Tamil Nadu Politics : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में जबरदस्त हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है। तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के प्रमुख और अभिनेता से राजनेता बने विजय ने राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर से मुलाकात कर अगली सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। हालांकि, बहुमत के आंकड़ों के इस खेल में भ्रष्टाचार और ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ (विधायकों की खरीद-फरोख्त) के आरोपों ने दस्तक दे दी है। AMMK नेता टीटीवी दिनाकरन ने टीवीके प्रमुख पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस पूरी प्रक्रिया को लोकतंत्र का मजाक बताया है।
टीटीवी दिनाकरन का विजय पर हॉर्स-ट्रेडिंग का आरोप
एएमएमके (AMMK) प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने राज्यपाल से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा है। दिनाकरन का आरोप है कि विजय की पार्टी विधायकों को प्रलोभन देकर अपनी ओर खींच रही है। उन्होंने विजय को समर्थन देने वाले उस पत्र को पूरी तरह ‘फर्जी’ करार दिया, जिसमें दावा किया गया था कि एएमएमके टीवीके को समर्थन दे रही है। दिनाकरन ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वह इन घटनाक्रमों का गंभीरता से संज्ञान लें। साथ ही, उन्होंने मांग की कि AIADMK के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए।
विधायक एस. कामराज के लापता होने से बढ़ा सस्पेंस
दिनाकरन ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक एस. कामराज लापता हो गए हैं। मन्नारगुडी सीट से डीएमके और टीवीके दोनों को हराने वाले कामराज से पार्टी का कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। दिनाकरन ने आरोप लगाया कि इस ‘अपहरण’ या गायब होने के पीछे टीवीके का हाथ हो सकता है। उन्होंने कहा, “विधायक ने पुडुचेरी में मुझसे मुलाकात की थी और पलानीस्वामी को समर्थन देने वाले ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन अब उनका फोन बंद है।” दिनाकरन ने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति सरकार बनाने से पहले ही ऐसी गतिविधियों में लिप्त है, वह ‘स्वच्छ शासन’ कैसे दे पाएगा?
TVK का पलटवार: वीडियो जारी कर दिनाकरन के दावों को नकारा
तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी ने दिनाकरन के ‘फर्जी पत्र’ वाले दावे को गलत बताते हुए एक वीडियो जारी किया है। टीवीके का कहना है कि विधायक एस. कामराज ने अपनी मर्जी से और खुशी-खुशी समर्थन पत्र लिखा था। वीडियो के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि कामराज ने दिनाकरन की मंजूरी के बाद ही विजय को समर्थन दिया था। टीवीके ने आरोप लगाया कि दिनाकरन तथ्यों को छिपाकर जनता के बीच भ्रम और झूठी खबरें फैला रहे हैं।
बहुमत का गणित और छोटे दलों का समर्थन
तमिलनाडु की 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है। विजय की पार्टी TVK ने 108 सीटें जीती हैं, जो बहुमत के जादुई आंकड़े से महज 10 कदम दूर है। इस कमी को पूरा करने के लिए टीवीके ने छोटे दलों और गुटों से समर्थन जुटाया है। कांग्रेस (5 सीटें), CPI (2 सीटें) और CPI(M) (2 सीटें) ने पहले ही विजय को अपना समर्थन दे दिया है। इन दलों का मानना है कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) की दशकों पुरानी दो-दलीय व्यवस्था से हटकर राज्य को एक नए विकल्प की जरूरत है।
द्रविड़ राजनीति में बदलाव की आहट
विजय की पार्टी का दावा है कि उन्हें किसी भी तरह की सौदेबाजी करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि विधायक स्वेच्छा से उनके साथ आ रहे हैं। वहीं, दिनाकरन और विपक्षी खेमा इसे अनैतिक बता रहा है। फिलहाल, गेंद राज्यपाल के पाले में है। यदि विजय समर्थन जुटाने में सफल रहते हैं, तो तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होगी, जो दशकों से चले आ रहे डीएमके-एआईएडीएमके के वर्चस्व को चुनौती देगी। राज्य की जनता अब राजभवन के अगले कदम का बेसब्री से इंतजार कर रही है।










