Uttarakhand CM: रामपुर तिराहा कांड को 32 साल, CM धामी ने शहीद आंदोलनकारियों को किया याद

रामपुर तिराहा कांड की 32वीं बरसी पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुजफ्फरनगर पहुंचे और शहीद आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान शहीदों की स्मृति में प्रतिमा स्थापना समेत कई घोषणाएं की गईं। आखिर 2 अक्टूबर 1994 को रामपुर तिराहा पर क्या हुआ था और आज इसका महत्व क्यों बरकरार है?

रामपुर तिराहा कांड को 32 साल

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 3, 2026

Uttarakhand CM: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले स्थित रामपुर तिराहा पहुंचकर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने शहीद स्थल पर आंदोलनकारियों की स्मृति में प्रतिमाएं स्थापित करने के कार्य का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलन के शहीदों के संघर्ष, त्याग और बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने इस मौके पर आंदोलनकारियों की स्मृतियों को संरक्षित करने से जुड़े कई कार्यों की भी घोषणा की।

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गांव-कस्बों में भी लगाई जाएंगी शहीदों की प्रतिमाएं

मुख्यमंत्री धामी ने घोषणा की कि उत्तराखंड आंदोलन के शहीद राज्य आंदोलनकारियों की प्रतिमाएं उनके गांवों और कस्बों में भी स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा रामपुर तिराहा स्थित राज्य अतिथि गृह के कायाकल्प की योजना भी बताई गई। उन्होंने शहीदों की स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए स्मृति पुस्तकालय को ई-लाइब्रेरी में बदलने और मौजूदा संग्रहालय का विस्तार करने की बात भी कही। सरकार के मुताबिक, इन प्रयासों का उद्देश्य राज्य आंदोलन से जुड़े इतिहास और संघर्ष को संरक्षित करना है।

1994 की घटना को बताया आंदोलन का काला अध्याय

1994 की घटना को बताया आंदोलन का काला अध्याय
1994 की घटना को बताया आंदोलन का काला अध्याय

रामपुर तिराहा की घटना 2 अक्टूबर 1994 को हुई थी। उस समय उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे कार्यकर्ता ऋषिकेश से दिल्ली की ओर जा रहे थे। रामपुर तिराहा के पास पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोक दिया था। इसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई में सात आंदोलनकारियों की मौत हुई थी। वहीं, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न के आरोप भी सामने आए थे। यह घटना उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण और विवादित अध्याय के तौर पर दर्ज है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आंदोलनकारियों के बलिदान और संघर्ष के परिणामस्वरूप उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा मिला। उत्तराखंड का गठन 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग करके किया गया था।

सरकार की नीतियों का भी किया उल्लेख

रामपुर तिराहा कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री धामी ने राज्य सरकार की विभिन्न नीतियों और उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के अभियान के तहत करीब 13,000 एकड़ भूमि को मुक्त कराया गया है। उन्होंने धर्मांतरण को लेकर लागू कानून का भी जिक्र किया और कहा कि राज्य में इसे रोकने के लिए धर्मांतरण-रोधी कानून लागू किया गया है।

समान नागरिक संहिता और मदरसा बोर्ड पर बयान

समान नागरिक संहिता और मदरसा बोर्ड पर बयान
समान नागरिक संहिता और मदरसा बोर्ड पर बयान

मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू की गई है, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और जिम्मेदारियां सुनिश्चित करना है। इसके अलावा उन्होंने राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने के लिए बनाए गए नए कानून का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने इन कदमों को राज्य सरकार की नीतिगत पहलों के तौर पर सामने रखा। रामपुर तिराहा की बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में शहीद आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि देने के साथ उनके संघर्ष और स्मृतियों को संरक्षित करने के लिए विभिन्न योजनाओं की घोषणा की गई।

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