India Iran Talks: किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में सोमवार को होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं की मुलाकात सम्मेलन से इतर हो सकती है। प्रधानमंत्री मोदी रविवार को ही बिश्केक पहुंच चुके हैं, जबकि ईरानी राष्ट्रपति के सोमवार सुबह राजधानी पहुंचने का कार्यक्रम बताया गया है। दोनों देशों के बीच मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए संभावित बैठक को रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
2024 में कजान में हुई थी पिछली आमने-सामने मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन की पिछली प्रत्यक्ष मुलाकात 2024 में रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। हालांकि, इसके बाद दोनों नेताओं के बीच कई अवसरों पर बातचीत होती रही है। खासतौर पर पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों के बीच संपर्क हुआ था। उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि भारत ईरान का मित्र बना रहेगा और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए बातचीत को महत्व देता है।
भारत दोहराएगा बातचीत और कूटनीति का संदेश
यदि बिश्केक में मोदी और पेजेशकियन की मुलाकात होती है, तो प्रधानमंत्री भारत के उस पुराने रुख को दोहरा सकते हैं कि पश्चिम एशिया के सभी विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। भारत लगातार क्षेत्र में तनाव कम करने और राजनीतिक संवाद को प्राथमिकता देने की वकालत करता रहा है। संभावित बैठक में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनके हितों को लेकर भी भारत की चिंताओं पर चर्चा हो सकती है।
ऊर्जा और व्यापारिक आवाजाही पर भी होगी चर्चा
संभावित द्विपक्षीय बातचीत में ऊर्जा आपूर्ति और सामान की निर्बाध आवाजाही का मुद्दा भी प्रमुख हो सकता है। भारत के लिए ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों देशों के संबंध व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय संपर्क से जुड़े हुए हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण समुद्री मार्गों और व्यापारिक आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दे सकता है।
चाबहार पोर्ट को लेकर बढ़ी चुनौती
भारत और ईरान के रिश्तों में चाबहार बंदरगाह की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने वाली इस परियोजना पर अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली छूट की समय-सीमा खत्म होने से नई चुनौतियां पैदा हुई हैं। ऐसे में मोदी और पेजेशकियन की संभावित बातचीत में चाबहार पोर्ट, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और इससे जुड़े आर्थिक सहयोग पर भी विचार-विमर्श संभव है। भारत इस परियोजना को मध्य एशिया तक पहुंच के महत्वपूर्ण माध्यम के तौर पर देखता है।
अगले महीने भारत आ सकते हैं पेजेशकियन
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के अगले महीने होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आने की संभावना भी जताई जा रही है। यदि उनका भारत दौरा होता है, तो मोदी और पेजेशकियन के बीच दोबारा उच्चस्तरीय वार्ता का अवसर मिलेगा। इससे दोनों देशों के बीच मौजूदा रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा को आगे बढ़ाया जा सकता है।
भारत के सामने कूटनीतिक संतुलन की चुनौती
पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात में भारत को बेहद सावधानी के साथ अपनी विदेश नीति आगे बढ़ानी पड़ रही है। एक ओर नई दिल्ली ईरान के साथ उच्चस्तरीय संपर्क बनाए हुए है, तो दूसरी तरफ उन खाड़ी देशों के प्रति भी एकजुटता व्यक्त कर रही है, जिन्हें अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी के कारण तेहरान के हमलों का सामना करना पड़ा है। भारत दोनों पक्षों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बनाए रखना चाहता है।
ब्रिक्स में भी भारत के लिए अहम परीक्षा
ईरान की ओर से उम्मीद की जा रही है कि भारत ब्रिक्स मंच पर अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना करेगा। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात भी ब्रिक्स का सदस्य है और पश्चिम एशिया में मौजूदा घटनाक्रम से सीधे प्रभावित देशों में शामिल है। ऐसे में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न सदस्य देशों के बीच सहमति कायम करने की होगी। ब्रिक्स की बैठक के दौरान पश्चिम एशिया पर संतुलित रुख अपनाकर सर्वसम्मति से घोषणा-पत्र जारी कराना भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक परीक्षा साबित हो सकता है।
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