Abhishek Banerjee: अभिषेक बनर्जी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, पुलिस कार्रवाई पर रोक

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से एक कथित भड़काऊ बयान के मामले में बहुत बड़ी कानूनी राहत मिल गई है! अदालत ने उनके खिलाफ किसी भी तरह की पुलिसिया और दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। आखिर कोर्ट रूम में क्या बहस हुई? जानने के लिए पढ़ें...

Abhishek Banerjee

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 21, 2026

Abhishek Banerjee:  तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ चुनाव प्रचार के दौरान की गई एक बेहद विवादित और कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि अभिषेक बनर्जी न्यायालय की लिखित अनुमति के बिना देश छोड़कर बाहर नहीं जा पाएंगे। इसके साथ ही, अदालत ने उन्हें जांच प्रक्रिया में पूरी तरह से सहयोग करने का आदेश दिया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए टीएमसी सांसद को कड़ी फटकार भी लगाई।

तीन बार के सांसद के गैर-जिम्मेदाराना बयान पर अदालत नाराज

गुरुवार को हुई इस मामले की हाई-प्रोफाइल सुनवाई के दौरान माननीय अदालत ने तीखी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने सवाल उठाया कि तीन बार के लोकसभा सांसद और एक जिम्मेदार राजनीतिक पद पर बैठे व्यक्ति आखिर इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं। हालांकि, तमाम तल्ख टिप्पणियों के बावजूद हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को थोड़ी राहत देते हुए आगामी 30 जुलाई तक के लिए दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा (प्रोटेक्शन) प्रदान की है। इस निर्धारित तारीख तक पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाएगी। कोर्ट ने पुलिस को यह भी निर्देश दिया है कि यदि वे अभिषेक से पूछताछ करना चाहते हैं, तो उन्हें 48 घंटे पहले का लिखित नोटिस देना अनिवार्य होगा।

चुनावी रैली में ‘दिल्ली का बाप’ वाले बयान पर दर्ज हुई थी एफआईआर

इस पूरे विवाद की शुरुआत लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान 27 अप्रैल को हुई थी, जब अभिषेक बनर्जी आरामबाग में एक चुनावी जनसभा को संबोधित कर रहे थे। वहां उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था, “ममता बनर्जी लिबरल हैं, लेकिन मैं लिबरल नहीं हूं। हम 4 तारीख को देखेंगे कि दिल्ली का कौन सा बाप उन्हें बचाएगा।” इस तीखे और आक्रामक बयान के बाद सिलीगुड़ी और बिधाननगर कमिश्नरेट के साइबर क्राइम विंग में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। इस पर जस्टिस भट्टाचार्य ने चिंता जताते हुए कहा कि अगर चुनाव के नतीजे अलग होते, तो ऐसे बयानों से राज्य की कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ सकती थी।

अदालत के भीतर वकीलों के बीच तीखी बहस

सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में माहौल काफी गर्मा गया। जब जज ने टीएमसी नेता के ऐसे बयानों की आवश्यकता पर सवाल उठाया, तो अभिषेक बनर्जी के वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने प्रतिवाद करते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं और शाह ने भी चुनावी दौर में बहुत कुछ कहा था। इस पर टिप्पणी करते हुए जज ने याद दिलाया कि जनता ने साल 2011 में एक सकारात्मक बदलाव की उम्मीद में वोट दिया था। जवाब में वकील कल्याण बनर्जी ने चुटकी लेते हुए कहा कि लोगों ने 2026 के चुनावों में भी कुछ अच्छा ही सोचा है। इस पर न्यायाधीश ने संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

वर्चुअल पेशी की मांग अदालत ने की खारिज

अभिषेक बनर्जी के वकीलों ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि उनके मुवक्किल को जांच अधिकारियों के सामने वर्चुअली (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से) पेश होने की अनुमति दी जाए। हालांकि, कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई शर्तें लागू की हैं, जिसके तहत जरूरत पड़ने पर टीएमसी महासचिव को व्यक्तिगत और भौतिक रूप से पुलिस के समक्ष उपस्थित होना होगा। इन सख्त शर्तों के दायरे में रहते हुए ही वे 30 जुलाई तक पुलिस की सीधी गिरफ्तारी से बचे रह सकेंगे, बशर्ते वे देश के भीतर रहकर जांच में पूरा सहयोग दें।

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