West Bengal Election 2026 : दूसरे चरण का प्रचार थमा, 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और निर्णायक चरण के लिए प्रचार का शोर थम गया है। 29 अप्रैल को होने वाले इस मतदान में 142 सीटों पर जनता अपना फैसला सुनाएगी। भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी की सीधी टक्कर ने पूरे देश की सांसें थाम दी हैं। क्या इस बार बंगाल में सत्ता परिवर्तन होगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 27, 2026

West Bengal Election 2026 :  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण के लिए चुनावी शोर अब थम चुका है। पहले चरण में हुए भारी मतदान के बाद अब सबकी नजरें 29 अप्रैल को होने वाली वोटिंग पर टिकी हैं। सत्ता की इस जंग में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने भाजपा के लिए ताबड़तोड़ रैलियां कर मोर्चा संभाला, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने भी अपनी रैलियों के जरिए टीएमसी का पक्ष मजबूती से रखा। हालांकि, इस राजनीतिक रस्साकशी के बीच राज्य से चुनावी हिंसा की खबरें लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।

उत्तर 24 परगना में हिंसक झड़प: थाने के बाहर आमने-सामने आए कार्यकर्ता

चुनाव के ऐन पहले उत्तर 24 परगना जिले से हिंसा की एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ जगद्दल पुलिस स्टेशन के बाहर भाजपा और टीएमसी के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। तनाव इतना बढ़ गया कि पुलिस और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों की मौजूदगी के बावजूद स्थिति अनियंत्रित हो गई। भाजपा का आरोप है कि टीएमसी के समर्थकों ने जानबूझकर उनके उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया। यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब भाजपा नेता मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक विवादित टिप्पणी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने थाने पहुंचे थे।

बमबाजी और गोलीबारी से दहला जगद्दल: CISF जवान को लगी गोली

जगद्दल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार डॉ. राजेश कुमार, अर्जुन सिंह और उनके बेटे के साथ थाने पहुंचे थे। इसी दौरान वहां मौजूद टीएमसी समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक संघर्ष में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों और भाजपा नेताओं का दावा है कि इस झड़प के दौरान न केवल पत्थरबाजी हुई, बल्कि देसी बम भी फेंके गए और गोलियां भी चलीं। इस गोलाबारी की चपेट में सुरक्षा व्यवस्था में तैनात CISF के एक जवान पवन सिंह आ गए। उनके पैर में गोली लगी है, जिसके बाद उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है।

विवाद की जड़: भाजपा उम्मीदवार ने टीएमसी काउंसलर पर लगाए गंभीर आरोप

भाटपारा से भाजपा प्रत्याशी पवन कुमार सिंह ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि विवाद की शुरुआत एक दिन पहले हुई थी। उनके अनुसार, जब वे एक बैठक कर रहे थे, तभी वार्ड 17 के टीएमसी काउंसलर मनोज पांडे अपने समर्थकों के साथ वहां आए और हंगामा करने लगे। इसकी शिकायत पुलिस के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (IC) से भी की गई थी। पवन सिंह का कहना है कि अगले दिन जब वे प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत की तैयारियां कर रहे थे, तब फिर से उन्हें परेशान किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि थाने पर बहस के बाद जब वे घर लौट रहे थे, तभी उन पर योजनाबद्ध तरीके से पत्थरों, बमों और गोलियों से हमला किया गया।

तनावपूर्ण माहौल: चुनाव आयोग और प्रशासन की सुरक्षा पर सवाल

मतदान से ठीक पहले हुई इस हिंसा ने जगद्दल और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद सरेआम हुई इस गोलीबारी ने कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा ने इसे चुनाव को प्रभावित करने की टीएमसी की साजिश करार दिया है, जबकि क्षेत्र में तनाव को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। प्रशासन अब इस मामले की जांच कर रहा है ताकि मतदान के दिन किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

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