Bengal Bulldozer Action: बंगाल में हार के बाद TMC में बड़ी दरार? पहले ही धरने से गायब रहे आधे से ज्यादा विधायक

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी कलह तेज हो गई है। राज्य की नई भाजपा सरकार के खिलाफ विधानसभा परिसर में आयोजित पार्टी के पहले बड़े धरने से 80 में से 46 विधायक नदारद रहे। आधे से अधिक विधायकों की इस गैरहाजिरी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।

Bengal Bulldozer Action

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मई 20, 2026

Bengal Bulldozer Action: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मिली करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अंदरूनी परेशानियां और राजनीतिक मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। राज्य की सत्ता हाथ से जाने के बाद, नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के खिलाफ बुधवार को विधानसभा परिसर में आयोजित टीएमसी का पहला बड़ा विरोध प्रदर्शन ही गंभीर विवादों और सवालों के घेरे में आ गया है। नवनिर्वाचित विधायकों की बेहद कम मौजूदगी ने विपक्षी दल के रूप में पार्टी की एकजुटता और भविष्य की रणनीति की पोल खोलकर रख दी है।

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विरोध प्रदर्शन का फ्लॉप शो

बताते चले कि, तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव नतीजों के बाद बंगाल में हुई कथित राजनीतिक हिंसा, नवगठित भाजपा सरकार की बुलडोजर कार्रवाई और रेलवे स्टेशनों व जमीनों के आसपास से रेहड़ी-पटरी वालों (फेरीवालों) को जबरन हटाए जाने के विरोध में एक बड़े धरने का आह्वान किया था। विधानसभा परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने आयोजित इस धरने में टीएमसी के कुल 80 नवनिर्वाचित विधायकों में से 46 विधायक पूरी तरह गायब रहे। मैदान में सिर्फ 34 विधायक ही पहुंचे, जिसके कारण विपक्षी दल का यह बड़ा आंदोलन आपसी गुटबाजी की भेंट चढ़ गया और महज आधे घंटे के भीतर ही समेटना पड़ा।

गुटबाजी और अंदरूनी कलह उजागर

इस विरोध प्रदर्शन में तृणमूल विधायक दल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय, पूर्व मंत्री व कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम और मुख्य प्रवक्ता कुणाल घोष जैसे कद्दावर चेहरे तो मंच पर अग्रिम पंक्ति में बैठे दिखे, लेकिन पीछे की कुर्सियां खाली रहीं। शुरुआत में केवल 31 विधायक ही धरना स्थल पर पहुंचे थे, बाद में तीन और विधायकों की एंट्री से यह संख्या किसी तरह 34 तक पहुंच सकी। राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट इसलिए भी तेज है क्योंकि ठीक एक दिन पहले टीएमसी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित निजी आवास पर बुलाई गई विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक से भी 15 विधायक नदारद रहे थे।

नारों से गायब हुआ बड़ा नाम

विधानसभा परिसर में हुए इस प्रदर्शन के दौरान एक और बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई, जिसने राजनीतिक पंडितों का ध्यान खींचा। पूरे धरने के दौरान ‘ममता बनर्जी जिंदाबाद’ और ‘तृणमूल कांग्रेस जिंदाबाद’ के गगनभेदी नारे तो खूब गूंजे, लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ‘अभिषेक बनर्जी जिंदाबाद’ का एक भी नारा सुनाई नहीं दिया। सत्ता जाने के बाद शीर्ष नेतृत्व के नारों से एक बड़े चेहरे का इस तरह गायब होना, पार्टी के भीतर चल रहे नए सियासी समीकरणों, संभावित असंतोष और आंतरिक खींचतान की ओर साफ इशारा कर रहा है।

पार्टी प्रवक्ता की आधिकारिक सफाई

विधायकों की इस सामूहिक अनुपस्थिति पर मचे चौतरफा बवाल को शांत करने के लिए तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने मीडिया के सामने आकर सफाई पेश की। उन्होंने आंतरिक फूट के दावों को खारिज करते हुए कहा, “चुनाव के बाद राज्य के कई हिस्सों में हमारे जमीनी कार्यकर्ताओं पर हिंसक हमले हुए हैं, जिसके चलते कई विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था और स्थिति को संभालने में व्यस्त हैं।” उन्होंने यह तर्क भी दिया कि पार्टी की कई फैक्ट फाइंडिंग टीमें इस वक्त जिलों के दौरे पर हैं, जिसके कारण नेता समय पर कोलकाता नहीं पहुंच सके।

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