Rajasthan Civic Election Results : राजस्थान निकाय चुनाव में बड़ा उलटफेर, BJP-कांग्रेस को झटका, निर्दलीय बने कई जगह किंगमेकर

राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों के नतीजों ने BJP और कांग्रेस दोनों के लिए मिश्रित तस्वीर पेश की है। BJP ने कुल मिलाकर बढ़त बनाई, लेकिन अजमेर और पाली में कांग्रेस ने दम दिखाया। भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा रहा। अब असली सस्पेंस मेयर और सभापति चुनाव में समर्थन को लेकर है।

Rajasthan Civic Election Results

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 14, 2026

Rajasthan Civic Election Results :  राजस्थान नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नए संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और भूपेंद्र यादव से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे तक के प्रभाव वाले इलाकों में मुकाबला पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा। भाजपा और कांग्रेस दोनों को कई जगह उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले। खास बात यह रही कि कई नगर निकायों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिससे निर्दलीय और अन्य दलों के पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है।

भरतपुर में भाजपा को बहुमत नहीं

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में भाजपा स्पष्ट बहुमत हासिल करने में सफल नहीं रही। कुल 65 सीटों में भाजपा के खाते में 20 सीटें आईं, जबकि कांग्रेस को 7 और अन्य उम्मीदवारों को 38 सीटें मिलीं। हालांकि मुख्यमंत्री के निजी वार्ड से भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की, लेकिन पूरे निकाय के स्तर पर बोर्ड बनाने के लिए पार्टी को अन्य पार्षदों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है।

जयपुर में भाजपा की बढ़त

राजधानी जयपुर में भाजपा ने उपलब्ध नतीजों में बढ़त बनाई है। नगर निगम के 150 वार्डों में से 131 के परिणाम सामने आए, जिनमें भाजपा ने 71 सीटें जीतीं। कांग्रेस को 46 और अन्य उम्मीदवारों को 14 सीटें मिलीं। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर भाजपा फिलहाल बोर्ड गठन की मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। राजधानी में पार्टी का प्रदर्शन उसके लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।

बीकानेर में कांग्रेस ने बनाई मजबूत पकड़

केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के क्षेत्र बीकानेर में कांग्रेस ने भाजपा को बड़ा झटका दिया है। नगर निगम की 80 सीटों में से 78 के परिणाम घोषित हुए। कांग्रेस ने 42 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि भाजपा को 25 और अन्य उम्मीदवारों को 11 सीटें मिलीं। इन आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस बोर्ड बनाने की स्थिति में नजर आ रही है। यह परिणाम भाजपा के लिए स्थानीय स्तर पर चुनौती का संकेत माना जा रहा है।

अलवर में भाजपा सबसे बड़ी, लेकिन बहुमत से दूर

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के गृह जिले अलवर में भी भाजपा स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर सकी। कुल 65 सीटों में भाजपा ने 28 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 24 और अन्य उम्मीदवारों को 13 सीटें मिलीं। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी जरूर बनी, लेकिन बोर्ड गठन के लिए उसे बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अन्य पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है।

जोधपुर में बराबरी का मुकाबला

जोधपुर नगर निगम का चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की राजनीतिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा गया। यहां 100 में से 99 सीटों के परिणाम सामने आए हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों को 44-44 सीटें मिलीं, जबकि अन्य उम्मीदवारों के खाते में 11 सीटें गईं। ऐसे में निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। वहीं, गहलोत के अपने वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी की हार भी चर्चा का विषय बनी है।

अजमेर में कांग्रेस ने किया उलटफेर

भाजपा के पारंपरिक प्रभाव वाले अजमेर नगर निगम में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। कांग्रेस ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 32 और अन्य उम्मीदवारों को 11 सीटें मिलीं। नतीजों ने संकेत दिया है कि भाजपा के मजबूत माने जाने वाले शहरी क्षेत्र में कांग्रेस ने अपनी स्थिति बेहतर की है। हालांकि बोर्ड गठन को लेकर आगे की राजनीतिक गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी।

