‘उधार नहीं रखते हिसाब’—कुबेरेश्वर धाम से धीरेंद्र शास्त्री का सख्त संदेश

सीहोर धर्म और आस्था की नगरी सीहोर उस समय ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी जब कुबेरेश्वर धाम में चल रही शिव महापुराण कथा के बीच पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आगमन हुआ। उनके मंच पर पहुंचते ही पूरा परिसर 'जय श्री राम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने बागेश्वर सरकार के स्वागत में उत्साह का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। कथा स्थल पर उपस्थित संतों और भक्तों को संबोधित करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने चिरपरिचित चुटीले अंदाज में कहा कि उन्होंने “महाराज जी का कर्ज उतार दिया है।' उनका इशारा कुबेरेश्वर धाम

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Published On :

फ़रवरी 17, 2026

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सीहोर
धर्म और आस्था की नगरी सीहोर उस समय ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी जब कुबेरेश्वर धाम में चल रही शिव महापुराण कथा के बीच पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का आगमन हुआ। उनके मंच पर पहुंचते ही पूरा परिसर 'जय श्री राम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने बागेश्वर सरकार के स्वागत में उत्साह का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया।

कथा स्थल पर उपस्थित संतों और भक्तों को संबोधित करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने चिरपरिचित चुटीले अंदाज में कहा कि उन्होंने “महाराज जी का कर्ज उतार दिया है।' उनका इशारा कुबेरेश्वर धाम के पंडित प्रदीप मिश्रा की ओर था। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा महाराज जी बागेश्वर धाम आए थे, अब हम यहां आ गए हैं। हम किसी का कर्ज उधार नहीं रखते, आज हिसाब बराबर हो गया, उनके इस वक्तव्य पर पंडाल तालियों और जयघोष से गूंज उठा, उन्होंने आगे कहा कि पंडित प्रदीप मिश्रा उनसे वरिष्ठ हैं और वे उनका सम्मान करते हैं। महाराज जी जैसा करते हैं, वैसा ही हम भी करते हैं, कहते हुए उन्होंने आपसी स्नेह और संत परंपरा की मर्यादा को रेखांकित किया।

मंच से उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वह डबरा से आए हैं तो अब हम डबरा जा रहे हैं, जिससे श्रोताओं के बीच सहज हंसी और आनंद का वातावरण बन गया। यह पहला अवसर था जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर सीहोर की पावन धरा पर पहुंचे।

कुबेरेश्वर धाम समिति के प्रवक्ता मनोज दीक्षित के अनुसार पंडित शास्त्री ने व्यासपीठ पर पहुंचकर विधिवत नमन किया और संत परंपरा का सम्मान किया। दो प्रखर सनातनी संतों के इस मिलन को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे थे, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। कथा स्थल पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।

प्रशासन और धाम समिति द्वारा भीड़ प्रबंधन, पार्किंग और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गई थी। आयोजन के दौरान अनुशासन और व्यवस्थाओं की सराहना भी की गई। सीहोर में इन दोनों संतों का यह मिलन श्रद्धालुओं के लिए किसी उत्सव से कम नहीं रहा। मंच से दिए गए संदेशों में आपसी सम्मान, धर्म के प्रति समर्पण और समाज सेवा की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने इसे ऐतिहासिक और अविस्मरणीय क्षण बताया।

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