
Uttarakhand News: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गुंजी में आयोजित आदि कैलास अल्ट्रा मैराथन 2.0 का शनिवार को समापन हो गया। समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल हुए और विभिन्न श्रेणियों में शानदार प्रदर्शन करने वाले धावकों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्र में आयोजित इस प्रतियोगिता ने खेल, पर्यटन और सीमांत क्षेत्र की पहचान को नई मजबूती दी।
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1300 धावकों ने लिया प्रतियोगिता में हिस्सा
पर्यटन विभाग के अनुसार, इस वर्ष मैराथन में करीब 1300 धावकों ने हिस्सा लिया। इनमें 900 पुरुष और 400 महिलाएं शामिल थीं। पिछले वर्ष की तुलना में प्रतिभागियों की संख्या दोगुनी बताई गई है। बड़ी संख्या में धावकों की भागीदारी से आयोजन के प्रति बढ़ते आकर्षण और उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन की संभावनाओं का संकेत मिलता है।
मुख्यमंत्री धामी का पारंपरिक अंदाज में स्वागत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार सुबह गुंजी हेलीपैड पहुंचे और इसके बाद मैराथन के समापन समारोह में शामिल हुए। रं समुदाय के लोगों ने उन्हें पारंपरिक रंघा पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्हें जीआई टैग प्राप्त दान कालीन भी भेंट की गई। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
70 किलोमीटर दौड़ में दिगंबर सिंह बने विजेता
70 किलोमीटर वर्ग में चमोली के दिगंबर सिंह ने पहला स्थान हासिल किया। अल्मोड़ा के नरेंद्र दूसरे और बुलंदशहर के जितेश कुमार तीसरे स्थान पर रहे। महिला वर्ग में मीनाक्षी नेगी ने बाजी मारी, जबकि सुनीता सुब्बा दूसरे और तेनजिन डोल्मा तीसरे स्थान पर रहीं। विजेताओं के प्रदर्शन ने कठिन परिस्थितियों में उनकी सहनशक्ति और तैयारी को दर्शाया।

42 किलोमीटर दौड़ में इन धावकों ने मारी बाजी

42 किलोमीटर ओपन महिला वर्ग में अनिशा ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि उत्तर प्रदेश की साधना दूसरे स्थान पर रहीं। पुरुष वर्ग में संजीत राय, प्रमोद जोशी और दिनेश चंद्रा विजेताओं में शामिल रहे। प्रतियोगिता के परिणामों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरे रूट पर सेंसर लगाए गए थे और धावकों के जूतों में चिप लगाई गई थी। सत्यापन के बाद ही परिणाम घोषित किए गए।
सीमांत के लोगों को बताया फ्रंट लाइन सोल्जर
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि आदि कैलास अल्ट्रा मैराथन सामान्य दौड़ नहीं है। कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में दौड़ना शारीरिक क्षमता और इच्छाशक्ति की कठिन परीक्षा है। उन्होंने सीमांत गांवों में रहने वाले लोगों को देश के फ्रंट लाइन सोल्जर बताते हुए कहा कि वे विषम परिस्थितियों में भी देश की सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों की मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सुरक्षा बलों और विशिष्ट लोगों का भी सम्मान
समारोह में मुख्यमंत्री ने आईटीबीपी, बीआरओ और एसएसबी के अधिकारियों सहित अन्य विशिष्ट लोगों को भी सम्मानित किया। आयोजन से सीमांत क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय समुदाय की भूमिका को सामने लाने का संदेश मिला। आदि कैलास जैसे दुर्गम क्षेत्र में इस तरह की प्रतियोगिता उत्तराखंड को साहसिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
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