TVK Floor Test Victory :तमिलनाडु की राजनीति में आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। भारी गहमागहमी और कयासों के बीच मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में विश्वास मत (Floor Test) जीत लिया है। सदन में हुई वोटिंग के दौरान विजय सरकार के पक्ष में कुल 144 विधायकों ने मतदान किया, जो बहुमत के आंकड़े से काफी ज्यादा है। इस जीत के साथ ही ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) की सरकार ने न केवल अपनी स्थिरता साबित की है, बल्कि विपक्ष के उन दावों को भी ध्वस्त कर दिया है जिसमें सरकार के गिरने की भविष्यवाणी की जा रही थी। जैसे ही स्पीकर ने नतीजों की घोषणा की, विधानसभा परिसर विजय के समर्थकों के नारों से गूंज उठा।
AIADMK में बड़ी सेंध: विपक्ष के कई विधायकों ने पाला बदला
इस फ्लोर टेस्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू प्रमुख विपक्षी दल AIADMK के भीतर हुई बड़ी बगावत रही। पार्टी नेतृत्व द्वारा सख्त ‘व्हिप’ जारी किए जाने के बावजूद, AIADMK के कई विधायकों ने अपनी पार्टी के स्टैंड के खिलाफ जाकर मुख्यमंत्री विजय को समर्थन दिया। सूत्रों के अनुसार, AIADMK के भीतर लंबे समय से चल रही गुटबाजी इस फ्लोर टेस्ट के दौरान खुलकर सामने आ गई। इन विधायकों का मानना है कि राज्य के विकास के लिए विजय का नेतृत्व जरूरी है। विपक्ष में हुई इस बड़ी सेंध ने एडापड्डी पलानीस्वामी (EPS) के खेमे को गहरे संकट में डाल दिया है और अब बागी विधायकों पर अयोग्यता की तलवार लटक रही है।
AIADMK में दरार की आहट: व्हिप जारी और गुटबाजी का डर
फ्लोर टेस्ट से ठीक एक दिन पहले सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि AIADMK के करीब 30 विधायकों का एक बड़ा गुट पाला बदलकर विजय सरकार को समर्थन दे सकता है। इन अटकलों ने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी। आनन-फानन में AIADMK नेतृत्व ने अपने सभी 47 विधायकों के लिए सख्त ‘व्हिप’ जारी किया है। इसमें स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि सभी विधायक फ्लोर टेस्ट के दौरान TVK सरकार के खिलाफ मतदान करें। पार्टी ने चेतावनी दी है कि जो भी विधायक निर्देशों का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पार्टी के भीतर पलानीस्वामी और सीवी षणमुगम के बीच दो अलग गुट बनने की खबरें भी तेज हैं, हालांकि पार्टी नेताओं का दावा है कि सभी विधायक एकजुट हैं।
DMK का तीखा हमला: ‘ज्योतिष’ और ‘मुहूर्त’ पर छिड़ी जंग
विधानसभा की कार्यवाही के बीच राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी DMK ने मुख्यमंत्री विजय पर व्यक्तिगत और प्रशासनिक हमला बोला है। विवाद तब शुरू हुआ जब TVK प्रवक्ता रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल को मुख्यमंत्री का ‘ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी’ (OSD) नियुक्त किया गया। DMK प्रवक्ता TKS एलंगोवन ने तंज कसते हुए कहा कि अब विधानसभा की भूमिका गौण हो गई है और सरकार ज्योतिषियों के ‘मुहूर्त’ पर चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विजय को सरकारी नियमों की सलाह देने वालों से ज्यादा ज्योतिषियों पर भरोसा है। एलंगोवन ने सवाल उठाया कि एक ज्योतिषी शासन चलाने में क्या मदद कर सकता है? यह बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
विश्वास मत का प्रस्ताव: सदन में गरमागरम बहस के आसार
तमाम आरोपों और राजनीतिक दांव-पेंच के बीच, मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने आधिकारिक तौर पर विधानसभा में विश्वास मत के लिए प्रस्ताव पेश कर दिया है। प्रस्ताव पेश होते ही सदन में गहमागहमी बढ़ गई है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया है कि उनकी सरकार के पास जनता और सदन का पूर्ण जनादेश है और वे इसे सफलतापूर्वक सिद्ध करेंगे। अब सबकी नजरें वोटिंग प्रक्रिया पर टिकी हैं, क्योंकि AIADMK के असंतुष्ट गुट का रुख और छोटी पार्टियों की भूमिका राज्य की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगी। तमिलनाडु की जनता के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विजय अपना किला बचाने में कामयाब होते हैं या विपक्ष की घेराबंदी रंग लाती है।
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