UP Election 2027: हरगांव में BJP का किला बच पाएगा या सपा-बसपा की मारेगी बाजी, जानें जातीय समीकरण का पूरा खेल

हरगांव विधानसभा सीट पर 2027 की सियासी जंग दिलचस्प होती जा रही है। लगातार दो बार जीत चुके सुरेश राही के सामने सपा और बसपा चुनौती पेश कर सकती हैं। पासी, कुर्मी, जाटव, ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाताओं का समीकरण बेहद अहम होगा। लेकिन 2027 में किसका सामाजिक गठजोड़ बाजी मारेगा?

UP Election 2027

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 7, 2026

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 403 विधानसभा सीटों वाला उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, दरअसल राज्य लोकसभा की 80 सीटों का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में 2027 का विधानसभा चुनाव 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की ताकत और सामाजिक समीकरण का अहम माना जा रहा है। सीतापुर जिले की हरगांव विधानसभा सीट भी इस व्यापक राजनीतिक मुकाबले में महत्वपूर्ण रहेगी।

हरगांव विधानसभा
हरगांव विधानसभा

 

हरगांव का चुनावी इतिहास रहा उतार-चढ़ाव भरा

हरगांव विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास लगातार बदलते समीकरणों का गवाह रहा है। कांग्रेस के प्रभाव के बाद 1989 से 1993 के बीच बीजेपी ने लगातार तीन चुनावों में जीत दर्ज की। इसके बाद 1996 में समाजवादी पार्टी ने बीजेपी को हराकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत की। वर्ष 2002 से 2012 तक बहुजन समाज पार्टी ने लगातार तीन चुनाव जीतकर इस सीट पर अपना प्रभाव स्थापित किया। इसके बाद 2017 में बीजेपी ने फिर वापसी की और तब से पार्टी का दबदबा कायम है।

हरगांव विधानसभा क्षेत्र संख्या 147 है और यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यह धौरहरा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पांच विधानसभा सीटों में शामिल है। सीट पर मौजूदा विधायक भारतीय जनता पार्टी के सुरेश राही हैं, जिन्होंने 2017 और 2022 में लगातार दो बार जीत दर्ज की। सुरक्षित सीट होने के बावजूद यहां दलित, ओबीसी और सवर्ण मतदाताओं का व्यापक सामाजिक संतुलन चुनावी नतीजे पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है।

SIR 2026
SIR 2026

2026 की मतदाता सूची में बड़ा बदलाव

2026 की अंतिम SIR मतदाता सूची के अनुसार हरगांव विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,85,675 मतदाता दर्ज हैं। इनमें 1,57,782 पुरुष, 1,27,881 महिलाएं और 12 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। सीतापुर जिले की नौ विधानसभा सीटों में मतदाताओं की संख्या के लिहाज से हरगांव सबसे छोटी सीट है। एसआईआर प्रक्रिया के बाद यहां पुराने मतदाता आधार की तुलना में करीब 39 हजार मतदाताओं की कमी दर्ज हुई है, जो लगभग 12.06 प्रतिशत के आसपास है।

पासी मतदाता माने जाते हैं सबसे अहम

हरगांव के चुनावी समीकरण में पासी मतदाताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। पुराने चुनावी आकलनों में यहां करीब 90 हजार पासी मतदाता होने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, यह आंकड़ा वर्तमान आधिकारिक जातिवार मतदाता सूची नहीं है। निर्वाचन व्यवस्था में जाति के आधार पर मौजूदा मतदाताओं की आधिकारिक संख्या अलग से सार्वजनिक नहीं की जाती। इसलिए इन पुराने आंकड़ों को केवल सामाजिक संरचना समझने के संकेत के रूप में देखना उचित होगा।

कुर्मी और जाटव मतदाता भी निर्णायक भूमिका में

पुराने अनुमानों के अनुसार हरगांव में करीब 40 हजार कुर्मी और लगभग 35 हजार जाटव मतदाता बताए जाते रहे हैं। कुर्मी समुदाय गैर-यादव ओबीसी राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है, जबकि जाटव मतदाता सुरक्षित सीट पर दलित राजनीति का प्रमुख हिस्सा हैं। बीजेपी के सामने पासी नेतृत्व के साथ दूसरे दलित और ओबीसी समूहों को जोड़ने की चुनौती होगी। वहीं समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की रणनीति भी इन समुदायों में समर्थन बढ़ाने पर निर्भर कर सकती है।

ब्राह्मण, मुस्लिम और ठाकुर वोटों का भी असर

हरगांव में पुराने चुनावी आकलनों में करीब 30 हजार ब्राह्मण, 26 हजार मुस्लिम और 15 हजार ठाकुर मतदाताओं का अनुमान लगाया गया था। ये आंकड़े भी वर्तमान आधिकारिक जातिवार मतदाता आंकड़े नहीं हैं। इसके बावजूद इन सामाजिक समूहों का चुनावी प्रभाव नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सुरक्षित सीट होने के बावजूद सवर्ण और मुस्लिम मतदाता विभिन्न दलों के सामाजिक गठजोड़ को मजबूत या कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सुरेश राही
सुरेश राही

