Duleep Trophy: बेंगलुरु के BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ग्राउंड-1 पर ईस्ट ज़ोन और सेंट्रल ज़ोन के बीच खेले जा रहे दिलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने इतिहास रच दिया। वैभव सूर्यवंशी ने महज 15 साल और 157 दिन की उम्र में दिलीप ट्रॉफी के इतिहास में अर्धशतक लगाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
42 गेंदों में अर्धशतक, छक्का लगाकर रचा इतिहास
बताते चले कि, ईस्ट ज़ोन की पहली पारी में बल्लेबाजी करने उतरे वैभव सूर्यवंशी ने बेहद आक्रामक अंदाज दिखाया। उन्होंने सिर्फ 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। ऑफ-स्पिनर सारांश जैन की गेंद पर छक्का लगाकर सूर्यवंशी ने फिफ्टी पूरी की और 57 साल पुराने रिकॉर्ड को अपने नाम कर लिया। उनकी इस पारी ने एक बार फिर भारतीय क्रिकेट में उनकी प्रतिभा और भविष्य की संभावनाओं को चर्चा में ला दिया।
लक्ष्मण सिंह का 57 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा
आपकी जानचकारी के लिए बता दे कि, वैभव सूर्यवंशी से पहले दिलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड लक्ष्मण सिंह के नाम था। उन्होंने 1969 के सीजन में 16 साल और 23 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी। भारत के पूर्व स्पिनर पीयूष चावला ने भी 2005 में 16 साल और 307 दिन की उम्र में दिलीप ट्रॉफी में अर्धशतक जड़ा था। अब सूर्यवंशी ने दोनों खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है।
शतक से चूके वैभव सूर्यवंशी, सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड बचा
वैभव सूर्यवंशी इस मुकाबले में एक और बड़ा रिकॉर्ड बनाने से महज कुछ रन दूर रह गए। उन्होंने 81 गेंदों पर 92 रन की शानदार पारी खेली, लेकिन अपना शतक पूरा नहीं कर सके। अगर सूर्यवंशी सेंचुरी पूरी कर लेते, तो वह दिलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन जाते और सचिन तेंदुलकर का लंबे समय से कायम रिकॉर्ड तोड़ देते।
सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड अभी भी कायम
सचिन तेंदुलकर ने 1990-91 दिलीप ट्रॉफी में 17 साल और 262 दिन की उम्र में शतक लगाया था। सूर्यवंशी के पास इस रिकॉर्ड को तोड़ने का शानदार मौका था, लेकिन 92 रन पर आउट होने के बाद यह उपलब्धि उनसे दूर रह गई। शतक लगाने की स्थिति में वह फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में शतक लगाने वाले भारत के दूसरे सबसे युवा बल्लेबाज भी बन सकते थे।
ध्रुव पांडोव के नाम सबसे कम उम्र में फर्स्ट-क्लास शतक
फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में सबसे कम उम्र में शतक लगाने का भारतीय रिकॉर्ड अभी भी ध्रुव पांडोव के नाम है। उन्होंने 1988-89 रणजी ट्रॉफी सीजन में जम्मू-कश्मीर के खिलाफ पंजाब की ओर से खेलते हुए 14 साल और 293 दिन की उम्र में शतक जड़ा था। सूर्यवंशी इस रिकॉर्ड को तोड़ने से अभी काफी दूर हैं, लेकिन उनकी मौजूदा उपलब्धियां उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित युवा खिलाड़ियों में शामिल कर रही हैं।
सेंट्रल ज़ोन 266 रन पर ऑलआउट
मैच की बात करें तो ईस्ट ज़ोन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। शुरुआती झटकों के बाद सेंट्रल ज़ोन की टीम ने वापसी की, लेकिन पूरी टीम पहली पारी में 266 रन पर ऑलआउट हो गई। रिंकू सिंह ने 88 गेंदों पर 60 रन बनाकर टीम को संकट से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।
ईस्ट ज़ोन के गेंदबाजों का दबदबा
सेंट्रल ज़ोन के लिए आर्यन जुयाल ने 46 रन बनाए, जबकि कप्तान रजत पाटीदार 12 रन बनाकर आउट हुए। यश राठौड़ ने 27 रन जोड़े। इसके बाद रिंकू सिंह और हर्ष दुबे ने उपयोगी साझेदारी की। ईस्ट ज़ोन की ओर से अभिजीत सरकार ने तीन विकेट लिए। मुकेश कुमार ने भी तीन विकेट झटके, जबकि मोहम्मद शमी को दो सफलताएं मिलीं।
वैभव सूर्यवंशी की पारी ने फिर खींचा सबका ध्यान
266 रन के जवाब में ईस्ट ज़ोन ने मजबूत शुरुआत की। इसी दौरान वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी मुकाबले का सबसे बड़ा आकर्षण बन गई। महज 15 साल की उम्र में दिलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र का अर्धशतक लगाकर सूर्यवंशी ने इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया। शतक भले ही छूट गया, लेकिन 92 रन की तूफानी पारी ने साफ कर दिया कि इस युवा बल्लेबाज की चर्चा अभी लंबे समय तक जारी रहने वाली है।










