Women Reservation: देश में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लागू, केंद्र सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन, अब कानून बना महिला आरक्षण

नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 अब आधिकारिक रूप से देशभर में लागू हो गया है, जिसकी अधिसूचना केंद्रीय कानून मंत्रालय ने जारी कर दी है। यह ऐतिहासिक कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 17, 2026

Women Reservation: भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा पड़ाव पार कर लिया गया है। केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को देशभर में लागू करने के लिए आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है। गुरुवार, 16 अप्रैल 2026 से यह कानून औपचारिक रूप से अस्तित्व में आ गया है। केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा देर शाम जारी की गई इस अधिसूचना ने इस ऐतिहासिक सुधार को कानूनी जामा पहना दिया है।

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अधिसूचना का मुख्य अंश और तिथि का निर्धारण

Women Reservation
देश में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लागू

कानून मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा-1 की उप-धारा (2) के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए, केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल, 2026 को वह तारीख तय की है, जिससे इस अधिनियम के सभी प्रावधान प्रभावी माने जाएंगे।

हालांकि, इस विशेष तिथि को चुनने के पीछे के सटीक कारणों का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि जब संसद में इस कानून के कार्यान्वयन वर्ष (2029) को लेकर बहस और संशोधन की प्रक्रिया चल रही है, तब इस अधिनियम को ‘सुरक्षित’ रखने और कानूनी प्रक्रियाओं को समयबद्ध करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

आरक्षण का स्वरूप और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सितंबर 2023 में संसद के दोनों सदनों द्वारा सर्वसम्मति के करीब पारित किया गया यह विधेयक विधायिकाओं में लैंगिक समानता लाने का सबसे बड़ा प्रयास है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित की जाएंगी। इसका उद्देश्य नीति-निर्माण और कानून बनाने की प्रक्रिया में महिलाओं की प्रत्यक्ष और प्रभावी भागीदारी बढ़ाना है।

कार्यान्वयन की चुनौतियां

भले ही कानून कागजों पर लागू हो गया है, लेकिन धरातल पर सीटों का आरक्षण तुरंत प्रभावी नहीं होगा। अधिनियम के मूल प्रावधानों के अनुसार, महिला आरक्षण को दो प्रमुख प्रक्रियाओं से जोड़ा गया है:

जनगणना: जो अब 2027 में प्रस्तावित है।

परिसीमन: जनगणना के आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण।

पुराने प्रावधानों के हिसाब से यह आरक्षण 2034 से पहले लागू होना कठिन था। लेकिन वर्तमान में सरकार संसद में तीन नए संशोधन विधेयक लेकर आई है, जिनका उद्देश्य इन तकनीकी बाधाओं को दूर कर आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनावों तक प्रभावी बनाना है।

वर्तमान स्थिति और भविष्य की राह

सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 16 अप्रैल से कानून के लागू होने का अर्थ यह नहीं है कि वर्तमान सदन में कोई बदलाव होगा। वर्तमान लोकसभा या मौजूदा विधानसभाओं में आरक्षण का लाभ तब तक नहीं मिल सकता जब तक परिसीमन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।

यह अधिसूचना एक ‘लीगल ट्रिगर’ की तरह है, जो भविष्य के संशोधनों और प्रशासनिक तैयारियों के लिए आधार तैयार करती है। सरकार का यह कदम दर्शाता है कि वह महिलाओं को सत्ता के शीर्ष पर देखने के अपने वादे को लेकर गंभीर है, भले ही इसके पूर्ण क्रियान्वयन के लिए अभी कुछ वर्षों का इंतजार और आवश्यक हो। यह कानून भारतीय राजनीति के भविष्य को बदलने वाला एक मील का पत्थर साबित होगा।

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