Uttarakhand News: उत्तराखंड में बिना मान्यता चल रहे मदरसों पर शिकंजा, बच्चों को दूसरे स्कूलों में दिलाना होगा दाखिला

उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित हो रहे मदरसों पर सरकारी कार्रवाई तेज हो गई है। कई संस्थानों को सील किया जा चुका है, जबकि सैकड़ों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है। अब सबसे बड़ा सवाल बच्चों की पढ़ाई को लेकर है। सरकार ने ऐसे छात्रों के लिए क्या व्यवस्था की है, जानिए पूरी जानकारी।

उत्तराखंड में बिना मान्यता चल रहे मदरसों पर शिकंजा

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

सितम्बर 7, 2026

Uttarakhand News: उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित हो रहे मदरसों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है। मदरसा बोर्ड को भंग किए जाने के बाद अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण, समाज कल्याण विभाग और शिक्षा विभाग मिलकर ऐसे संस्थानों की जांच और कार्रवाई कर रहे हैं, जो तय नियमों और आवश्यक मान्यता के बिना संचालित हो रहे हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि केवल मदरसा बंद कर देने से संचालकों की जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी। इन संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए प्रबंधन को उन्हें नजदीकी अल्पसंख्यक विद्यालय में दाखिला दिलाने संबंधी पत्र भी उपलब्ध कराना होगा।

Uttarakhand News: उत्तराखंड के भगवत प्रसाद मकवाना को मिली बड़ी

17 मदरसों पर अब तक सील की कार्रवाई

राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में कुल 452 मदरसों में से अब तक 17 संस्थानों को सील किया जा चुका है। इनमें ऊधमसिंह नगर जिले के आठ, हरिद्वार के चार, नैनीताल के चार और देहरादून का एक मदरसा शामिल है।

इसके अलावा तीन मदरसा संचालकों ने प्रशासन को लिखित रूप से स्वयं संस्थान बंद करने की जानकारी दी है। वहीं बड़ी संख्या में मदरसा प्रबंधक मान्यता प्रक्रिया में भी आगे बढ़ रहे हैं। अब तक करीब 200 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है, जबकि इनमें से 35 संस्थानों को सरकार की ओर से मान्यता प्रदान की जा चुकी है।

30 सितंबर तक मान्यता के लिए आवेदन का मौका

अल्पसंख्यक शिक्षा से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक बिना मान्यता संचालित संस्थानों के लिए फिलहाल आवेदन करने का अवसर खुला है। यदि कोई मदरसा 30 सितंबर 2026 तक मान्यता के लिए आवेदन करता है, तो उसके आवेदन को स्वीकार किया जाएगा। अल्पसंख्यक मामलों के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश स्पष्ट हैं कि प्रदेश में कोई भी शिक्षण संस्थान निर्धारित नियमों और वैध मान्यता के बिना संचालित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना है। साथ ही संस्थानों को तय शैक्षणिक मानकों और नियमों का पालन भी सुनिश्चित करना होगा।

बच्चों की पढ़ाई को लेकर सरकार की प्राथमिकता

अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के चेयरमैन डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि सरकार की कार्रवाई का उद्देश्य किसी संस्था या समुदाय को परेशान करना नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण बात बच्चों के भविष्य और उनकी शिक्षा को सुरक्षित रखना है। उनके मुताबिक प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित माहौल में बेहतर और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। ऐसे में यदि कोई संस्थान आवश्यक मानकों को पूरा नहीं करता या बिना मान्यता संचालित पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बंद संस्थानों में पढ़ रहे बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकेगी

प्रशासन की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि कार्रवाई का असर बच्चों की पढ़ाई पर न पड़े। जिन मदरसों पर बंद या सील करने की कार्रवाई होगी, वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आसपास के मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की व्यवस्था की जाएगी। सरकार और संबंधित विभागों का कहना है कि नियमों का पालन कराने के साथ बच्चों की शिक्षा की निरंतरता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। आने वाले दिनों में बिना मान्यता चल रहे अन्य संस्थानों पर भी जांच और कार्रवाई का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।