
Ayodhya Deepotsav 2026: अयोध्या में दसवें दीपोत्सव को खास और यादगार बनाने की तैयारी है। इस बार रामनगरी में सिर्फ लाखों दीयों की रोशनी ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन आतिशबाजी भी देखने को मिलेगी। सरयू नदी के ऊपर 80 फीट की ऊंचाई से आतिशबाजी होगी और आसमान में खूबसूरत ‘ग्रीन सूर्य’ नजर आएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पूरे आयोजन को इको-फ्रेंडली बनाने की तैयारी की जा रही है।
इस बार ग्रीन आतिशबाजी से जगमगाएगी रामनगरी
रामनगरी अयोध्या में दसवें दीपोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयोजन को भव्य बनाने के साथ-साथ पर्यावरण का भी खास ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं। इसी के तहत इस बार दीपोत्सव में पारंपरिक आतिशबाजी की जगह ग्रीन आतिशबाजी का इस्तेमाल किया जाएगा। यानी आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी तो खूब दिखाई देगी, लेकिन धुएं और प्रदूषण को कम रखने की कोशिश होगी।

सरकार का मकसद साफ है कि दीपोत्सव की भव्यता में कोई कमी न आए और पर्यावरण को भी नुकसान कम से कम पहुंचे। इसी सोच के साथ इस बार अयोध्या में ‘इको-दीपोत्सव’ की तैयारी की जा रही है। श्रद्धालुओं को रोशनी और आतिशबाजी का शानदार नजारा देखने को मिलेगा।
सरयू नदी के ऊपर खिलेगा 80 फीट ऊंचा ग्रीन सूर्य
इस बार दीपोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण सरयू नदी के ऊपर दिखाई देने वाला आकाशीय ‘ग्रीन सूर्य’ होगा। आयोजन से जुड़ी ई फैक्टर एक्सपीरिएंसेज लिमिटेड कंपनी के प्रतिनिधियों के मुताबिक, इस खास आतिशबाजी को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि इसमें जहरीले धुएं और तेज आवाज को कम से कम रखा जाए। इस ग्रीन सूर्य के जरिए आसमान में हरी और सुनहरी रोशनी का खूबसूरत नजारा तैयार किया जाएगा। सरयू नदी के ऊपर जब ये रंग बिखरेंगे तो पूरा वातावरण रोशनी से जगमगा उठेगा। श्रद्धालुओं के लिए यह नजारा काफी खास रहने वाला है। खास बात यह है कि इस बार आतिशबाजी का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देना भी है।
ग्रीन पटाखों में होगा कम धुएं और कम कार्बन वाली तकनीक का इस्तेमाल
दीपोत्सव में इस्तेमाल होने वाली ग्रीन आतिशबाजी को आधुनिक तकनीक के जरिए तैयार किया जा रहा है। इसके लिए पर्यावरण विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की मदद ली जा रही है। पारंपरिक पटाखों में इस्तेमाल होने वाले कुछ रासायनिक तत्वों की जगह ऐसे यौगिकों का इस्तेमाल करने की योजना है, जिनसे कम धुआं और कम कार्बन उत्सर्जन हो।

आमतौर पर पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा को प्रदूषित करता है और लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में ग्रीन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से इस समस्या को कम करने की कोशिश की जा रही है। सरकार चाहती है कि दीपोत्सव में लाखों श्रद्धालु शामिल हों, लेकिन इसकी वजह से अयोध्या की हवा पर ज्यादा बुरा असर न पड़े।
ग्रीन आतिशबाजी में दिखेंगे कई शानदार नजारे
इस बार दीपोत्सव में श्रद्धालुओं को सिर्फ ग्रीन सूर्य ही नहीं, बल्कि कई तरह की आकर्षक आतिशबाजियां देखने को मिलेंगी। इनमें चकरी, रिवर्स फायरिंग, एरियल, रॉकेट, विसिल क्रैकर, तिरंगा और इंद्रधनुष जैसे अलग-अलग रंगों और आकृतियों के नजारे शामिल होंगे।इन सभी आतिशबाजियों को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि आयोजन की भव्यता बनी रहे और पर्यावरण को भी कम से कम नुकसान पहुंचे। अलग-अलग रंगों की रोशनी से आसमान में कई खूबसूरत आकृतियां बनाई जाएंगी।
सरयू पुल पर लगेंगी तीन हाइड्रा मशीनें
आतिशबाजी के इस खास आयोजन के लिए सरयू पुल के ऊपर तीन हाइड्रा मशीनें तैनात की जाएंगी। इनकी मदद से करीब 80 फीट की ऊंचाई पर विशेष प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा। इसी प्लेटफॉर्म से अलग-अलग तरह की ग्रीन आतिशबाजी की जाएगी।आयोजन को लेकर सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। प्रशासन और आयोजन से जुड़ी टीमों की कोशिश है कि श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के इस भव्य नजारे का आनंद मिल सके।
कुल मिलाकर, अयोध्या का दसवां दीपोत्सव इस बार सिर्फ दीयों की रोशनी और भव्य सजावट तक सीमित नहीं रहेगा। ग्रीन सूर्य और पर्यावरण-अनुकूल आतिशबाजी के जरिए रामनगरी दुनिया को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की तैयारी में है।











