West Bengal Assembly Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मतदान से पहले उत्तर 24 परगना जिले के बारानगर इलाके में शनिवार को भारी हिंसा देखने को मिली। चुनाव प्रचार के दौरान पोस्टर और होर्डिंग फाड़े जाने के मामूली विवाद ने देखते ही देखते उग्र रूप धारण कर लिया, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि स्थानीय पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों को लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा। इस घटना ने चुनाव से पहले राज्य के सियासी पारे को और गरमा दिया है।
टोबिन रोड पर नारेबाजी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शनिवार को यह पूरी घटना टोबिन रोड चौराहे पर घटित हुई। उस समय मौके पर बीजेपी उम्मीदवार सजल घोष और टीएमसी प्रत्याशी सायंतिका बंद्योपाध्याय अपने-अपने समर्थकों के साथ मौजूद थे। देखते ही देखते दोनों ओर से सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता जमा हो गए और एक-दूसरे के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करने लगे। बहसबाजी का सिलसिला तब शुरू हुआ जब एक पक्ष ने दूसरे पर चुनावी फ्लेक्स और होर्डिंग फाड़ने का आरोप लगाया। कुछ ही मिनटों में यह विवाद धक्का-मुक्की और फिर मारपीट में तब्दील हो गया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
सायंतिका बंद्योपाध्याय का BJP पर बाहरी गुंडे लाने का आरोप
घटना के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस की प्रत्याशी सायंतिका बंद्योपाध्याय ने मीडिया से बात करते हुए सजल घोष पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी उम्मीदवार अपने साथ बाहरी असामाजिक तत्वों को लेकर आए थे, जिनका मकसद इलाके की शांति व्यवस्था को भंग करना था। सायंतिका ने दावा किया कि टीएमसी के शांतिप्रिय कार्यकर्ताओं पर जानबूझकर हमला किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि वे हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के जरिए देंगी।
सजल घोष का पलटवार
वहीं दूसरी ओर, बीजेपी प्रत्याशी सजल घोष ने टीएमसी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सत्ता पक्ष की हताशा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सायंतिका बंद्योपाध्याय के नेतृत्व में टीएमसी समर्थकों ने जानबूझकर बीजेपी के चुनावी विज्ञापनों और पोस्टरों को नुकसान पहुँचाया है। घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस हार के डर से उनके कार्यकर्ताओं को डराने और धमकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने साफ किया कि बंगाल की जनता इस ‘गुंडागर्दी’ का जवाब वोट की चोट से देगी।
केंद्रीय बलों की तैनाती
हंगामे के कारण बीटी रोड और टोबिन रोड चौराहे पर लगभग एक घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाता देख भारी संख्या में पुलिस बल और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया। सुरक्षा बलों ने कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को खदेड़ा और शांति बहाल की। फिलहाल इलाके में तनाव को देखते हुए फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है ताकि आगे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का कार्यक्रम
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर सत्ता का संग्राम दो चरणों में संपन्न होगा। प्रथम चरण का मतदान 23 अप्रैल को और द्वितीय चरण का 29 अप्रैल को निर्धारित है, जबकि चुनावी नतीजों की घोषणा 4 मई को की जाएगी। इस बार के चुनाव में 18 से 29 वर्ष के युवा मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। सांख्यिकी के अनुसार, इन राज्यों में युवा वोटरों की हिस्सेदारी लगभग 20 से 30 प्रतिशत के बीच है, जो किसी भी दल का चुनावी समीकरण बनाने या बिगाड़ने की ताकत रखते हैं।









