West Bengal Journalist Pension : पश्चिम बंगाल सरकार ने पत्रकारों के हित में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। सरकार की ओर से पत्रकारों और उनके परिवारों की सामाजिक तथा आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और आर्थिक सहायता से जुड़े कई फैसले किए गए हैं। इन घोषणाओं का उद्देश्य पत्रकारों को बीमारी, सेवानिवृत्ति और अन्य आर्थिक जरूरतों के समय अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करना है। सरकार के इन फैसलों से बड़ी संख्या में पत्रकारों और उनके परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
पत्रकारों को मिलेगा पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा
नई व्यवस्था के तहत पात्र पत्रकारों को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध कराया जाएगा। इस सुविधा का मुख्य उद्देश्य गंभीर बीमारी या महंगे चिकित्सा उपचार के दौरान पत्रकारों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करना है। स्वास्थ्य बीमा मिलने से पत्रकारों को बड़े इलाज के खर्च को लेकर कुछ आर्थिक सुरक्षा हासिल होगी। इसके दायरे में पत्रकारों के परिवार को भी शामिल किया गया है।
देशभर के हजारों अस्पतालों में इलाज की सुविधा
सरकार के मुताबिक स्वास्थ्य बीमा की सुविधा केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं होगी। पत्रकार इस योजना के तहत देशभर के करीब 38 हजार सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। वेल्लोर, मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल और चंडीगढ़ पीजीआई जैसे प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को भी इस सुविधा के दायरे में शामिल बताया गया है। इससे गंभीर बीमारी की स्थिति में बड़े अस्पतालों में इलाज कराने का विकल्प मिलेगा।
परिवार के सदस्यों को भी योजना का लाभ
स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ केवल पत्रकारों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उनके परिवार को भी इसके दायरे में शामिल किया गया है। वहीं, जो पत्रकार पहले से आयुष्मान भारत योजना के तहत अपने परिवार के साथ पंजीकृत हैं, उन्हें अलग से मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का कार्ड बनवाने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे पात्र लाभार्थियों के लिए प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हो सकती है।
सेवानिवृत्त पत्रकारों की पेंशन अब दोगुनी
सरकार ने सेवानिवृत्त पत्रकारों के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणा की है। पात्र रिटायर्ड पत्रकारों की मासिक पेंशन को 2,500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया है। यानी पेंशन की राशि सीधे दोगुनी कर दी गई है। यह नई व्यवस्था 1 सितंबर 2026 से लागू होने की बात कही गई है। बढ़ी हुई पेंशन से सेवानिवृत्त पत्रकारों को नियमित आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है।
बिना एक्रिडिटेशन कार्ड वाले पत्रकार भी पात्र
पेंशन योजना में एक अहम बदलाव करते हुए एक्रिडिटेशन कार्ड की अनिवार्यता को लेकर दायरा बढ़ाया गया है। अब पात्र ऐसे सेवानिवृत्त पत्रकार भी आवेदन कर सकेंगे, जिनके पास एक्रिडिटेशन कार्ड नहीं है। इस बदलाव से उन पत्रकारों को भी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का लाभ मिलने का अवसर मिलेगा, जो लंबे समय तक पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं लेकिन उनके पास औपचारिक एक्रिडिटेशन कार्ड उपलब्ध नहीं है।
न्यूज डेस्क और संपादकीय कर्मचारियों को भी लाभ
सरकार ने न्यूज डेस्क पर काम करने वाले पत्रकारों को भी इस सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल करने की बात कही है। इससे केवल फील्ड में रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार ही नहीं, बल्कि न्यूजरूम और संपादकीय डेस्क से जुड़े पात्र पत्रकार भी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। इस फैसले से मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में काम करने वाले पत्रकारों का दायरा व्यापक होगा।
दुर्गापूजा से पहले तीन हजार रुपये की मदद
सरकार ने कार्यरत पत्रकारों के लिए दुर्गापूजा से पहले आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की है। इसके तहत कर्मरत पत्रकारों को 3,000 रुपये की सहायता राशि दिए जाने की बात कही गई है। खास बात यह है कि इस सहायता के लिए भी एक्रिडिटेशन कार्ड को अनिवार्य नहीं रखने का निर्णय बताया गया है। इससे अधिक संख्या में पात्र पत्रकार इस आर्थिक सहायता का लाभ उठा सकेंगे।
पत्रकारों के भविष्य को सुरक्षित करने पर जोर
सरकार का कहना है कि निजी मीडिया संस्थानों में काम करने वाले कई पत्रकारों को नौकरी के दौरान या सेवानिवृत्ति के बाद पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं हो पाती। ऐसे में स्वास्थ्य बीमा, बढ़ी हुई पेंशन और आर्थिक सहायता जैसी घोषणाओं को पत्रकार कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य पत्रकारों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी खर्च, वृद्धावस्था तथा तत्काल आर्थिक जरूरतों के समय बेहतर सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
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