UP News: वाराणसी में योगी का बड़ा संदेश, धर्म और राष्ट्ररक्षा पर कही ये बात

UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शस्त्र सिर्फ पूजा करने की चीज नहीं हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर देश की रक्षा के लिए भी इन्हें धारण करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांति के समय धर्म का रास्ता संयम, आपसी सौहार्द और समाज की भलाई का होता है, लेकिन जब राष्ट्र और धर्म पर संकट आए तो उसकी रक्षा के लिए संघर्ष करने से भी पीछे नहीं हटना चाहिए। भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह को किया संबोधित बताते चले कि, मुख्यमंत्री बुधवार को वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 15, 2026

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UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शस्त्र सिर्फ पूजा करने की चीज नहीं हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर देश की रक्षा के लिए भी इन्हें धारण करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांति के समय धर्म का रास्ता संयम, आपसी सौहार्द और समाज की भलाई का होता है, लेकिन जब राष्ट्र और धर्म पर संकट आए तो उसकी रक्षा के लिए संघर्ष करने से भी पीछे नहीं हटना चाहिए।

भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह को किया संबोधित

भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह को किया संबोधित

बताते चले कि, मुख्यमंत्री बुधवार को वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने धर्म, राष्ट्ररक्षा, सनातन परंपरा और समाज सेवा के महत्व पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश और धर्म के लिए किया गया हर त्याग महान होता है। जरूरत पड़ने पर हर व्यक्ति को राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार रहना चाहिए।

धर्म के लिए समर्पित होता है संन्यासी का जीवन

आपको बता दे कि, सीएम योगी ने कहा कि एक संन्यासी का जीवन धन कमाने के लिए नहीं, बल्कि धर्म और समाज की सेवा के लिए समर्पित होता है। उन्होंने कहा कि संन्यासी अपने जीवन में धर्म को सबसे ऊपर रखता है। अगर युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो जाए और राष्ट्र की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने की जरूरत पड़े, तो संन्यासी भी पीछे नहीं हटते।

उन्होंने भारत सेवाश्रम संघ की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि यहां मां भगवती की पूजा केवल धूप और दीप जलाकर नहीं की जाती, बल्कि शस्त्रों के माध्यम से भी पूजन की परंपरा है। उनके मुताबिक, यह परंपरा शक्ति, साहस और राष्ट्र की सुरक्षा के संकल्प को दर्शाती है।

स्वामी प्रणवानंद के योगदान को किया याद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रणवानंद ने देश और विदेश में सनातन मूल्यों और ऋषि परंपरा का प्रचार-प्रसार किया। आज भी संस्था उनके आदर्शों पर चलते हुए समाज सेवा और आध्यात्मिक कार्यों में जुटी हुई है।

स्वामी प्रणवानंद के योगदान को किया याद

योगी ने बताया कि स्वामी प्रणवानंद ने गोरखपुर में गोरक्षपीठ के तत्कालीन सिद्धयोगी बाबा गंभीरनाथ से दीक्षा ली थी। इसके बाद उन्होंने काशी में भारत सेवाश्रम संघ की स्थापना की। धीरे-धीरे संस्था की शाखाएं देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थापित हुईं। मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि कठिन राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद संघ के संन्यासी सनातन मूल्यों और हिंदू समाज के हितों के लिए काम करते रहे।

काशी विश्वनाथ और राम मंदिर का किया जिक्र

सीएम योगी ने कहा कि जब किसी राष्ट्र पर संकट आता है, तो उसकी आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत भी प्रभावित होती है। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर, राम जन्मभूमि और श्रीकृष्ण जन्मभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि विदेशी आक्रमणों के दौरान देश की धार्मिक विरासत को नुकसान पहुंचाया गया।

उन्होंने कहा कि आपसी बंटवारे और एकजुटता की कमी का खामियाजा देश को भुगतना पड़ा। इसी पृष्ठभूमि में संतों ने आध्यात्मिक साधना को राष्ट्रीय जागरण से जोड़ने का काम किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम के विकास और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को राष्ट्रीय चेतना और संकल्प का परिणाम बताया।

भारत सेवाश्रम संघ ने 100 परिवारों को दी सिलाई मशीनें

शताब्दी समारोह के दौरान भारत सेवाश्रम संघ की ओर से 100 परिवारों को सिलाई मशीनें दी गईं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद पांच परिवारों को सिलाई मशीनें सौंपकर इस पहल की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करते हैं। सीएम योगी ने इसे आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए संघ के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने प्रयागराज कुंभ के दौरान संघ की ओर से चलाए गए अन्नक्षेत्र और देशभर में संचालित अन्य जनकल्याणकारी गतिविधियों का भी उल्लेख किया।

भारत सेवाश्रम संघ ने 100 परिवारों को दी सिलाई मशीनें

मुख्यमंत्री ने कहा कि आध्यात्मिक साधना का असली उद्देश्य समाज की सेवा करना और लोगों को मजबूत बनाना है। शांति के समय सेवा, सद्भाव और लोककल्याण के जरिए समाज को आगे बढ़ाना ही धर्म की सार्थकता है।

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