West Bengal CM News: पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। 293 सीटों वाली विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी ने 206 सीटों पर ऐतिहासिक विजय दर्ज कर सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है। पिछले चुनाव की 77 सीटों से छलांग लगाकर पूर्ण बहुमत हासिल करने के बाद अब सबकी निगाहें इस सवाल पर टिकी हैं कि राज्य की कमान किसके हाथों में होगी। प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने पुष्टि की है कि 9 मई को शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा, लेकिन ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ इसे लेकर सस्पेंस बरकरार है।
जायंट किलर सुवेंदु अधिकारी सबसे आगे
बताते चले कि, मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे पहला और सशक्त नाम सुवेंदु अधिकारी का उभर कर सामने आया है। नंदीग्राम के बाद अब भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को मात देकर वे ‘जायंट किलर’ के रूप में उभरे हैं। 55 वर्षीय अधिकारी के पास न केवल प्रशासनिक अनुभव है, बल्कि पिछले पांच वर्षों से नेता विपक्ष के रूप में उन्होंने जमीन पर संघर्ष किया है। हालांकि, भाजपा का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि वह अंतिम समय पर चौंकाने वाले फैसले लेती है, जिससे अन्य दावेदारों की उम्मीदें भी जिंदा हैं।
रूपा गांगुली या अग्निमित्रा पॉल बनेंगी पहली महिला मुख्यमंत्री?
आपको बता दे कि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा ममता बनर्जी के विकल्प के रूप में किसी महिला चेहरे पर दांव लगा सकती है। जब पार्टी देश भर में महिला आरक्षण और नारी शक्ति के सशक्तिकरण की बात कर रही है, तो बंगाल जैसे राज्य में महिला मुख्यमंत्री का कार्ड खेलना मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है। दावेदारों में सोनारपुर दक्षिण से जीतीं रूपा गांगुली और आसनसोल दक्षिण की विधायक अग्निमित्रा पॉल के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। रूपा गांगुली का लंबा राजनीतिक अनुभव और अग्निमित्रा की सक्रियता उन्हें इस पद का प्रबल दावेदार बनाती है।
समिक भट्टाचार्य, दिलीप घोष और सुकांत मजूमदार भी रेस में शामिल
नेतृत्व की इस फेहरिस्त में पार्टी के दिग्गज संगठनकर्ताओं के नाम भी शामिल हैं। प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य (62 वर्ष) और पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष (61 वर्ष) के पास जमीनी पकड़ है। विशेष रूप से दिलीप घोष को बंगाल में भाजपा की जड़ें मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है और उन्हें आरएसएस का भी समर्थन प्राप्त है। दूसरी ओर, 46 वर्षीय युवा नेता और केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार भी एक मजबूत विकल्प हैं। पार्टी आलाकमान को अनुभव और युवा ऊर्जा के बीच संतुलन बनाना होगा।
अमित शाह का ‘बंगाली’ मापदंड
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान ही स्पष्ट कर दिया था कि बंगाल का नया मुख्यमंत्री बंगाली बोलने वाला और बंगाली मीडियम से पढ़ा-लिखा ही होगा। यह बयान बाहरी बनाम भीतरी की बहस को खत्म करने के लिए दिया गया था। इस मापदंड पर सुवेंदु, दिलीप और समिक भट्टाचार्य जैसे सभी प्रमुख नेता खरे उतरते हैं। 9 मई की तारीख नजदीक आते ही दिल्ली से लेकर कोलकाता तक बैठकों का दौर जारी है, जहां “सोनार बांग्ला” के विजन को धरातल पर उतारने वाले चेहरे की तलाश की जा रही है।
महिला विधायकों की बढ़ती संख्या
इस बार के परिणामों में महिलाओं की भागीदारी ने नया रिकॉर्ड बनाया है। भाजपा की ओर से रूपा गांगुली और अग्निमित्रा पॉल के अलावा शिखा चटर्जी और तापसी मंडल जैसी नेत्रियों ने भी शानदार जीत हासिल की है। कुल 385 महिला उम्मीदवारों में से कई दिग्गज सदन में पहुँच रही हैं। यह बढ़ती संख्या दर्शाती है कि बंगाल की राजनीति अब केवल पुरुष प्रधान नहीं रही, और मुख्यमंत्री पद के लिए महिला दावेदारी महज एक कयास नहीं बल्कि एक ठोस राजनीतिक विकल्प है।










