Uttarakhand SIR: उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग ने अंतिम वोटर लिस्ट जारी कर दी है। नई सूची में राज्य की सभी 70 विधानसभा सीटों पर मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है। खास बात यह है कि पर्वतीय क्षेत्रों की तुलना में मैदानी विधानसभा सीटों पर मतदाताओं की संख्या में करीब दोगुनी कमी आई है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में दर्ज मतदाताओं की संख्या से तुलना करें तो राज्य के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों के बीच वोटरों की कमी का बड़ा अंतर सामने आया है।
Uttarakhand SIR: उत्तराखंड में SIR के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी,
36 मैदानी सीटों पर 7.33 लाख वोटर कम
उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों में 34 सीटें पूरी तरह पर्वतीय क्षेत्र में आती हैं, जबकि 36 विधानसभा सीटें मैदानी इलाकों में हैं। SIR के बाद जारी आंकड़ों के अनुसार, 34 पर्वतीय सीटों पर 2022 के मुकाबले 3,80,008 मतदाता कम हुए हैं। इसके मुकाबले 36 मैदानी विधानसभा क्षेत्रों में 7,33,260 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। यानी मैदानी सीटों पर घटे मतदाताओं की संख्या पर्वतीय सीटों के मुकाबले लगभग दोगुनी है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर की सभी सीटों के अलावा पौड़ी की कोटद्वार, नैनीताल की हल्द्वानी, कालाढूंगी और रामनगर को मैदानी विधानसभा क्षेत्रों में शामिल किया गया है। वहीं देहरादून की चकराता सीट पूरी तरह पर्वतीय क्षेत्र में आती है।
देहरादून में सबसे ज्यादा मतदाता घटे

जिलावार आंकड़ों में देहरादून में मतदाताओं की संख्या में सबसे बड़ी कमी सामने आई है। यहां कुल मतदाताओं में करीब 13.51 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जिले की बड़ी विधानसभा सीटों में धर्मपुर में सबसे ज्यादा वोटर कम हुए हैं। इसके अलावा देहरादून कैंट, ऋषिकेश और राजपुर समेत कई विधानसभा क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में नाम मतदाता सूची से हटे हैं। मैदानी क्षेत्रों में काशीपुर और मसूरी जैसी सीटों पर भी मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
सत्यापन में अनुपस्थित मिले कई मतदाता
SIR अभियान के दौरान चुनाव अधिकारियों की ओर से घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया गया। इस प्रक्रिया में कई लोग अपने दर्ज पते पर नहीं मिले। वहीं कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग स्थानों पर दर्ज पाया गया। ऐसे मामलों में नियमानुसार नामों को मतदाता सूची से हटाया गया। जिन विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटे हैं, वहां आने वाले समय में इसका असर चुनावी समीकरणों पर भी दिखाई दे सकता है।
पहाड़ में पलायन का असर भी नजर आया

पर्वतीय विधानसभा सीटों के आंकड़ों में भी पलायन का प्रभाव दिखाई देता है। जिन क्षेत्रों से लंबे समय से बड़ी संख्या में लोगों के बाहर जाने की स्थिति रही है, वहां मतदाताओं की संख्या में भी अपेक्षाकृत अधिक कमी दर्ज हुई। लैंसडौन और पिथौरागढ़ में 19 हजार से अधिक, जबकि टिहरी में 18 हजार से ज्यादा मतदाता घटे हैं। श्रीनगर में करीब 14 हजार, बदरीनाथ में 13 हजार और कर्णप्रयाग में 11 हजार से अधिक मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है।
मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों का आंकड़ा
- कुल विधानसभा सीटें: 70
- पर्वतीय सीटें: 34
- मैदानी सीटें: 36
- पहाड़ में कम हुए मतदाता: 3,80,008
- मैदान में कम हुए मतदाता: 7,33,260
SIR के बाद सामने आए ये आंकड़े उत्तराखंड की मतदाता सूची में हुए बड़े बदलाव को दर्शाते हैं। अब इन बदलावों का राजनीतिक और चुनावी स्तर पर क्या असर पड़ता है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा।
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