Bengal Re-polling : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रोमांचक मुकाबले के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। चुनाव आयोग ने दक्षिण 24 परगना जिले के 15 मतदान केंद्रों पर हुए मतदान को रद्द करते हुए वहां दोबारा वोटिंग (रिपोलिंग) कराने का आदेश दिया है। यह फैसला पिछले चरण के दौरान सामने आई अनियमितताओं और हिंसा की शिकायतों के बाद लिया गया है। शनिवार (2 मई, 2026) को इन केंद्रों पर मतदाता एक बार फिर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिससे प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ गई हैं।
मगराहाट पश्चिम और डायमंड हार्बर में पुनर्मतदान की तैयारी
चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, रिपोलिंग मुख्य रूप से दो विधानसभा क्षेत्रों में केंद्रित है। मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के 11 पोलिंग बूथों और डायमंड हार्बर के 4 पोलिंग बूथों पर शनिवार सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान होगा। इन सीटों पर पहले 29 अप्रैल को दूसरे चरण के तहत वोट डाले गए थे। हालांकि, मतदान प्रक्रिया के दौरान कई गंभीर खामियां पाई गईं, जिसके चलते आयोग को हस्तक्षेप करना पड़ा और पुराने मतदान को शून्य घोषित कर दिया गया।
रिपोर्ट्स और कानूनी प्रावधानों के आधार पर लिया गया कड़ा फैसला
यह निर्णय हवा में नहीं लिया गया है; चुनाव आयोग ने संबंधित क्षेत्रों के रिटर्निंग अधिकारियों और पर्यवेक्षकों (Observers) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। इन रिपोर्ट्स में मतदान के दौरान अनियमितताओं और प्रक्रियागत चूक की पुष्टि की गई है। आयोग ने ‘रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1951’ की सुसंगत धाराओं के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इन 15 बूथों पर मतदान रद्द किया। गौरतलब है कि जिले के कुल 77 बूथों पर रिपोलिंग की मांग की गई थी, लेकिन फिलहाल आयोग ने केवल 15 केंद्रों पर ही मंजूरी दी है।
29 अप्रैल की चुनावी हिंसा और भाजपा उम्मीदवार पर हमला
पुनर्मतदान के पीछे की एक बड़ी वजह वह हिंसा भी है जो 29 अप्रैल को दक्षिण 24 परगना के बसंती क्षेत्र में देखने को मिली थी। यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार विकास सरदार को हिंसक भीड़ ने निशाना बनाया था। बूथ नंबर 76 के दौरे के समय उन पर कथित रूप से हमला किया गया और उनकी गाड़ी में तोड़फोड़ की गई। इस घटना ने पूरे इलाके में तनाव पैदा कर दिया था और चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए थे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई थी।
केंद्रीय बलों की भूमिका पर उठे सवाल और सुरक्षा की चुनौती
हिंसा की घटना के दौरान एक चौंकाने वाला आरोप यह भी लगा कि वहां तैनात केंद्रीय बलों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सक्रियता नहीं दिखाई। सूत्रों के अनुसार, जब हमलावर उम्मीदवार के सुरक्षाकर्मियों से हथियार छीनने की कोशिश कर रहे थे, तब सुरक्षा बल मूकदर्शक बने रहे। इस विफलता के बाद अब 2 मई को होने वाली रिपोलिंग के लिए सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस बार किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना पहली प्राथमिकता होगी।
मतदाताओं और प्रत्याशियों के लिए निर्णायक होगा शनिवार
इन 15 बूथों का परिणाम संबंधित विधानसभा सीटों के अंतिम नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि सभी राजनीतिक दलों ने शनिवार के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मतदाताओं से अपील की जा रही है कि वे बिना किसी डर के भारी संख्या में बाहर निकलें और वोट डालें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रिपोलिंग के दौरान वोटिंग प्रतिशत और वहां का रुझान यह तय करेगा कि जनता ने हिंसा और अनियमितताओं को किस रूप में लिया है। अब सबकी नजरें शनिवार शाम को होने वाले मतदान संपन्न होने पर टिकी हैं।










