Vande Mataram Row: पवन खेड़ा का अमित शाह पर हमला, पूछा- ‘क्या अब पटेल से भी बड़े हो गए?’

वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। अमित शाह द्वारा कांग्रेस के दो अंतरे गाने के फैसले की आलोचना के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पलटवार करते हुए पूछा कि क्या अमित शाह अब सरदार पटेल, महात्मा गांधी और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों से भी बड़े हो गए हैं।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 20, 2026

Vande Mataram Row:  वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कांग्रेस कार्यसमिति के वंदे मातरम् से जुड़े फैसले की आलोचना की थी। खेड़ा ने कहा कि वंदे मातरम् को लेकर 1937 में पारित प्रस्ताव ही ऐतिहासिक प्रस्ताव था और अब अमित शाह उसी प्रस्ताव की आलोचना कर रहे हैं।

1937 के प्रस्ताव को लेकर पवन खेड़ा ने उठाए सवाल

पवन खेड़ा ने दावा किया कि 1937 के प्रस्ताव में उस समय के कई प्रमुख राष्ट्रीय नेता शामिल थे। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी और सी. राजगोपालाचारी जैसे नेताओं की मौजूदगी में यह निर्णय लिया गया था। खेड़ा के मुताबिक, यह प्रस्ताव गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह को ध्यान में रखते हुए पारित किया गया था।

‘क्या अमित शाह इन नेताओं से भी बड़े हो गए?’

कांग्रेस नेता ने अमित शाह के रुख पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या वह 1937 के प्रस्ताव में शामिल इन सभी नेताओं से खुद को बड़ा मानते हैं। खेड़ा ने कहा कि अगर उस समय के राष्ट्रीय नेताओं ने किसी विशेष परिस्थिति में निर्णय लिया था, तो आज उस फैसले को लेकर सवाल उठाने से पहले उसके ऐतिहासिक संदर्भ को समझना चाहिए।

संविधान सभा के फैसले का भी दिया हवाला

पवन खेड़ा ने अपने बयान में संविधान सभा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संविधान सभा में वंदे मातरम् के दो अंतरों को गाने का निर्णय लिया गया था। खेड़ा ने सवाल उठाया कि क्या आज कोई व्यक्ति संविधान सभा के फैसले से भी ऊपर हो सकता है। उन्होंने कहा कि देश को यह तय करना होगा कि वह ऐतिहासिक संस्थाओं और नेताओं के फैसलों पर भरोसा करेगा या मौजूदा राजनीतिक बयानों को प्राथमिकता देगा।

गांधी, नेहरू और पटेल का नाम लेकर हमला

खेड़ा ने अपने बयान में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और डॉ. भीमराव आंबेडकर का नाम लेते हुए अमित शाह पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में इन नेताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और उनके फैसलों को वर्तमान राजनीतिक नजरिए से खारिज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने शाह की आलोचना करते हुए सवाल किया कि आखिर वह खुद को किस स्थिति में रखते हैं।

पैलेट गन और पुलिस कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया

पवन खेड़ा ने वंदे मातरम् विवाद से आगे बढ़कर प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने अमित शाह से सवाल किया कि युवाओं पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था। उन्होंने लड़कियों पर कथित लाठीचार्ज को लेकर भी जवाब मांगते हुए कहा कि सरकार को पहले अपने प्रशासनिक दायित्वों और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए।

‘सरकार को पहले अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए’

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार को उन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए जिनकी जिम्मेदारी उसे जनता ने सौंपी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के बीच तुलना करने के बजाय सरकार को मौजूदा समस्याओं पर जवाब देना चाहिए। खेड़ा ने आरोप लगाया कि जिन मुद्दों पर जवाब मांगा जा रहा है, उनसे ध्यान हटाकर राष्ट्रवादी प्रतीकों को राजनीतिक बहस का केंद्र बनाया जा रहा है।

संसद और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी तंज

खेड़ा ने संसद में विपक्ष की भूमिका और हाल के प्रदर्शनों का संदर्भ देते हुए अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को युवाओं से जुड़े सवालों और प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई का जवाब देना चाहिए। उनका कहना था कि केवल राजनीतिक बयानबाजी से इन सवालों का समाधान नहीं होगा।

वंदे मातरम् पर जारी विवाद और गहराया

वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला ऐसे समय तेज हुआ है, जब दोनों दल इस मुद्दे को अपने-अपने राजनीतिक नजरिए से देख रहे हैं। बीजेपी कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस ऐतिहासिक प्रस्ताव और संविधान सभा के फैसलों का हवाला दे रही है। पवन खेड़ा के ताजा बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस को और गर्म कर सकता है।

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