कोटा में भाजपा का मजबूत प्रदर्शन

कोटा नगर निगम में भाजपा ने उपलब्ध परिणामों में बहुमत हासिल कर मजबूत प्रदर्शन किया। 100 सीटों में से 90 के नतीजे सामने आए हैं। इनमें भाजपा ने 52, कांग्रेस ने 33 और अन्य उम्मीदवारों ने 5 सीटें जीती हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भाजपा बोर्ड बनाने की स्थिति में है। कोटा का परिणाम राज्य में पार्टी के शहरी आधार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

पाली में कांग्रेस सबसे आगे

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में कांग्रेस ने बढ़त बनाकर भाजपा को झटका दिया। कांग्रेस ने 29 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा के खाते में 21 और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में 15 सीटें आईं। यहां बहुमत के लिए 33 सीटों की जरूरत है। ऐसे में कांग्रेस बहुमत से कुछ दूरी पर है और निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मदन राठौड़ के अपने वार्ड में भाजपा प्रत्याशी की हार ने भी राजनीतिक चर्चा बढ़ाई है।

झालावाड़ में वसुंधरा राजे के गढ़ में बड़ा उलटफेर

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक प्रभाव वाले झालावाड़ नगर परिषद में भाजपा को बड़ा झटका लगा। कांग्रेस ने 45 में से 29 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया। भाजपा केवल 13 सीटों पर सिमट गई। आम आदमी पार्टी को एक और निर्दलीय उम्मीदवारों को दो सीटें मिलीं। यह परिणाम कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।

लक्ष्मणगढ़ में डोटासरा के सामने चुनौती

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के गृह क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ नगर पालिका में भी कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। कुल 45 वार्डों में कांग्रेस ने 20, भाजपा ने 15 और अन्य उम्मीदवारों ने 10 सीटें जीतीं। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बोर्ड बनाने के लिए उसे अन्य पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है। यह परिणाम प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

टीकाराम जूली के क्षेत्र में भी कांग्रेस को झटका

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के गृह क्षेत्र अलवर में कांग्रेस को अपेक्षित बढ़त नहीं मिल सकी। यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला कड़ा रहा। परिणामों ने यह संकेत दिया कि स्थानीय स्तर पर दिग्गज नेताओं का प्रभाव हमेशा चुनावी जीत की गारंटी नहीं बन पा रहा है। स्थानीय संगठन, प्रत्याशी और क्षेत्रीय मुद्दों की भूमिका भी निर्णायक बनी हुई है।

निर्दलीय पार्षदों की बढ़ी अहमियत

इन चुनाव परिणामों में एक प्रमुख बात कई निकायों में स्पष्ट बहुमत का अभाव है। भरतपुर, जोधपुर, अलवर, पाली और लक्ष्मणगढ़ जैसे क्षेत्रों में निर्दलीय या अन्य उम्मीदवार बोर्ड गठन के समय महत्वपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों की नजर अब ऐसे पार्षदों पर होगी, जिनके समर्थन से बहुमत का आंकड़ा हासिल किया जा सकता है।

2027 की राजनीति के लिए क्या संकेत?

राजस्थान के निकाय चुनावों को केवल स्थानीय सत्ता का चुनाव मानना राजनीतिक रूप से पर्याप्त नहीं होगा। इन परिणामों ने भाजपा और कांग्रेस के जमीनी संगठन, स्थानीय नेतृत्व और मतदाताओं के रुझान को लेकर कई संकेत दिए हैं। जयपुर और कोटा में भाजपा मजबूत दिखाई दी, जबकि बीकानेर, अजमेर और झालावाड़ में कांग्रेस ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। जोधपुर में बराबरी का मुकाबला और कई जगह निर्दलीयों की मजबूत मौजूदगी ने राजनीतिक तस्वीर को और जटिल बनाया है।

Read More  :  UP News: योगी सरकार का अधिवक्ताओं को बड़ा तोहफा, अब 5 लाख तक कैशलेस इलाज