IPS Lipi Singh News: वैसे तो बिहार में दबंगाईयों और बाहुबली नेताओं की कोई कमी नहीं है। इसी तरह बिहार के बाहुबलियों की सूची में शामिल एक नाम अनंत सिंह (Anant Singh) का भी है। बिहार में ‘छोटे सरकार’ के नाम से प्रसिद्ध अनंत सिंह का रसूख किसी से भी छुपा नहीं है। खासतौर से बिहार के बाढ़ इलाके में अनंत सिंह के नाम की बजाय ‘छोटे सरकार’ का ही नाम चलता है। लेकिन इस बाहुबली को चुनौंती देने वाली एक महिला आईपीएस अधिकारी थीं, जिनसे अनंत सिंह भी खौफ खाते थे।
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ये है वो आईपीएस अधिकारी

जिस आईपीएस अधिकारी से अंनत सिंह का छत्तीस आकड़ा था उनका नाम है आईपीएस लिपि सिंह। आईपीएस लिपि सिंह, जो कभी पटना के बाढ़ अनुमंडल की एडिशनल एसपी थीं, ने बाहुबली विधायक अनंत सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की थी। साल 2015 में, लिपि सिंह के नेतृत्व में अनंत सिंह के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई हुई थी, जिसमें उनके मोकामा के पैतृक गांव लदमा में छापेमारी की गई थी। इस छापेमारी में अनंत सिंह के घर से एके-47 राइफल, गोलियां और बुलेटप्रूफ जैकेट बरामद हुए थे। इस घटना के बाद जब पुलिस अनंत सिंह के पटना आवास पहुंची, तो अनंत सिंह फरार हो गए। लिपि सिंह ने यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने अनंत सिंह के करीबी लल्लू मुखिया को पकड़ने के लिए दबिश बनाई और उसकी संपत्ति भी कुर्क करा दी। उस समय भी लिपि सिंह काफी सुर्खियों में रहीं और उनके कार्रवाई की हर तरफ वाहवाही हुई थी।
लिपि सिंह ने ही की इस मामले की जांच

इस पूरे मामले की जांच बाढ़ अनुमंडल की तत्कालीन एएसपी लिपि सिंह ने की थी। उन्होंने 5 नवंबर 2019 को कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी। पुलिस की ओर से कुल 13 गवाह पेश किए गए जबकि अनंत सिंह ने 34 गवाह पेश किए। लिपि सिंह ने अनंत सिंह पर यूएपीए (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के तहत मुकदमा दर्ज किया था, जो उनके खिलाफ सबसे बड़ा कानूनी हथियार साबित हुआ।
पत्नी ने लिपि सिंह के खिलाफ की शिकायत

इसी बीच चुनाव के दौरान अनंत सिंह की पत्नी ने लिपि सिंह के खिलाफ शिकायत कर दी। जिसके बाद उनका तबादला बाढ़ अनुमंडल की एडिशनल एसपी के पद से आतंक निरोधक दस्ते में कर दिया गया। लेकिन समय बदला और चुनाव खत्म होते ही लिपि सिंह वापस बाढ़ की एडिशनल एसपी बनकर आ गईं है। उन्हें अनंत सिंह के केस की जांच की जिम्मेदारी मिल गई।
अनंत सिंह ने किया सरेंडर
काफी समय से फरार अनंत सिंह ने 24 अगस्त 2019 को दिल्ली के साकेत कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। जिसके बाद उन्हें पटना लाया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अनंत सिंह तीन साल तक जेल में बंद रहे। पटना के एमपी एमएलए कोर्ट ने 14 जून 2022 को उन्हें दोषी बताते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी। जिसके खिलाफ उन्होंने पटना हाईकोर्ट में अपील की थी।
अब कोर्ट से मिली राहत

पटना हाईकोर्ट ने बुधवार को अनंत सिंह को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। AK-47 केस में उन्हें सबूतों के अभाव में बरी किया गया। इसके बाद शुक्रवार को अनंत सिंह को बेऊर जेल से रिहा कर दिया गया। रिहा होने के बाद उन्होंने मीडिया से भी बात की और कहा, “हमें न्याय मिला है और बाहर आकर बढ़िया लग रहा है।”
अनंत सिंह की कहानी बिहार की राजनीति और बाहुबलियों की शक्ति का एक प्रमुख उदाहरण है। लिपि सिंह की कड़ी कार्रवाई ने यह साबित किया कि कानून के हाथ कितने लंबे होते हैं। हालांकि, अदालत से बरी होने के बाद यह सवाल उठता है कि क्या न्यायपालिका में राजनीतिक हस्तक्षेप होता है? अनंत सिंह का बरी होना और लिपि सिंह का तबादला दोनों ही घटनाएं बिहार की राजनीति में कई सवाल खड़े करती हैं। एक बात तो तय है कि ‘छोटे सरकार’ की कहानी अब भी अधूरी है और इसमें कई नए मोड़ आ सकते हैं।