West Bengal Election 2026: हुमायूं कबीर को ओवैसी का बड़ा झटका, AIMIM ने तोड़ा गठबंधन; अब अकेले ठोकेगी ताल!

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की पार्टी (AJUP) के साथ गठबंधन तोड़ने का बड़ा फैसला लिया है।

West Bengal Election 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 10, 2026

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ गठबंधन समाप्त करने का ऐलान किया। ओवैसी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी अब बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी। यह घोषणा सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए की गई।

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सोशल मीडिया पर बयान

एआईएमआईएम ने अपने आधिकारिक पोस्ट में लिखा कि हुमायूं कबीर के हालिया खुलासों ने बंगाल के मुसलमानों की असुरक्षा को उजागर किया है। पार्टी ने कहा कि वह ऐसे किसी भी बयान का समर्थन नहीं कर सकती जिससे मुसलमानों की गरिमा पर सवाल उठे। पोस्ट में आगे लिखा गया कि बंगाल के मुसलमान दशकों से उपेक्षित और शोषित रहे हैं, और पार्टी की नीति यही है कि हाशिए पर पड़े समुदायों को स्वतंत्र राजनीतिक आवाज मिले। इसी कारण एआईएमआईएम ने गठबंधन तोड़ने का निर्णय लिया और घोषणा की कि वह आगे किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी।

हुमायूं कबीर का वायरल वीडियो

गठबंधन टूटने की पृष्ठभूमि में हुमायूं कबीर का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में कबीर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से संबंध होने और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराने की रणनीति बनाने का दावा करते नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई।

टीएमसी की प्रतिक्रिया और जांच की मांग

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह वीडियो साझा किया और आरोप लगाया कि कबीर भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं। टीएमसी ने ईडी से जांच की मांग की, जिसमें विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और पीएमओ के साथ कबीर की कथित नजदीकी की जांच करने की बात कही गई।

कबीर की रणनीति

वीडियो में कबीर कथित तौर पर कहते दिखे कि वह ममता बनर्जी को सत्ता से हटाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी रणनीति अल्पसंख्यक वोटों को तृणमूल कांग्रेस से हटाकर अपने पक्ष में करने पर केंद्रित है। इस रणनीति से भाजपा को चुनावी लाभ मिल सकता है। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि इस योजना को सभी निर्वाचन क्षेत्रों में लागू करने के लिए करोड़ों रुपये की आवश्यकता होगी।

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