Delimitation 2026: दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में परिसीमन और राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा प्रमुखता से उठा। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बैठक में प्रस्ताव पारित करने की मांग की, जिसमें अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या बनाए रखने की बात कही गई। तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना की ओर से भी परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों के हितों की सुरक्षा की मांग सामने आई।
कर्नाटक ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर रखी चिंता
डीके शिवकुमार ने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में केवल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से इन राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। उन्होंने 1971 की जनसंख्या को परिसीमन के आधार के रूप में बनाए रखने की व्यवस्था का सम्मान करने की मांग की।
देश की अर्थव्यवस्था में कर्नाटक का बड़ा योगदान
शिवकुमार ने बैठक में कर्नाटक की आर्थिक उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 5.5 प्रतिशत आबादी वाला कर्नाटक भारत की जीडीपी में करीब 9 प्रतिशत योगदान देता है। भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात में राज्य की हिस्सेदारी लगभग 42 प्रतिशत है। कर्नाटक में करीब 1,100 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर मौजूद हैं और बेंगलुरु दुनिया के प्रमुख AI शहरों में शामिल है।
वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ाने की केंद्र से मांग
कर्नाटक ने केंद्र से विभाज्य कर पूल में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग भी उठाई। शिवकुमार के अनुसार राज्य की हिस्सेदारी 3.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत की जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि 15वें वित्त आयोग के तहत हिस्सेदारी कम होने से छह वर्षों में कर्नाटक को अनुमानित 65,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
विशेष अनुदान और बड़े प्रोजेक्टों के लिए सहयोग
शिवकुमार ने 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा के अनुसार 5,495 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान और 6,000 करोड़ रुपये का राज्य-विशिष्ट अनुदान जारी करने की मांग की। इसके अलावा बेंगलुरु-मुंबई हाई-स्पीड रेल, STRR South, रायचूर में AIIMS और कल्याण कर्नाटक के लिए विशेष पैकेज में केंद्र से अतिरिक्त सहयोग की मांग रखी गई।
महिला आरक्षण को लेकर भी उठाई आवाज
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए जनगणना पूरी होने का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि महिलाओं के लिए आरक्षण जल्द सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
जल विवादों के बजाय सहयोग पर जोर
बैठक में कर्नाटक ने अंतरराज्यीय जल विवादों को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। शिवकुमार ने कहा कि पानी के बंटवारे को लेकर राजनीतिक टकराव के बजाय समानता, पारदर्शिता और सहयोग आधारित जल प्रबंधन की जरूरत है। उन्होंने कावेरी, कृष्णा, तुंगभद्रा, पेन्नार और पालार नदी घाटियों में कर्नाटक के कानूनी अधिकारों की रक्षा की बात कही।
मेकेदाटु परियोजना को बताया महत्वपूर्ण
शिवकुमार ने मेकेदाटु परियोजना का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल कर्नाटक के लिए महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इससे तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों को भी लाभ मिल सकता है। उनके मुताबिक दक्षिणी राज्यों को आपसी सहयोग के जरिए जल संसाधनों से जुड़े विवादों का समाधान तलाशना चाहिए।
स्वास्थ्य, शिक्षा और किसानों के मुद्दे भी उठे
कर्नाटक ने परिषद में स्वास्थ्य सेवाओं के वित्तपोषण, शिक्षा, पोषण, गरीब परिवारों के आवास और तटीय क्षेत्रों में कटाव जैसे मुद्दे उठाए। किसानों की सहायता, आपदा राहत, डिजिटल बुनियादी ढांचे, बैंकिंग और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
खनिज संपदा वाले राज्यों के अधिकारों की मांग
शिवकुमार ने Mines & Minerals (Development & Regulation) Bill, 2026 पर दोबारा विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों वाले राज्यों के वित्तीय अधिकारों की रक्षा जरूरी है। केंद्र की नीतियां बनाते समय राज्यों के आर्थिक हितों को पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए।
ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए कड़े कदम जरूरी
बैठक में नशीली दवाओं की तस्करी का मुद्दा भी सामने आया। शिवकुमार ने कहा कि ड्रग्स नेटवर्क से निपटने के लिए कानून, पुलिस कार्रवाई और अभियोजन व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताई।
तमिलनाडु ने प्रतिनिधित्व घटने से बचाने की मांग की
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख विजय ने भी दक्षिणी राज्यों के हितों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने मांग की कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को संसद में मौजूदा प्रतिनिधित्व के प्रतिशत में नुकसान नहीं होना चाहिए। उन्होंने केंद्र से इस संबंध में स्पष्ट विधायी आश्वासन देने की मांग की, हालांकि उन्होंने लोकसभा की 543 सीटों को स्थायी रूप से फ्रीज करने की मांग नहीं की।
दक्षिणी राज्यों ने मांगा आर्थिक और राजनीतिक संतुलन
डीके शिवकुमार ने कहा कि मजबूत दक्षिण भारत ही मजबूत भारत की नींव बन सकता है। उन्होंने आर्थिक योगदान, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संसाधनों के वितरण में संतुलन की जरूरत बताई। बैठक में उठे मुद्दों से साफ है कि दक्षिणी राज्य परिसीमन के साथ-साथ वित्तीय हिस्सेदारी, जल अधिकार और विकास संसाधनों को लेकर केंद्र से संतुलित नीति की उम्मीद कर रहे हैं।
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