जेलेंस्की का तंज- ‘हंगरी के प्रधानमंत्री केवल पेट बढ़ा रहे हैं’

वाशिंगटन. रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लगभग तीन साल पूरे हो गए हैं। जेलेंस्की लगातार यूरोपीय देशों को रूस के प्रति आगाह करते हुए अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने चेतावनी नजर अंदाज करने के लिए हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन पर तीखा हमला बोला है। जेलेंस्की ने कहा कि विक्टर क्षेत्रीय सुरक्षा पर ध्यान देने की बजाय घरेलू राजनीति को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। 'वह केवल अपना पेट बढ़ा रहे हैं, सेना नहीं।' जेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हंगरी की

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Published On :

फ़रवरी 15, 2026

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वाशिंगटन.

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लगभग तीन साल पूरे हो गए हैं। जेलेंस्की लगातार यूरोपीय देशों को रूस के प्रति आगाह करते हुए अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने चेतावनी नजर अंदाज करने के लिए हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन पर तीखा हमला बोला है। जेलेंस्की ने कहा कि विक्टर क्षेत्रीय सुरक्षा पर ध्यान देने की बजाय घरेलू राजनीति को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं।

'वह केवल अपना पेट बढ़ा रहे हैं, सेना नहीं।' जेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हंगरी की तरफ से यूक्रेन की मदद करने की अनिच्छा व्यक्त की गई है। तीन साल से जारी यूक्रेन और रूस के युद्ध ने यूरोपीय संघ के देशों के भीतर भी कलह को बढ़ा दिया है। ज्यादातर देश रूस के खिलाफ यूक्रेन को राहत पैकेज देने और मॉस्को पर प्रतिबंध का समर्थन करते हैं, लेकिन हंगरी बार-बार इन उपायों को किसी न किसी वजह से या बातचीत के बहाने से धीमा करता हुआ नजर आता है। हंगरी लगातार इस युद्ध को आगे न बढ़ाने के लिए भी चेतावनी देता हुआ नजर आता है। दरअसल, विक्टर ओर्बन को रूसी राष्ट्रपति पुतिन का करीबी माना जाता है, जिसकी वजह से उन्हें कीव समेत कई यूरोपीय देशों से आलोचना का सामना करना पड़ता है।

यूक्रेन युद्ध में किसके साथ हंगरी?
हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन ने शुरुआत से ही यूरोपीय देशों द्वारा यूक्रेन को दिए जा रहे अतिरिक्त फंडिंग का विरोध किया है। इतना ही नहीं उन्होंने सीधे हथियारों की आपूर्ति का भी विरोध किया है। ओर्बान ने हंगरी के हथियारों को यूक्रेन को देने से इनकार करते हुए कहा था कि बुडापेस्ट को अपनी आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा को ज्यादा प्राथमिकता देनी है। इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी यूक्रेन में रहने वाले हंगेरियाई मूल के लोगों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को लेकर भी यूक्रेनी सरकार पर सवाल उठाया था। हालांकि, यूक्रेन और हंगरी के बीच यह खींचतान पिछले काफी समय से चली आ रही है। हालिया विवाद उस समय सामने आया, जब यूरोपीय संघ के देशों की तरफ से यूक्रेन के लिए एक दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी और रूस के ऊपर आर्थिक प्रतिबंधों पर विचार कर रहे हैं। हंगरी ने इन प्रस्तावों का खुले तौर पर विरोध किया है।

गौरलतब है कि रूस और यूक्रेन युद्ध पिछले तीन साल से जारी है। अमेरिका समेत तमाम देश इसे खत्म करवाने के लिए कोशिश कर चुके हैं, लेकिन यह बदस्तूर जारी है। दोनों देशों की तरफ से कई लाख सैनिक इस युद्ध में अपनी जान गंवा चुके हैं। युद्ध के पहले यूक्रेन जिस नाटो की सदस्यता लेने की जिद किए बैठा था, अब वह भी उससे दूर जा चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा साफ कह दिया गया है कि यूक्रेन को नाटो की सदस्यता नहीं मिलेगी। अभी रूस और यूक्रेन के बीच में विवाद जमीन को लेकर फंसा हुआ है। रूस युद्ध में कब्जाई जमीन को छोड़ने के लिए राजी नहीं है, ऐसे में युद्ध लगातार जारी है।

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