आतंकवाद के खिलाफ BRICS का स्पष्ट रुख
जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर बनी सहमति को सम्मेलन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि BRICS देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की स्पष्ट रूप से निंदा की। इसमें सीमा पार आतंकवाद भी शामिल है। सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर देते हुए किसी भी आतंकवादी गतिविधि को आपराधिक और अस्वीकार्य बताया।

पहलगाम हमले की भी हुई निंदा
विदेश मंत्री के मुताबिक, BRICS देशों ने 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकवादी हमले की स्पष्ट शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि इस सहमति का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि संगठन में शामिल देशों के राजनीतिक और रणनीतिक हित हमेशा एक जैसे नहीं होते। इसके बावजूद आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख बनना भारत की कूटनीतिक कोशिशों की सफलता को दर्शाता है।
आतंकवाद पर दोहरे मानदंड को नकारा
जयशंकर ने बताया कि BRICS देशों ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में दोहरे मानदंड अपनाने की नीति को खारिज किया। उनका कहना था कि किसी भी देश या संगठन को आतंकवाद के मामले में अलग-अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। विदेश मंत्री के अनुसार, आतंकवाद के खिलाफ एक समान और स्पष्ट नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी सहयोग के लिए जरूरी है।

ध्रुवीकृत दुनिया में हुआ सम्मेलन
विदेश मंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल काफी ध्रुवीकृत है। दुनिया में दो बड़े संघर्ष जारी हैं और कई देशों के बीच गंभीर राजनीतिक एवं रणनीतिक मतभेद मौजूद हैं। ऐसे समय में भारत ने BRICS सदस्य देशों को एक मंच पर लाकर संवाद का अवसर दिया। जयशंकर ने कहा कि सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया का संघर्ष सबसे जटिल मुद्दों में से एक रहा।
पश्चिम एशिया संकट पर बनी साझा समझ
जयशंकर के अनुसार, BRICS सम्मेलन में पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर सदस्य देशों के बीच सहमति से एक बयान जारी किया गया। इसमें क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता कायम करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही लंबे समय तक टिकने वाले समाधान और स्थायी शांति की दिशा में प्रयास करने की बात कही गई।
नागरिकों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर जोर
विदेश मंत्री ने कहा कि संघर्ष की परिस्थितियों में आम नागरिकों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। इसी कारण BRICS देशों ने नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की जरूरत पर भी जोर दिया। इसके साथ ही वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया।

32 प्रतिनिधिमंडलों की रही भागीदारी
जयशंकर ने सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधिमंडलों की संख्या को भी भारत की बढ़ती कूटनीतिक क्षमता से जोड़कर देखा। उनके मुताबिक, BRICS Summit में कुल 32 प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया। इनमें 11 सदस्य देशों, 10 साझेदार देशों, चार क्षेत्रीय संगठनों और सात अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधिमंडल शामिल थे।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
विदेश मंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी भारत की ‘कन्वीनिंग पावर’ यानी विभिन्न देशों और संगठनों को एक मंच पर लाने की क्षमता को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि इनमें से बड़ी संख्या में प्रतिनिधिमंडल राष्ट्राध्यक्ष या सरकार के प्रमुख स्तर पर भारत पहुंचे। उनके मुताबिक, यह वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका और स्वीकार्यता का महत्वपूर्ण संकेत है।

अलग विचार रखने वाले नेताओं के बीच संवाद
जयशंकर ने सम्मेलन के दौरान नेताओं के बीच हुए संवाद को भी अहम उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि BRICS बैठक सिर्फ औपचारिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रही। नेताओं के बीच खुले और सहज संवाद भी हुए। ऐसे कई नेता एक-दूसरे से बातचीत के लिए एक मंच पर आए, जिनके बीच सामान्य परिस्थितियों में मुलाकात की संभावना कम रहती है।
संवाद और कूटनीति से समाधान का संदेश
विदेश मंत्री के अनुसार, BRICS का मंच अलग-अलग विचारधाराओं और रणनीतिक हितों वाले देशों के बीच बातचीत का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में हुए संवाद ने यह संदेश दिया कि गंभीर मतभेदों के बावजूद बातचीत और कूटनीति के जरिए साझा रास्ते तलाशे जा सकते हैं। भारत ने इसी दृष्टिकोण को सम्मेलन की कार्यशैली में आगे बढ़ाया।
मोदी के संदेश से जोड़ी सम्मेलन की सफलता
जयशंकर ने BRICS Summit की सफलता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डायलॉग, डिप्लोमेसी और डेवलपमेंट’ के संदेश से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए नेताओं की मौजूदगी इस सोच को मजबूत करती है। उनके मुताबिक, संवाद और कूटनीति के माध्यम से मतभेदों के बीच भी सहयोग की संभावनाएं तलाशना संभव है।

आलोचनाओं के बीच भारत ने किया सफल आयोजन
विदेश मंत्री ने BRICS सम्मेलन को लेकर पहले उठाई गई आशंकाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आयोजन से पहले कुछ लोगों ने आशंका जताई थी कि सम्मेलन सफलतापूर्वक नहीं हो पाएगा। लेकिन भारत ने न केवल इसका आयोजन किया, बल्कि नई दिल्ली में इसे सफलतापूर्वक संपन्न भी कराया। जयशंकर ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की संगठनात्मक और कूटनीतिक क्षमता का उदाहरण बताया।
भारत की कूटनीतिक क्षमता को मिला नया मंच
जयशंकर के बयान से स्पष्ट है कि भारत BRICS Summit 2026 को केवल एक बहुपक्षीय बैठक के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि इसे अपनी वैश्विक कूटनीतिक भूमिका को मजबूत करने के अवसर के तौर पर भी प्रस्तुत कर रहा है। आतंकवाद, पश्चिम एशिया संकट, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहमति को भारत अपनी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में रेखांकित कर रहा है।
वैश्विक मतभेदों के बीच सहमति की कोशिश
BRICS सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि अलग-अलग रणनीतिक हित रखने वाले देशों ने कई अहम मुद्दों पर साझा रुख अपनाने की कोशिश की। जयशंकर के मुताबिक, ऐसे समय में जब दुनिया राजनीतिक ध्रुवीकरण और संघर्षों से गुजर रही है, संवाद का मंच उपलब्ध कराना अपने आप में महत्वपूर्ण है। भारत की अध्यक्षता में हुआ यह सम्मेलन इसी कूटनीतिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।
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