बाल काटकर पहलवान रोहिणी ने रचा इतिहास, ट्रायल में हासिल की जीत

नई दिल्ली पेरिस ओलंपिक 2024 में भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट का सिर्फ 100 ग्राम वजन ज्यादा होने की वजह से जो दिल टूटा था, उसकी टीस आज भी हर खेल प्रेमी के मन में है। विनेश तो ओलंपिक मेडल से चूक गईं, लेकिन वैसी ही एक अग्निपरीक्षा से गुजरते हुए महाराष्ट्र की 16 साल की युवा पहलवान रोहिणी खानू देवबा ने इतिहास रच दिया है। वजन संतुलित करने के लिए रोहिणी ने महज कुछ ही मिनटों में अपने सिर के बाल कटवा दिए और न सिर्फ वजन कम किया, बल्कि ट्रायल जीतकर अंडर-17 वर्ल्ड चैंपियनशिप की टीम में अपनी

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Published On :

जून 17, 2026

नई दिल्ली
पेरिस ओलंपिक 2024 में भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट का सिर्फ 100 ग्राम वजन ज्यादा होने की वजह से जो दिल टूटा था, उसकी टीस आज भी हर खेल प्रेमी के मन में है। विनेश तो ओलंपिक मेडल से चूक गईं, लेकिन वैसी ही एक अग्निपरीक्षा से गुजरते हुए महाराष्ट्र की 16 साल की युवा पहलवान रोहिणी खानू देवबा ने इतिहास रच दिया है। वजन संतुलित करने के लिए रोहिणी ने महज कुछ ही मिनटों में अपने सिर के बाल कटवा दिए और न सिर्फ वजन कम किया, बल्कि ट्रायल जीतकर अंडर-17 वर्ल्ड चैंपियनशिप की टीम में अपनी जगह पक्की कर ली।

जब कांप गई थी रोहिणी की रूह
हरियाणा के सोनीपत में अंडर-17 वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए चयन ट्रायल चल रहे थे। यह चैंपियनशिप 27 जुलाई से 2 अगस्त तक बाकू, अजरबैजान में होने वाली है। रोहिणी ने 36kg-40kg भार वर्ग में हिस्सा लेने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। लेकिन जब सोमवार को वेइंग मशीन पर उनका वजन लिया गया, तो वह तय सीमा से ठीक 100 ग्राम ज्यादा निकला। रोहिणी के सामने नेशनल टीम में शामिल होने का यह सुनहरा मौका गंवाने का खतरा मंडरा रहा था। ठीक वैसा ही जैसा विनेश फोगाट के साथ पेरिस में हुआ था। लेकिन रोहिणी ने हिम्मत नहीं हारी और कुछ ही मिनटों में अपने कोच से कैंची मंगाकर अपने बाल काटने की जिद पकड़ ली।

कोच ने काटे बाल, फिर रोहिणी ने चटाई विरोधियों को धूल
साल 2021 से रोहिणी को उनके NIS रेसलिंग सेंटर में ट्रेनिंग दे रहे कोच संदीप पाटिल ने इस भावुक पल को याद करते हुए बताया, 'वह सिर्फ 100 ग्राम वजन की वजह से इतने बड़े मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहती थी। उसने तुरंत फैसला किया और हमने उसके बाल काट दिए।' बाल काटने के बाद रोहिणी ने न सिर्फ अपना वजन बराबर किया, बल्कि मैदान पर उतरकर अपने हुनर का जलवा बिखेरा। उन्होंने फाइनल मुकाबले में हरियाणा की तगड़ी पहलवान वंशिका को धूल चटाते हुए कुल 4 मुकाबले जीते और भारतीय टीम में अपना टिकट कन्फर्म कर लिया।

चरवाहे की बेटी, जिसके पास प्रतिभा है पर संसाधन नहीं
रोहिणी कोल्हापुर जिले के पट्टन कोडोली गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता खानू देवबा धनगर समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और भेड़-बकरियां चराकर अपने परिवार का पेट पालते हैं। वे अक्सर महीनों तक अपने मवेशियों के साथ एक गांव से दूसरे गांव भटकते रहते हैं। चार भाई-बहनों में रोहिणी सबसे बड़ी हैं। रोहिणी की प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह अंडर-15 एशियन चैंपियनशिप में साल 2024 में गोल्ड मेडल और 2025 में सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। इसके अलावा वह पढ़ाई में भी काफी होनहार हैं और हाल ही में उन्होंने दसवीं कक्षा में 78 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।

कोच का बड़ा संकल्प
रोहिणी की आर्थिक स्थिति को देखते हुए कोच संदीप पाटिल 2021 से उनके रहने, खाने और ट्रेनिंग का पूरा खर्च खुद उठा रहे हैं। संदीप का इरादा रोहिणी को ओलंपिक के मंच तक ले जाने का है। कोच पाटिल ने कहा, 'मैंने रोहिणी के माता-पिता से कह दिया है कि वे उसकी चिंता न करें। अगर कभी पैसों की बहुत ज्यादा जरूरत पड़ी, तो मैं अपनी जमीन का छोटा सा टुकड़ा गिरवी रख दूंगा, लेकिन पैसों की तंगी की वजह से उसकी इस यात्रा को रुकने नहीं दूंगा। इस समय रोहिणी को सिर्फ थोड़े वित्तीय सहयोग और ज्यादा से ज्यादा इंटरनेशनल टूर्नामेंटों में खेलने के अनुभव की जरूरत है।' अंडर-17 वर्ल्ड चैंपियनशिप की टीम में जगह बनाने के लिए बाल कटवाना रोहिणी के इस बड़े सफर का पहला कदम था। अब रोहिणी और उनके कोच का अगला लक्ष्य बाकू में तिरंगा लहराकर देश के लिए मेडल जीतना है।