Bengal Election Results 2026 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बड़ा राजनीतिक भूकंप ला दिया है। उत्तर से लेकर दक्षिण बंगाल तक ‘भगवा तूफान’ की ऐसी लहर चली है कि ममता बनर्जी के कई कद्दावर मंत्री अपनी साख बचाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। रुझानों के मुताबिक, राज्य कैबिनेट के करीब 14 मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चुनावी जादू इस बार तृणमूल के 15 साल पुराने साम्राज्य के लिए काल बन गया है। बीजेपी की ‘डबल सेंचुरी’ वाली सुनामी में राज्य के बड़े-बड़े विभागों के चेहरे ताश के पत्तों की तरह बिखरते नजर आ रहे हैं।
दमदम से दिनहाटा तक: शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रियों की हालत पतली
शाम 5 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक और वर्तमान शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु दमदम सीट से पीछे चल रहे हैं। इसी तरह, बिधाननगर की हॉट सीट से दमकल मंत्री सुजीत बसु की स्थिति भी बेहद नाजुक बनी हुई है। स्वास्थ्य और वित्त राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य दमदम उत्तर सीट पर बीजेपी उम्मीदवार से पिछड़ गई हैं। उत्तर बंगाल में तृणमूल का चेहरा माने जाने वाले उदयन गुहा अपनी दिनहाटा सीट बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन दिग्गजों का पीछे चलना यह दर्शाता है कि जनता ने न केवल सरकार के खिलाफ बल्कि व्यक्तिगत रूप से मंत्रियों के कामकाज के खिलाफ भी मतदान किया है।
इरिगेशन और पंचायत विभाग के दिग्गजों पर मंडराया संकट
मंत्रियों की हार की यह लिस्ट काफी लंबी है। सिंचाई मंत्री मानस भुइयां सबांग जैसी मजबूत सीट पर पीछे चल रहे हैं, जबकि उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्रीकांत महाता शालबनी क्षेत्र में अपनी पकड़ खो चुके हैं। वन मंत्री बीरबाहा हांसदा बिनपुर सीट पर संघर्ष कर रही हैं और तकनीकी शिक्षा मंत्री इंद्रनील सेन चंदननगर में पिछड़ गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पंचायत मंत्री प्रदीप मजूमदार भी दुर्गापुर पूर्व सीट पर मोदी लहर का मुकाबला नहीं कर पाए। ग्रामीण बंगाल में ‘दीदी’ की मजबूती माने जाने वाले ये विभाग इस बार बदलाव की आंधी में पूरी तरह ध्वस्त होते दिखाई दे रहे हैं।
परिवहन और स्कूल शिक्षा क्षेत्र में भी बीजेपी की भारी बढ़त
रुझानों में यह भी साफ हुआ है कि मोथाबारी सीट से सिंचाई राज्य मंत्री सबीना यास्मीन और मोंटेश्वर से सिद्दीकुल्ला चौधरी अपनी लीड खो चुके हैं। परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती, लोक स्वास्थ्य तकनीकी मंत्री पुलक रॉय और स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री सत्यजीत बर्मन के नाम भी उन मंत्रियों की सूची में शामिल हैं जो हार की कगार पर हैं। बीजेपी की आक्रामक रणनीति ने इन सभी क्षेत्रों में तृणमूल के संगठनात्मक ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया है।
फिरहाद हकीम और शोभनदेब: हार के बीच दो उम्मीद की किरणें
जहाँ एक तरफ ममता कैबिनेट के 14 स्तंभ गिरते नजर आ रहे हैं, वहीं दो वरिष्ठ मंत्रियों ने अपनी सीटों पर मजबूती बरकरार रखी है। कृषि मंत्री शोभनदेब चटर्जी बालीगंज निर्वाचन क्षेत्र से भारी मतों के अंतर से आगे चल रहे हैं। दूसरी ओर, शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने कोलकाता पोर्ट सीट पर अपनी बादशाहत कायम रखी है और वह बड़े अंतर से जीत की ओर बढ़ रहे हैं। ये दो नेता उन विरले चेहरों में से हैं जिन्हें ‘घासफूस’ (TMC) कैंप की इस दुर्गति के बावजूद जनता का समर्थन मिला है। फिलहाल, बंगाल की राजनीति एक नए युग की ओर बढ़ती दिख रही है जहाँ मंत्रियों के पद के साथ-साथ विधायक की कुर्सी बचाना भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।
Read More: बीजेपी कार्यसमिति में बड़ा बदलाव, 106 सदस्य तय, क्षेत्रीय-जातीय संतुलन बनाने की चुनौती










