100 रुपये घंटा, 10 मिनट में कामवाली: क्या टिक पाएगा यह नया बिजनेस मॉडल?

नई दिल्ली शनिवार की सुबह थी. नोएडा की हाई-राइज सोसायटी में रहने वाली 43 साल शिवानी माथुर दिन की तैयारी में लगी थीं, तभी उनका फोन व्हाट्सऐप नोटिफिकेशन से बजा-दीदी, आज मैं नहीं आऊंगी. यह मैसेज उनके लिए नया नहीं था, लेकिन इस बार समस्या यह थी कि घर में मेहमान आने वाले थे. उन्होंने जल्दी से सोसायटी के ग्रुप पर मैसेज किया-किसी की हाउस हेल्प आज आ सकती है क्या? जवाब आया-अर्बन क्लैप (Urban Clap) का इंस्टाहेल्प (InstaHelp) ट्राय करो, 10–15 मिनट में कोई आ जाएगा. कुछ देर बाद बैंगनी यूनिफॉर्म में एक वर्कर उनके दरवाजे पर थी. उसने

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Published On :

फ़रवरी 28, 2026

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नई दिल्ली

शनिवार की सुबह थी. नोएडा की हाई-राइज सोसायटी में रहने वाली 43 साल शिवानी माथुर दिन की तैयारी में लगी थीं, तभी उनका फोन व्हाट्सऐप नोटिफिकेशन से बजा-दीदी, आज मैं नहीं आऊंगी. यह मैसेज उनके लिए नया नहीं था, लेकिन इस बार समस्या यह थी कि घर में मेहमान आने वाले थे.

उन्होंने जल्दी से सोसायटी के ग्रुप पर मैसेज किया-किसी की हाउस हेल्प आज आ सकती है क्या? जवाब आया-अर्बन क्लैप (Urban Clap) का इंस्टाहेल्प (InstaHelp) ट्राय करो, 10–15 मिनट में कोई आ जाएगा.

कुछ देर बाद बैंगनी यूनिफॉर्म में एक वर्कर उनके दरवाजे पर थी. उसने घर साफ किया, बर्तन धोए और किचन में मदद की-आटा गूंथा, सब्जियां काटीं और चटनी के लिए पुदीना–धनिया तैयार किया. दो घंटे में सारा काम पूरा हो गया और खर्च 200 रुपये से भी कम आया. तभी से यह उनकी फिक्स्ड बैकअप बन चुकी है.

शहरों में नया ट्रेंड: इंस्टेंट हाउस हेल्प 
शिवानी अकेली नहीं हैं. अब पूरे अर्बन इंडिया में लोग इस सुविधा को अपना रहे हैं. पहले पड़ोसियों और जान-पहचान में मदद ढूंढी जाती थी, अब बस ऐप खोलते ही 10 मिनट में मदद घर पर मिल जाती है.

ओला–उबर ने जैसे ट्रैवल बदला, स्विगी–जोमैटो ने फूड डिलीवरी, ब्लिंकिट–बिगबास्केट ने ग्रॉसरी उसी तरह अब स्नैबिट, प्रोंटो, अर्बन क्लैप इंस्टाहेल्प और ब्रूमीज घर के कामों के लिए तैयार हैं.

स्नैबिट ने अगस्त में 1 लाख ऑर्डर से अक्टूबर में 3 लाख और अब फरवरी में लगभग 8.5 लाख ऑर्डर पूरे कर लिए हैं. अर्बन कंपनी का इंस्टाहेल्प भी फरवरी 2026 में 50,000 डेली बुकिंग तक पहुंच गया है.

100 रुपये में एक घंटा! कैसे?
अर्बन कंपनी  पर एक घंटे की सर्विस 100 रुपये की पड़ती है.स्नैबिट पर तीन एक-घंटे वाली विजिट का पैक 149 रुपये में मिलता है, यानी लगभग 50 रुपये प्रति घंटा.वर्कर्स के नेटवर्क पर यह मॉडल चलता है. बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और ट्रेनिंग के बाद वे ऐप पर जॉब रिक्वेस्ट लेते हैं, बिल्कुल ओला/उबर की तरह है.

 बेहतर सैलरी और सम्मान
ज्यादातर महिला वर्कर्स के लिए यह बड़ा बदलाव है.नोएडा सेक्टर 121 में काम करने वाली सुनीता कहती हैं कि अर्बन कंपनी (Urban Company) से मुझे 30,000 रुपये मिलते हैं. 8 घंटे पूरे करना है, लेकिन एक साथ करना जरूरी नहीं. अब 6 बजे से भागमभाग नहीं करनी पड़ती. बच्चों को स्कूल भेजकर 8 बजे के स्लॉट के बाद काम शुरू कर लेती हूं.

कम डिमांड वाले इलाकों में भी उनकी फिक्स्ड सैलरी सुरक्षित रहती है.2 घंटे वाले मॉडल में 10,000 रुपये फिक्स के साथ बोनस भी मिलता है.SOS फीचर, शिकायत का विकल्प और हेल्थ इंश्योरेंस भी दिया जाता है. कई महिलाएं कहती हैं कि यूनिफॉर्म पहनने से सम्मान महसूस होता है.

इतनी सैलरी, इतनी सस्ती कीमत-चल कैसे रहा है यह मॉडल?
असल में कंपनियां अभी स्केल पर फोकस कर रही हैं, मुनाफे पर नहीं.अर्बन कंपनी के इंस्टाहेल्प ने Q3 FY 2026 में 61 करोड़ रुपये का EBITDA लॉस दिखाया.स्नैबि और प्रोंटो  भारी वीसी फंडिंग पर चल रहे हैं.स्नैबिट को 56 मिलियन डॉलर और प्रोंटो (Pronto) को 13 मिलियन डॉलर मिल चुके हैं.

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मॉडल वही रास्ता पकड़ेगा, जो कैब और फूड डिलीवरी में देखा गया.शुरुआत में ज्यादा इंसेंटिव, बाद में कटौती होगी.वर्कर्स की आज की कमाई धीरे-धीरे कम हो सकती है.कस्टमर्स के लिए दाम बढ़ना भी तय माना जा रहा है.अर्बन कंपनी अभी 60 फीसदी डिस्काउंट के बाद 99 रुपये में सर्विस दे रही है. आगे चलकर कीमतें बढ़ेंगी.

क्या लोग फिर भी पैसे देंगे?
यही बड़ा सवाल है. हो सकता है 'बहुत सस्ता, बहुत अच्छा' वाला फेज खत्म हो जाए, लेकिन एक बात साफ दिख रही है-कंज्यूमर बर्ताव बदल रहा है.लोग ऐप-आधारित सुविधाओं के इतने आदी हो चुके हैं कि शायद आगे चलकर ज्यादा पैसे देकर भी यह सुविधा नहीं छोड़ेंगे.भारत का इंस्टेंट हाउस-हेल्प सेक्टर इसी बदलाव की दहलीज़ पर खड़ा है.तेज, आसान और अब हर घर की जरूरत बनता हुआ.

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