Varanasi News: वाराणसी में शनिवार, 7 मार्च 2026 को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा की शुरुआत कर दी। पालकी में सवार होकर निकले शंकराचार्य ने इस दौरान सरकार पर तीखा निशाना साधा और कहा कि अब गौ माता की रक्षा के लिए धर्मयुद्ध करना जरूरी हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा धार्मिक उद्देश्य से निकाली गई है, राजनीतिक हितों के लिए नहीं।
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यात्रा की शुरुआत और शंकराचार्य का संदेश

शंकराचार्य ने कहा कि पहले उन्होंने चिंतामणि गणेश जी का दर्शन किया और फिर संकट मोचन के दर्शन कर यात्रा शुरू की। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस यात्रा को रोका गया तो वे रुक जाएंगे, लेकिन सवाल यह है कि इसे रोकने की आवश्यकता क्यों है। शंकराचार्य ने जोर देकर कहा कि यह यात्रा अब युद्ध की दिशा में बढ़ रही है और हर हिंदू को गौ हत्या रोकने के लिए एकजुट होना चाहिए।
उन्होंने जनता से अपील की कि लखनऊ तक सभी हिंदू, चाहे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र हों, गौ माता की रक्षा के लिए एकजुट हों। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि सांसद और विधायक भी इस धर्मयुद्ध यात्रा में शामिल हों।
प्रशासनिक सुरक्षा और स्वागत
यात्रा शुरू होने से पहले विद्यामठ गली के बाहर भारी पुलिस फोर्स तैनात रही। शंकराचार्य ने थोड़ी देर गौ पूजन किया और सुबह 8:30 बजे यात्रा की औपचारिक शुरुआत की।
वाराणसी से यात्रा जौनपुर, सुल्तानपुर, गौरीगंज, अमेठी होते हुए रायबरेली पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम का आयोजन होगा। इसके बाद यात्रा क्रमशः उन्नाव, नैमिषारण्य और लखनऊ तक जाएगी।
यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम
7 मार्च 2026: जौनपुर और सुल्तानपुर में सभा, रायबरेली में सभा और रात्रि विश्राम।
8 मार्च 2026: मोहनलालगंज, लालगंज, अचलगंज में सभा, उन्नाव में सभा और रात्रि विश्राम।
9 मार्च 2026: बांगरमऊ और बघोली में सभा, नैमिषारण्य में सभा और रात्रि विश्राम।
10 मार्च 2026: सिंधौली और इजौटा में सभा, लखनऊ आगमन।
11 मार्च 2026: दोपहर 2 बजे कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर पहुँचकर गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध का शंखनाद।
धर्मयुद्ध यात्रा का उद्देश्य
शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि यह यात्रा गौ माता की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से अभी तक कोई संदेश नहीं आया है, इसलिए जनता और धार्मिक लोगों को एकजुट होकर धर्मयुद्ध यात्रा में शामिल होना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि यात्रा राजनीतिक नहीं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक उद्देश्य से निकाली गई है।
यात्रा में विभिन्न क्षेत्रों में लोगों द्वारा स्वागत किया जाएगा और यह कार्यक्रम धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न होगा। शंकराचार्य ने जोर देकर कहा कि यह आंदोलन केवल गौ रक्षा के लिए है और इसका उद्देश्य पूरे देश के हिंदुओं को एकजुट करना है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की धर्मयुद्ध यात्रा वाराणसी से लखनऊ तक धार्मिक संदेश और गौ माता की सुरक्षा के उद्देश्य से निकाली गई है, जिसमें जनता और नेताओं दोनों का समर्थन अपेक्षित है।









