West Asia Crisis : विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों के साथ भारत के रणनीतिक रिश्तों को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय परामर्श समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान क्षेत्र की मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों, व्यापारिक समझौतों, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक का उद्देश्य पश्चिम एशिया के देशों के साथ भारत के सहयोग को और मजबूत करने की रणनीति पर विचार करना था।
संकट के बावजूद भारत पर नहीं पड़ा बड़ा असर
बैठक में विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की स्थिति पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मौजूदा संकट के बावजूद देश पर इसका कोई बड़ा प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। जयशंकर के अनुसार, भारत ने संतुलित और व्यावहारिक कूटनीति के माध्यम से अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा की। इससे आर्थिक गतिविधियों और आम नागरिकों के जीवन पर संकट का गंभीर असर नहीं पड़ा।
भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा रही प्राथमिकता
विदेश मंत्री ने बताया कि संघर्ष के दौरान सरकार के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना शामिल था। सरकार ने संबंधित देशों के साथ लगातार कूटनीतिक संपर्क बनाए रखा। इन प्रयासों के कारण क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया और भारत के लिए आवश्यक ऊर्जा आपूर्ति को भी बनाए रखने की कोशिश जारी रही।
व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर जोर
बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चर्चा से संबंधित जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि भारत के खाड़ी और पश्चिम एशिया-उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र के साथ ऐतिहासिक और गहरे संबंध हैं। बैठक में व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री सहयोग और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया। भारत इन क्षेत्रों के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को लगातार विस्तार देना चाहता है।
अमेरिका और ईरान के साथ संतुलित रिश्ते
संसदीय सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान सांसदों ने क्षेत्रीय संघर्ष और भारत की ऊर्जा जरूरतों को लेकर कई सवाल उठाए। जवाब में जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता ला रहा है, ताकि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता न रहे। उन्होंने भारत के अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संतुलित संबंधों को भी देश की कूटनीतिक क्षमता का उदाहरण बताया।
खाड़ी में भारतीय नागरिकों पर विशेष चर्चा
खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रोजगार और कारोबार के सिलसिले में रहते हैं। ऐसे में बैठक में उनकी सुरक्षा को लेकर सरकार की तैयारियों और उपायों पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही ईरान से कच्चे तेल और अन्य जरूरी सामान की खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित प्रभाव तथा इस विषय पर भारत के रुख को लेकर भी सदस्यों के बीच विचार-विमर्श हुआ।
मक्का रक्षा समझौते को लेकर चिंता
बैठक में कुछ सांसदों ने हाल में हुए मक्का रक्षा समझौते को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से इस समझौते पर भारत की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 7 अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए इस समझौते में किसी एक सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति को तीनों देशों पर हमला मानने का प्रावधान बताया गया है।
पश्चिम एशिया में रिश्ते मजबूत करने की नीति
जयशंकर ने बैठक में भारत की पश्चिम एशिया नीति और क्षेत्रीय देशों के साथ बढ़ते सहयोग को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत अपने पारंपरिक राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत कर रहा है। सरकार का प्रयास है कि बदलते भू-राजनीतिक माहौल में राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए सभी प्रमुख क्षेत्रीय देशों के साथ संतुलित और मैत्रीपूर्ण रिश्ते कायम रखे जाएं।
राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की कूटनीतिक रणनीति का मुख्य केंद्र राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा बना हुआ है। सरकार का मानना है कि संतुलित विदेश नीति और विभिन्न देशों के साथ संवाद के माध्यम से मौजूदा चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। आने वाले समय में भारत पश्चिम एशिया के देशों के साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग को और आगे बढ़ाने पर जोर दे सकता है।
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