Mahila Aarakshan Bill 2026: भारतीय राजनीति के इतिहास में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने से जुड़े ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ पर आज चर्चा समाप्त होगी। इसके बाद, शाम 4 बजे सदन में मत विभाजन (Voting) की प्रक्रिया शुरू होगी।
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सदन में लंबी चर्चा और मुख्य विधेयक
सरकार ने गुरुवार को तीन महत्वपूर्ण विधेयक सदन के पटल पर रखे थे
संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026
परिसीमन विधेयक 2026
संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026
इन विधेयकों पर गुरुवार देर रात 1:20 बजे तक गहन चर्चा चली। आज सुबह से चर्चा को फिर से आगे बढ़ाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन विधेयकों को देश की नारी शक्ति के सशक्तिकरण के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
विपक्ष की आपत्तियां और परिसीमन का मुद्दा
विपक्षी दलों ने चर्चा के दौरान सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का मुख्य आरोप यह है कि सरकार आरक्षण को परिसीमन (Delimitation) से जोड़कर इसे और लंबा खींचना चाहती है। विपक्ष का तर्क है कि आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से मुक्त रखा जाना चाहिए और इसे 2029 से ही वर्तमान 543 सीटों के आधार पर लागू किया जाना चाहिए। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की हिस्सेदारी और राजनीतिक जमीन को लेकर भी विपक्षी नेताओं ने चिंता व्यक्त की है।
प्रधानमंत्री की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों से इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने का आग्रह किया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जो भी दल इस प्रगतिशील कदम का विरोध करेंगे, उन्हें भविष्य में इसकी बड़ी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
पीएम मोदी ने परिसीमन से जुड़ी चिंताओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सीटों का अनुपात वही रहेगा जो पहले से चला आ रहा है। सीटों की संख्या में वृद्धि भी मौजूदा अनुपात के आधार पर ही होगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस कानून का श्रेय विपक्षी दलों को भी देने के लिए तैयार हैं, बशर्ते वे देशहित में इसका साथ दें।
महिला आरक्षण अधिनियम 2023 हुआ लागू
एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, विधि मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर महिला आरक्षण अधिनियम 2023 को 16 अप्रैल से प्रभावी रूप से लागू कर दिया है। वर्तमान में संसद में जो चर्चा चल रही है, वह इस कानून में संशोधन करने और इसे 2029 के चुनावों में पूर्ण रूप से कार्यान्वित करने की रूपरेखा तैयार करने के लिए है।
आगे की राह
यदि यह विधेयक आज लोकसभा से पारित हो जाता है, तो यह राज्यसभा की मंजूरी के बाद कानून का रूप ले लेगा। इसके साथ ही भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी का एक नया युग शुरू होगा। पूरे देश की नजरें शाम 4 बजे होने वाले मत विभाजन पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि महिला सशक्तिकरण की यह डगर कितनी सुगम होगी।
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