West Bengal Elections: फाल्टा के 285 बूथों पर क्यों गिरी गाज? अभिषेक बनर्जी की खुली चुनौती

पश्चिम बंगाल के फाल्टा में 29 अप्रैल को हुई चुनावी हिंसा और ईवीएम में गड़बड़ी के बाद चुनाव आयोग ने सभी 285 केंद्रों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया है। जहां पूरे बंगाल के नतीजे 4 मई को आएंगे, वहीं फाल्टा की किस्मत का फैसला 24 मई को होगा। इस फैसले ने अमित मालवीय और अभिषेक बनर्जी के बीच जुबानी जंग को और तेज कर दिया है।

West Bengal Elections

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मई 3, 2026

West Bengal Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भारत निर्वाचन आयोग ने दक्षिण 24 परगना जिले के 144-फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में हुए मतदान को रद्द करते हुए सभी 285 पोलिंग स्टेशनों पर पुनर्मतदान (Repolling) का ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। आयोग के इस कड़े रुख ने राज्य के राजनीतिक तापमान को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

क्यों लिया गया री-पोलिंग का फैसला?

बताते चले कि, निर्वाचन आयोग की इस कार्रवाई के पीछे 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान हुई अनियमितताएं हैं। मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) पर अवैध स्टिकर चिपकाने की शिकायतों और कई मतदान केंद्रों पर हुई हिंसक झड़पों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव की शुचिता बनाए रखने के लिए फाल्टा के सभी मुख्य और सहायक केंद्रों पर 21 मई 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक नए सिरे से वोट डाले जाएंगे। गौर करने वाली बात यह है कि जहाँ राज्य की शेष 293 सीटों के नतीजे 4 मई को आ जाएंगे, वहीं फाल्टा के परिणाम के लिए 24 मई तक इंतजार करना होगा।

‘डायमंड हार्बर मॉडल’ के ध्वस्त होने का दावा

इस फैसले के तुरंत बाद भाजपा और टीएमसी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ममता सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि फाल्टा में दोबारा मतदान का आदेश इस बात का सबूत है कि तथाकथित ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। मालवीय ने आरोप लगाया कि टीएमसी ने अपनी हार के डर से चुनावी प्रक्रिया में धांधली करने की कोशिश की, जिसे आयोग ने नाकाम कर दिया है।

अभिषेक बनर्जी की दहाड़

बीजेपी के आरोपों पर पलटवार करने में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी देर नहीं की। उन्होंने भाजपा नेताओं को ‘बांग्ला विरोधी गुजराती गिरोह’ करार देते हुए कड़ी चुनौती दी। अभिषेक बनर्जी ने कहा, “हमारे डायमंड हार्बर मॉडल को नुकसान पहुँचाने के लिए भाजपा को 10 जन्म लेने पड़ेंगे।” उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी को ललकारते हुए कहा कि अगर उनमें हिम्मत है, तो वे फाल्टा में अपना सबसे मजबूत उम्मीदवार उतारें और अपनी पूरी ताकत झोंक दें, जीत फिर भी टीएमसी की ही होगी।

फाल्टा का सियासी महत्व

फाल्टा विधानसभा क्षेत्र टीएमसी का गढ़ माने जाने वाले डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। अभिषेक बनर्जी खुद यहाँ से सांसद हैं, इसलिए फाल्टा में किसी भी तरह की हार या नैतिक जीत टीएमसी के लिए साख का सवाल है। पुनर्मतदान के इस आदेश ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की आशंका भी बढ़ा दी है। अब 21 मई को होने वाली वोटिंग पर पूरे देश की निगाहें टिकी होंगी, क्योंकि यह महज एक विधानसभा सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि बंगाल के दो सबसे बड़े राजनीतिक दिग्गजों के वर्चस्व की लड़ाई बन चुकी है।