West Bengal Elections 2026: ओवैसी और हुमायूं कबीर का महा-गठबंधन, बंगाल में 20 रैलियों से मचेगा हड़कंप!

कोलकाता में जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए औपचारिक गठबंधन का ऐलान किया है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 25, 2026

West Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की सियासत में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी ने एक आधिकारिक गठबंधन की घोषणा की है। कोलकाता में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेताओं ने चुनावी बिगुल फूंकते हुए राज्य भर में 20 विशाल रैलियों का खाका पेश किया।

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चुनावी रैलियों का शंखनाद

जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर ने गठबंधन की रणनीति साझा करते हुए बताया कि वे पूरे राज्य को मथने की तैयारी में हैं।

पहली रैली: गठबंधन की पहली साझा जनसभा 1 अप्रैल 2026 को बहरामपुर में होगी, जिसमें असदुद्दीन ओवैसी खुद मौजूद रहेंगे।

लक्ष्य: हुमायूं कबीर के अनुसार, इन 20 रैलियों का मुख्य उद्देश्य जनता के बीच जाकर गठबंधन की ताकत दिखाना और एक नया राजनीतिक विकल्प पेश करना है।

मुस्लिम नेतृत्व को मजबूत करने की कवायद

इस गठबंधन के पीछे का मुख्य एजेंडा पश्चिम बंगाल में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए एक स्वतंत्र और मजबूत राजनीतिक नेतृत्व तैयार करना है। ओवैसी ने स्पष्ट किया कि उनकी कोशिश बंगाल में मुस्लिम माइनॉरिटी से एक ऐसी लीडरशिप उभारने की है जो अपनी बात मजबूती से रख सके। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, इसका फैसला हो चुका है। ओवैसी ने जोर देकर कहा कि हुमायूं कबीर के साथ यह समझौता केवल 2026 के विधानसभा चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक दीर्घकालिक राजनीतिक मकसद का हिस्सा है। हुमायूं कबीर ने भी दोहराया कि इस राज्य में मुस्लिम नेतृत्व को आगे लाना उनका प्राथमिक उद्देश्य है और यह गठबंधन एक अटूट राजनीतिक ताकत के रूप में उभरेगा।

दिलीप घोष ने साधा निशाना

इस नए गठबंधन पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं भी आने लगी हैं। खड़गपुर सदर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष ने इस पर अपनी राय रखते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को पार्टी बनाने और चुनाव लड़ने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “बंगाल के लोग किसी को इतनी जल्दी स्वीकार नहीं करते। यहां जगह बनाने के लिए काम करना पड़ता है और संघर्ष करना पड़ता है। अब देखते हैं कि जनता इस नए गठबंधन को कितना पसंद करती है।”

बंगाल के चुनावी समीकरण पर प्रभाव

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ओवैसी और हुमायूं कबीर का यह मेल सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि दोनों ही दल अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में सेंध लगाने की क्षमता रखते हैं। विशेषकर मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में यह गठबंधन चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।

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