MP Bus Service: 25 सितंबर से दौड़ेंगी 351 सुगम बसें, जानिए किन 7 शहरों में मिलेगी सुविधा

मध्यप्रदेश में 25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू होने जा रही है। पहले चरण में 351 बसें सात शहरों में चलेंगी। इनमें इंटरसिटी और इंट्रासिटी दोनों सेवाएं शामिल हैं। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को इस चरण में जोड़ा गया है।

MP Bus Service

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 24, 2026

MP Bus Service : मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नया स्वरूप देने की तैयारी पूरी हो गई है। 25 सितंबर से प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू की जाएगी। भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सात शहरों की 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इस सेवा का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच बस कनेक्टिविटी मजबूत करना है।

सात शहरों से शुरू होगी बस सेवा

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुरुआती चरण में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को शामिल किया गया है। इन सात शहरों में कुल 351 बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इनमें शहरों के भीतर चलने वाली इंट्रासिटी और शहरों को आपस में जोड़ने वाली इंटरसिटी बसें शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में इस नेटवर्क को प्रदेश के अन्य क्षेत्रों तक विस्तार देना है।

इंदौर में सबसे ज्यादा 145 बसें होंगी संचालित

पहले चरण में इंदौर को 145 बसें मिलेंगी। इनमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। भोपाल में 106 बसें संचालित होंगी, जिनमें 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी बसें हैं। जबलपुर में 67 बसों का संचालन प्रस्तावित है, जिसमें 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। इसके अलावा रीवा में 18, देवास में 10, कटनी में 3 और भिंड में 2 इंटरसिटी बसें शुरू की जाएंगी।

2031 तक 15 हजार बसों का बड़ा लक्ष्य

सरकार ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को चरणबद्ध तरीके से विस्तार देने की योजना बनाई है। इसके तहत पहले वर्ष लगभग 1,500 बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद हर साल करीब 2,500 से 3,000 बसें नेटवर्क में जोड़े जाने की योजना है। वर्ष 2031 तक प्रदेश में लगभग 15 हजार सार्वजनिक बसें संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक परिवहन सेवा पहुंचाने की दिशा में काम किया जाएगा।

गांवों को शहरों से जोड़ने पर रहेगा फोकस

नई परिवहन सेवा का एक प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर करना है। बस नेटवर्क के विस्तार से गांवों से जिला मुख्यालयों और बड़े शहरों तक आने-जाने के विकल्प बढ़ाने की योजना है। सरकार की योजना केवल बसों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बस स्टैंड, टर्मिनल और डिपो जैसी परिवहन सुविधाओं को भी आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

PPP मॉडल से निजी ऑपरेटरों की होगी भागीदारी

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी के लिए पारदर्शी अनुबंध व्यवस्था और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएंगी। ऑपरेटरों को विज्ञापन और कार्गो जैसी गैर-किराया आय के माध्यम से अतिरिक्त राजस्व जुटाने का अवसर भी मिलेगा। आधुनिक डिपो और टर्मिनल सुविधाओं के इस्तेमाल के साथ संचालन को सुचारु बनाने के लिए प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने की योजना है।

ITMS से होगी बसों की रियल-टाइम निगरानी

नई व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया है। इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम यानी ITMS के माध्यम से बसों की लोकेशन, संचालन और समयबद्धता पर रियल-टाइम नजर रखी जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसकी सात सहायक कंपनियों में कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं।

CCTV और पैनिक बटन से बढ़ेगी सुरक्षा

यात्रियों की सुरक्षा के लिए बसों में आधुनिक निगरानी और आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बसों में CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। आपात स्थिति में यात्रियों को तत्काल सहायता दिलाने के लिए पैनिक बटन की सुविधा भी दी जाएगी। इसके अलावा प्रत्येक बस की लाइव लोकेशन जानने के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।

यात्रियों को मिलेगी रियल-टाइम यात्रा जानकारी

बसों में पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम की सुविधा भी विकसित की जा रही है। इसके माध्यम से यात्रियों को बस के संचालन और यात्रा से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। ड्राइवरों को आधुनिक तकनीक और सुरक्षित यातायात व्यवस्था के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा। यात्रियों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए शिकायत निवारण तंत्र भी तैयार किया जाएगा।

आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन का लक्ष्य

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के जरिए प्रदेश में सुरक्षित, सुविधाजनक, पारदर्शी और समयबद्ध सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने की योजना है। सरकार सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के साथ पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों के विस्तार पर भी जोर दे रही है। 25 सितंबर को 351 बसों से शुरू होने वाली यह व्यवस्था आगे चलकर प्रदेश के बड़े हिस्से को बस नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में पहला चरण होगी।

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