबिक, इस प्राकृतिक आपदा का सबसे विनाशकारी असर पूर्वी परवान, वर्दक, दक्षिणी कंधार, उत्तरी जवज़जान, फ़रयाब और मध्य बामियान प्रांतों में देखा गया है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं और भारी हिमपात के कारण नौ से अधिक मकान आंशिक रूप से ढह गए हैं, जिससे कई परिवार बेघर हो गए हैं। सड़कों पर कई फीट तक बर्फ जमने के कारण परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। प्रशासन हालांकि सड़कों को बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है, लेकिन लगातार हो रही बर्फबारी राहत कार्यों में बड़ी बाधा बनी हुई है।
आजीविका पर वज्रपात: सैंकड़ों मवेशियों की मौत से किसान दाने-दाने को मोहताज
अफगानिस्तान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि और पशुपालन पर टिकी है, और इस तूफान ने इसी बुनियाद पर चोट की है। भारी ठंड और चारे की कमी के कारण अब तक 530 से अधिक पालतू पशुओं की मौत हो गई है। स्थानीय निवासियों के लिए यह एक बड़ा आर्थिक नुकसान है क्योंकि मवेशी ही उनकी आजीविका का एकमात्र जरिया थे। बुधवार से जारी इस मौसमी कहर ने खेतों को बर्फ की चादर से ढक दिया है, जिससे आने वाले समय में खाद्य संकट और गहराने की आशंका पैदा हो गई है।
शरणार्थी संकट और मानवीय त्रासदी: ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ की गंभीर चेतावनी
अफगानिस्तान के भीतर जारी इस तबाही के बीच, पाकिस्तान से जबरन निकाले जा रहे अफगान शरणार्थियों की स्थिति और भी हृदयविदारक हो गई है। ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (MSF) ने चेतावनी दी है कि कड़ाके की ठंड के बीच शरणार्थियों का निष्कासन एक बड़ी मानवीय त्रासदी को जन्म दे रहा है। अस्थायी शिविरों में रह रहे इन लोगों के पास न तो पर्याप्त गर्म कपड़े हैं और न ही रहने के लिए पक्के मकान। स्वच्छ पानी, दवाओं और भोजन की भारी किल्लत के बीच हजारों जिंदगियां खुले आसमान के नीचे रातें गुजारने को मजबूर हैं।
सर्दी बनी “मूक हत्यारा”: अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की गुहार
MSF मिशन के प्रमुख शू वेइबिंग ने सर्दियों के इस मौसम को शरणार्थियों के लिए “मूक हत्यारा” करार दिया है। उन्होंने कहा कि बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों और अफगान नागरिकता कार्ड धारकों के मन में निर्वासन को लेकर गहरा डर व्याप्त है। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इस संकट को केवल एक मौसमी समस्या न समझें, बल्कि इसे एक गंभीर मानवीय संकट मानते हुए सुरक्षा और स्वास्थ्य सहायता बढ़ाएं। अगर समय रहते पर्याप्त चिकित्सा सुविधा और रसद नहीं पहुँचाई गई, तो मौतों का आंकड़ा और भी भयावह रूप ले सकता है।
Read More : जैसलमेर टूरिस्ट्स के लिए नई व्यवस्था, एंट्री पर 50-200 रुपए यात्री कर देना होगा, 2 टोल नाके बनाए जाएंगे










