West Bengal SIR: बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ECI से मांगा अपीलों का पूरा डेटा

पश्चिम बंगाल SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ECI से अपीलों के निपटारे का पूरा डेटा मांगा है। अदालत ने यह जानकारी ऐसे समय मांगी है, जब मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद अपीलों की प्रक्रिया और उनके निपटारे को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर आंकड़ों में क्या सामने आएगा?

West Bengal SIR

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 11, 2026

West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अहम जानकारी मांगी है। अदालत ने उन लोगों की अपीलों के निपटारे का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए थे। मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है। कोर्ट ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

अधीर रंजन चौधरी ने की थी ट्रिब्यूनल बनाने की मांग

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने अपनी याचिका में पश्चिम बंगाल के प्रत्येक ब्लॉक में SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल गठित करने और अपीलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा करने की मांग की थी। याचिका में कहा गया है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद संबंधित नागरिकों को अपनी आपत्ति और अपील दर्ज कराने का प्रभावी अवसर मिलना चाहिए। इस प्रक्रिया में देरी होने पर मतदाताओं के अधिकार प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपीलों की रफ्तार पर जताई चिंता

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय ट्रिब्यूनल में लंबित मामलों की संख्या और उनके निपटारे की गति को लेकर सवाल उठाए। अदालत ने चुनाव आयोग से यह जानकारी मांगी कि अब तक कितनी अपीलें दाखिल हुईं और उनमें से कितने मामलों का वास्तव में निपटारा किया गया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि अपीलों की सुनवाई इसी गति से चलती रही तो अगला चुनाव आने तक प्रक्रिया पूरी होने में मुश्किल हो सकती है।

केवल अपील दाखिल होना पर्याप्त नहीं: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ अपीलों की संख्या बताना पर्याप्त नहीं है। अदालत यह जानना चाहती है कि दाखिल की गई अपीलों में से कितने मामलों पर अंतिम निर्णय हुआ है। जस्टिस बागची ने भी सुनवाई के दौरान कहा कि केवल अपील दाखिल होना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उनके निपटारे की संख्या भी उतनी ही अहम है। कोर्ट का जोर प्रक्रिया को प्रभावी और समयबद्ध बनाने पर दिखाई दिया।

ट्रिब्यूनल के प्रदर्शन की भी होगी समीक्षा

अदालत ने संकेत दिया कि यदि SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए बनाए गए ट्रिब्यूनल अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर रहे हैं, तो उनके कामकाज में आवश्यक बदलाव किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि मामले में काफी समय बीत चुका है और अब वास्तविक प्रगति का आकलन करना जरूरी है। इसके लिए ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित और निपटाए गए मामलों का विस्तृत आंकड़ा महत्वपूर्ण होगा।

पश्चिम बंगाल सरकार पेश करेगी पूरा डाटा

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि SIR से जुड़े मामलों और ट्रिब्यूनल के कामकाज का पूरा डाटा कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। अदालत अब उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर यह देखेगी कि अपीलों के निपटारे की गति संतोषजनक है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को निर्धारित की गई है।

मतदाता अधिकारों को लेकर बना हुआ है अहम सवाल

SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर नागरिकों के अधिकारों का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और निर्णय के खिलाफ अपील करने का अवसर मिलना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपीलों के निपटारे का आंकड़ा मांगना इसी प्रक्रिया की प्रभावशीलता की समीक्षा से जुड़ा है।

जजों की मौखिक टिप्पणियों के कथित दुरुपयोग पर PIL

इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य जनहित याचिका यानी PIL पर भी नोटिस जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों द्वारा की गई मौखिक टिप्पणियों और संकेतात्मक बातों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने इस मुद्दे पर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है।

फर्जी वकीलों और कानून की डिग्रियों का भी दावा

इस PIL में देश में बड़ी संख्या में कथित फर्जी वकीलों और फर्जी कानून की डिग्रियों के मौजूद होने का दावा भी किया गया है। याचिका में इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस तरह की कथित अनियमितताएं न्यायिक व्यवस्था और कानून के पेशे की विश्वसनीयता पर असर डाल सकती हैं।

केंद्र, MeitY, BCI और CBI को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और CBI को नोटिस जारी किया है। अदालत इन पक्षों से मामले में उनका जवाब और संबंधित जानकारी जानना चाहती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।

दो अलग मामलों में अदालत की निगरानी जारी

पश्चिम बंगाल SIR मामले में जहां सुप्रीम कोर्ट मतदाता सूची से हटाए गए नामों से जुड़ी अपीलों की प्रगति पर नजर रख रहा है, वहीं दूसरी PIL में न्यायिक टिप्पणियों के कथित दुरुपयोग और फर्जी कानूनी प्रमाण-पत्रों के आरोपों पर संबंधित संस्थाओं से जवाब मांगा गया है। दोनों मामलों में आगे की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पेश होने वाले आंकड़े और जवाब महत्वपूर्ण रहेंगे।

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