West Bengal-Tamilnadu Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सुबह 7 बजे से मतदान प्रक्रिया जारी है। दोनों ही राज्यों में मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिससे लोकतंत्र के इस पर्व में लोगों का उत्साह साफ झलक रहा है।
पश्चिम बंगाल में जहां सत्ताधारी दल की साख दांव पर लगी है, वहीं तमिलनाडु में सत्तारूढ़ दल अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए चुनावी मैदान में उतरा है। दोनों राज्यों में राजनीतिक मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।
अमरनाथ यात्रा 2026 रजिस्ट्रेशन के लिए सरल तरीका, 5 आसान स्टेप्स से करें रजिस्ट्रेशन
सुबह 9 बजे तक मतदान का आंकड़ा जारी
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार सुबह 9 बजे तक दोनों राज्यों में मतदान की स्थिति इस प्रकार रही, पश्चिम बंगाल में अब तक लगभग 18.76 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, जबकि तमिलनाडु में यह आंकड़ा 17.69 प्रतिशत तक पहुंचा है। शुरुआती घंटों में पश्चिम बंगाल में मतदान की रफ्तार थोड़ी तेज नजर आई, जिससे यह राज्य फिलहाल आगे चल रहा है।
पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों में अधिक मतदान
राज्य के विभिन्न जिलों में मतदान की रफ्तार अलग-अलग देखने को मिली। विशेष रूप से पश्चिम मेदिनीपुर जिले में मतदाताओं का उत्साह सबसे ज्यादा रहा। यहां सुबह 9 बजे तक करीब 20.51 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का उपयोग कर लिया था। कई अन्य क्षेत्रों में भी मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिससे साफ है कि मतदाता इस चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
तमिलनाडु में भी दिखा मतदाताओं का उत्साह
दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु में भी मतदान को लेकर लोगों में उत्साह देखा गया। हालांकि शुरुआती घंटों में मतदान का प्रतिशत पश्चिम बंगाल की तुलना में थोड़ा कम रहा, लेकिन मतदान केंद्रों पर लगातार भीड़ बनी हुई है।
राजनीतिक महत्व और साख की लड़ाई
इन दोनों राज्यों में यह चुनाव राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल में जहां मुख्यमंत्री की राजनीतिक स्थिति पर नजरें टिकी हैं, वहीं तमिलनाडु में सरकार अपनी सत्ता बचाने के लिए पूरा जोर लगा रही है।
इस बीच दोनों राज्यों में मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से जारी है और चुनाव आयोग द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि मतदान निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
भोपाल मेट्रो के लिए 80 एकड़ जमीन की आवश्यकता, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को किया गया तेज









