West Asia Crisis All-Party Meet: सर्वदलीय बैठक में सरकार का बड़ा दावा- ‘भारत की रणनीतिक जीत, युद्ध के बीच भी सुरक्षित है तेल-गैस की सप्लाई’

सर्वदलीय बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री और एस जयशंकर ने खुलासा किया कि भारत ने कूटनीतिक रास्तों का उपयोग कर अपने जहाजों के लिए सुरक्षित गलियारा सुनिश्चित किया है। जहाँ दुनिया की सप्लाई चेन ठप है, वहीं भारत ने घरेलू गैस उत्पादन को दोगुना कर दिया है। क्या भारत इस महायुद्ध के आर्थिक झटकों से पूरी तरह सुरक्षित है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 25, 2026

West Asia Crisis All-Party Meet:  पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। लगभग डेढ़ घंटे तक चली इस उच्च स्तरीय चर्चा में सरकार ने विपक्ष के तमाम सवालों के जवाब दिए और देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर आश्वस्त किया। रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और पेट्रोलियम मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद भारत के राष्ट्रीय हित पूरी तरह सुरक्षित हैं और सरकार हर स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।

पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति पर सरकार का बड़ा आश्वासन

बैठक के दौरान विपक्ष ने देश के कुछ हिस्सों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कथित किल्लत का मुद्दा उठाया। इस पर पेट्रोलियम मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने कहा, “पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।” सरकार ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ तस्वीरें और खबरें केवल सप्लाई चेन में आई मामूली बाधाओं के कारण हैं, न कि स्टॉक की कमी के कारण। नागरिकों को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारत की कूटनीतिक सफलता: 4 जहाज सुरक्षित निकले

रणनीतिक मोर्चे पर सरकार ने एक बड़ी जानकारी साझा की, जिसे भारत की कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है। वैश्विक स्तर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) की स्थिति को लेकर भारी चिंता बनी हुई है, जहां कई देशों के व्यापारिक जहाज फंसे हुए हैं। सरकार ने बताया कि इस तनाव के बीच भारत के 4 जहाज सुरक्षित रूप से वहां से निकल चुके हैं और कुछ अन्य भी जल्द ही निकलेंगे। यह भारत की मजबूत अंतरराष्ट्रीय स्थिति और प्रभावी समुद्री कूटनीति का प्रमाण है।

ईरान-पाकिस्तान मध्यस्थता पर सरकार का रुख: “यह 1981 से जारी प्रक्रिया”

जब बैठक में ईरान और पाकिस्तान के बीच अमेरिका द्वारा कथित मध्यस्थता का मुद्दा उठा, तो सरकार ने ऐतिहासिक तथ्यों के साथ स्थिति साफ की। सरकार की ओर से बताया गया कि यह कोई नया घटनाक्रम नहीं है, बल्कि 1981 से ही अमेरिका ने पाकिस्तान को ईरान के साथ बातचीत की प्रक्रिया में लगा रखा है। इस स्पष्टीकरण के माध्यम से सरकार ने उन कयासों को विराम दिया जिनमें इस प्रक्रिया को मौजूदा संकट से जोड़कर देखा जा रहा था।

पीएम मोदी और ट्रंप की बातचीत: “हमें युद्ध नहीं, शांति चाहिए”

बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई हालिया बातचीत का भी विवरण साझा किया गया। प्रधानमंत्री ने वैश्विक मंच पर भारत की नीति को पूरी स्पष्टता के साथ दोहराया है। पीएम मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि “भारत को युद्ध नहीं चाहिए।” यह बयान शांति और संतुलन की दिशा में भारत की अडिग प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विदेश सचिव ने भी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और भारत के आर्थिक हितों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया, ताकि सभी दल राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर एकमत हो सकें।

कोविड संबंधी बयान पर चर्चा और विपक्षी चिंताएं

विपक्ष ने प्रधानमंत्री द्वारा संसद में कोविड को लेकर दिए गए हालिया बयान पर चिंता व्यक्त की। विपक्षी नेताओं का तर्क था कि ऐसे बयानों से जनता में ‘पैनिक’ या भय का माहौल बन सकता है। इस पर सरकार ने जवाब दिया कि उनका उद्देश्य केवल सतर्कता बढ़ाना है, डर फैलाना नहीं। सरकार ने आश्वासन दिया कि यदि कहीं भी पैनिक की स्थिति बनती है, तो उसे तुरंत नियंत्रित किया जाएगा और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का बयान: संकट में एकजुट है देश

बैठक के समापन पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी दलों के नेताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया की समस्याओं और भारत पर पड़ने वाले इसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा हुई है। रिजिजू ने गर्व के साथ बताया कि “संकट की इस घड़ी में विपक्ष के सभी नेताओं ने एकजुट रहने और सरकार का साथ देने का भरोसा दिया है।” यह बैठक राष्ट्रीय एकता और सामूहिक जिम्मेदारी की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुई है।

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