UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पीलीभीत से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद वरुण गांधी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सपरिवार मुलाकात की। इस शिष्टाचार भेंट में वरुण के साथ उनकी पत्नी यामिनी और बेटी अनुसूया भी मौजूद रहीं। इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए वरुण ने प्रधानमंत्री के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया है, जिसे उनके राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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प्रधानमंत्री का आशीर्वाद और ‘पितृवत स्नेह’
वरुण गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए एक बेहद भावुक और सकारात्मक पोस्ट लिखी। उन्होंने प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके “आभामंडल में अद्भुत पितृवत स्नेह और संरक्षण का भाव है।” वरुण ने आगे लिखा कि प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें मार्गदर्शन प्राप्त हुआ और इस भेंट ने उनके इस विश्वास को और मजबूत कर दिया है कि मोदी जी देशवासियों के सच्चे अभिभावक हैं।
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इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि वरुण गांधी आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी की ओर से किसी महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका में नजर आ सकते हैं। पिछले कुछ समय से हाशिए पर रहने के बाद, प्रधानमंत्री के साथ उनकी यह नजदीकी यह दर्शाती है कि पार्टी और उनके बीच जमी बर्फ अब पिघलने लगी है।
भाजपा के साथ पुराने मतभेद
यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले वरुण गांधी कई मुद्दों पर केंद्र सरकार और भाजपा की नीतियों के मुखर आलोचक रहे थे। बेरोजगारी और किसानों के मुद्दों पर उनके बयानों ने कई बार पार्टी को असहज स्थिति में डाला था। इसी कड़वाहट का परिणाम था कि 2024 के आम चुनाव में भाजपा ने पीलीभीत से उनका टिकट काट दिया था, जिसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे थे।
सुल्तानपुर चुनाव प्रचार और गांधी परिवार की दूरी
वरुण गांधी की नाराजगी का सबसे स्पष्ट उदाहरण सुल्तानपुर में देखने को मिला था। अपनी मां मेनका गांधी के चुनाव प्रचार के लिए वह केवल आखिरी दिन वहां पहुंचे थे। उस दौरान मंच पर न तो भाजपा का कोई झंडा था और न ही वरुण ने पार्टी का पटका पहना था। उस समय उनके तेवरों से साफ लग रहा था कि वह संगठन से दूरी बना चुके हैं। हालांकि, अब प्रधानमंत्री से इस सौहार्दपूर्ण भेंट ने पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़कर एक नई शुरुआत की ओर इशारा किया है।
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