सुरेश राही ने लगातार दो बार जीत दर्ज की

बीजेपी के सुरेश राही ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में लगातार जीत हासिल करके हरगांव में पार्टी की स्थिति मजबूत की। वह पासी समुदाय से आते हैं और उनके परिवार की इस क्षेत्र में पुरानी राजनीतिक पहचान रही है। उनके पिता रामलाल राही केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री रह चुके हैं और क्षेत्र की राजनीति में उनका प्रभाव माना जाता था। परिवार की राजनीतिक विरासत और स्थानीय सामाजिक जुड़ाव सुरेश राही की राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।

CM योगी - मंत्री सुरेश राही
CM योगी – मंत्री सुरेश राही

योगी सरकार में मंत्री हैं सुरेश राही

हरगांव के मौजूदा विधायक सुरेश राही उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कारागार राज्यमंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। लगातार दो विधानसभा चुनावों में जीत के बाद उनकी क्षेत्रीय राजनीतिक स्थिति मजबूत हुई है। बीजेपी के लिए उनकी मौजूदगी सुरक्षित सीट पर पार्टी के सामाजिक आधार को बनाए रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। आगामी चुनाव में पार्टी के सामने इस मजबूत आधार को बरकरार रखने की चुनौती होगी।

BJP
BJP

2017 में भी बीजेपी ने बड़ी बढ़त बनाई

आपको बता दें कि 2017 के चुनाव में भी सुरेश राही ने हरगांव सीट पर बीजेपी को बड़ी जीत दिलाई थी। उन्हें 1,01,680 वोट मिले, जबकि बीएसपी के रामहेत भारती को 56,685 वोट प्राप्त हुए। बीजेपी की जीत का अंतर 44,995 वोट रहा। इससे पहले इस सीट पर बीएसपी का प्रभाव मजबूत माना जाता था। 2017 में बीजेपी ने दलित नेतृत्व के साथ सवर्ण और गैर-यादव ओबीसी समर्थन का ऐसा समीकरण बनाया, जिसने उसे बड़ी सफलता दिलाई।

रामहेत भारती
रामहेत भारती

2012 में बीएसपी के रामहेत भारती जीते थे

2012 के विधानसभा चुनाव में हरगांव की तस्वीर बीजेपी के पक्ष में नहीं थी। उस चुनाव में बीएसपी के रामहेत भारती ने 73,889 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। समाजवादी पार्टी के आरपी चौधरी को 61,740 वोट मिले थे। बीएसपी ने 12,149 वोट के अंतर से चुनाव जीता था। यह नतीजा उस दौर में सीट पर बहुजन समाज पार्टी के मजबूत दलित आधार को दर्शाता है।

आनंद भदौरिया
आनंद भदौरिया

2024 लोकसभा चुनाव ने बीजेपी की चिंता बढ़ाई

2024 के लोकसभा चुनाव में हरगांव विधानसभा खंड में समाजवादी पार्टी ने बीजेपी पर मामूली बढ़त हासिल की। एसपी उम्मीदवार आनंद भदौरिया को 90,862 वोट मिले, जबकि बीजेपी की रेखा वर्मा को 88,932 वोट प्राप्त हुए। इस तरह एसपी को 1,930 वोट की बढ़त मिली। बीएसपी उम्मीदवार श्याम किशोर अवस्थी को 26,304 वोट मिले। हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के मुद्दे अलग होते हैं, फिर भी यह परिणाम बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है।

2027 में BJP के सामने चुनौती

2022 में 38,160 वोट की बढ़त हासिल करने वाली बीजेपी के लिए 2027 में उस प्रदर्शन को दोहराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एसआईआर के बाद मतदाता आधार में हुए बदलाव और 2024 में एसपी की मामूली बढ़त ने चुनावी गणित को नया आयाम दिया है। बीजेपी को पासी नेतृत्व के साथ जाटव, कुर्मी, सवर्ण और अन्य ओबीसी मतदाताओं का समर्थन बनाए रखना होगा। दूसरी ओर एसपी को मुस्लिम, यादव, दलित और ओबीसी मतों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना होगा।

स्थानीय मुद्दों ने बनाया चुनाव को अहम

हरगांव विधानसभा चुनाव में स्थानीय विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था, किसान समस्याएं और क्षेत्रीय जरूरतें प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे। इसके साथ ही जातीय समीकरणों ने भी उम्मीदवारों की चुनावी रणनीति को प्रभावित किया। आरक्षित सीट होने के कारण दलित मतदाताओं की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही। इसके अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग, सवर्ण और अल्पसंख्यक मतदाताओं का समर्थन भी चुनावी परिणाम तय करने में अहम माना गया।

मुकाबला सामाजिक समीकरणों पर निर्भर

हरगांव विधानसभा का चुनाव केवल प्रत्याशियों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक गठजोड़, बूथ स्तर की संगठनात्मक ताकत और मतदाता सूची में हुए बदलाव भी अहम होंगे। बीएसपी यदि अपने पुराने दलित आधार में वापसी करती है तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। वहीं एसपी यदि 2024 की बढ़त को विधानसभा स्तर पर व्यापक समर्थन में बदलने में सफल रहती है, तो बीजेपी के लिए चुनौती बढ़ सकती है। ऐसे में 2027 का हरगांव चुनाव पुराने नतीजों और बदलते सामाजिक समीकरणों के बीच दिलचस्प मुकाबला बन सकता है।

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