West Bengal Violence: चुनाव नतीजों के बाद बंगाल में आगजनी, जगतबल्लवपुर में टीएमसी ऑफिस फूंका

West Bengal Violence: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों से हिंसा और झड़प की खबरें सामने आ रही हैं। 207 सीटें जीतकर बीजेपी की सत्ता में वापसी के दावों के बीच, तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य में बदलाव (पोरिबोर्तन) के नाम पर विपक्षी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। न्यू मार्केट से लेकर उत्तर 24 परगना तक, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तृणमूल कांग्रेस के दफ्तरों पर हमला और तोड़फोड़ बताते चले कि, चुनाव परिणामों के तुरंत बाद कोलकाता के

West Bengal Violence

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मई 6, 2026

West Bengal Violence: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों से हिंसा और झड़प की खबरें सामने आ रही हैं। 207 सीटें जीतकर बीजेपी की सत्ता में वापसी के दावों के बीच, तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य में बदलाव (पोरिबोर्तन) के नाम पर विपक्षी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। न्यू मार्केट से लेकर उत्तर 24 परगना तक, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तृणमूल कांग्रेस के दफ्तरों पर हमला और तोड़फोड़

बताते चले कि, चुनाव परिणामों के तुरंत बाद कोलकाता के न्यू मार्केट जैसे व्यस्त इलाकों में दुकानों में तोड़फोड़ की गई। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने दावा किया है कि बीजेपी समर्थकों ने जीत के जश्न को ‘आतंक’ में बदल दिया है। पार्टी के अनुसार, कई स्थानों पर उनके दफ्तरों को निशाना बनाया गया है। टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि बीजेपी जिस ‘शांतिपूर्ण बदलाव’ का वादा कर रही थी, जमीन पर उसका उल्टा असर दिख रहा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद हिंसा को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिससे उपद्रवियों के हौसले बुलंद हो गए।

मोदी-शाह की नीतियों पर तीखा प्रहार

तृणमूल कांग्रेस ने इस अशांति के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया है। टीएमसी के बयानों में कहा गया है कि शीर्ष नेतृत्व की शह पर ही बीजेपी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर डर का माहौल पैदा कर रहे हैं। विपक्ष का तर्क है कि यह केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता नहीं, बल्कि आम जनता के बीच खौफ पैदा करने की एक गहरी साजिश है। राजनीतिक विरोधियों पर हमला और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुँचाना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में स्थिति और भी विकट हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक प्रशासन या बीजेपी की ओर से कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है।

विरोध प्रदर्शन का बिगुल फूंका

हिंसा की सबसे गंभीर तस्वीर जगतबल्लवपुर से सामने आई है, जहां तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना ने जलते हुए दफ्तरों की पुरानी यादें ताजा कर दी हैं। टीएमसी ने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार देते हुए घोषणा की है कि वे इस ‘अघोषित आपातकाल’ के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे।

पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी तरह के दबाव या डराने-धमकाने की राजनीति के आगे झुकने वाले नहीं हैं। राज्य भर में विरोध प्रदर्शन और सत्याग्रह करने की तैयारी की जा रही है ताकि केंद्र और चुनाव आयोग पर सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने का दबाव बनाया जा सके।

सुरक्षा बलों और पुलिस पर जानलेवा हमला

उत्तर 24 परगना जिला इस वक्त सबसे संवेदनशील बना हुआ है। सरबेरिया-आगरहाटी ग्राम पंचायत के बामनघेरी इलाके में देर रात उस वक्त हड़कंप मच गया जब गश्त कर रही पुलिस और केंद्रीय बलों की टीम पर अज्ञात हमलावरों ने फायरिंग कर दी।

इस पुलिस टीम पर हमले ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। गनीमत रही कि इस गोलाबारी में किसी की जान नहीं गई, लेकिन इसके बाद पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हमलावरों की पहचान की जा रही है और उपद्रवियों से कड़ाई से निपटा जाएगा। फिलहाल, बंगाल की हवाओं में जीत की खुशी कम और हिंसा का तनाव ज्यादा महसूस किया जा रहा है।