Uttarakhand News: कर्णप्रयाग में भाजपा के सामने अपनों की चुनौती, अस्पताल से स्कूल तक उठ रहे सवाल

उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में भाजपा के सामने राजनीतिक चुनौतियों की चर्चा तेज है। अस्पतालों की सुविधाओं से लेकर स्कूलों की स्थिति तक, कई स्थानीय मुद्दे सवालों के घेरे में हैं। पार्टी को विरोधियों के साथ अपनों की चुनौती का भी सामना करना पड़ सकता है। आखिर इन मुद्दों का आगामी चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा?

कर्णप्रयाग में भाजपा के सामने अपनों की चुनौती

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 13, 2026

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Uttarakhand News: उत्तराखंड की कर्णप्रयाग विधानसभा सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के प्रभाव वाली सीट मानी जाती रही है। वर्ष 2002 से 2022 के बीच हुए पांच विधानसभा चुनावों में भाजपा ने चार बार जीत दर्ज की, जबकि वर्ष 2012 में कांग्रेस के दिवंगत नेता डॉ. एपी मैखुरी विधायक चुने गए थे। हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस सीट पर भाजपा की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। इसकी वजह विपक्ष से ज्यादा पार्टी से जुड़े लोगों और पूर्व पदाधिकारियों की ओर से उठाई जा रही स्थानीय समस्याएं हैं।

सिमली बेस अस्पताल की मांग पर आंदोलन तेज

कर्णप्रयाग क्षेत्र के सिमली में बेस अस्पताल की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। खास बात यह है कि इस आंदोलन की अगुवाई भाजपा के पूर्व पदाधिकारी कर रहे हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र सिंह नेगी पहले जिला पंचायत सदस्य और भाजपा के मंडल महामंत्री रह चुके हैं। अस्पताल की मांग पूरी नहीं होने से नाराज नेगी अब पार्टी से इस्तीफा देने की बात भी कह रहे हैं। इससे स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर क्षेत्र में असंतोष और राजनीतिक चर्चा दोनों बढ़ गई हैं।

स्थानीय लोगों की अस्पताल संबंधी मांग भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पार्टी के अपने पूर्व पदाधिकारी इस मुद्दे पर सरकार और संगठन से जवाब मांग रहे हैं। आगामी चुनाव से पहले यह आंदोलन पार्टी के सामने जनसमस्याओं के समाधान की चुनौती पेश कर रहा है।

नैनीसैंण इंटर कॉलेज में शिक्षकों की कमी का मुद्दा

कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के नैनीसैंण इंटर कॉलेज में शिक्षकों की मांग को लेकर भी आंदोलन चल रहा है। इस मामले में भाजपा के सोशल मीडिया विभाग से जुड़े पदाधिकारी और भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व ग्रामीण मंडल अध्यक्ष राकेश नेगी आवाज उठा रहे हैं। शिक्षकों की नियुक्ति की मांग को लेकर वह 28 सितंबर से नंगे पांव चल रहे हैं। शिक्षा से जुड़ी इस समस्या पर पार्टी के पदाधिकारी का मुखर होना भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। स्थानीय स्तर पर शिक्षकों की उपलब्धता और विद्यार्थियों की पढ़ाई से जुड़े सवाल अब राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गए हैं।

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पूर्व विधायक भी घोषणाओं पर उठा रहे सवाल

कर्णप्रयाग के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी भी क्षेत्र में की गई घोषणाओं पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज बताए जा रहे हैं। उनका जोर गैरसैंण में ग्रीष्मकालीन राजधानी क्षेत्र के विकास और झील निर्माण सहित अन्य प्रस्तावित कार्यों को आगे बढ़ाने पर है। घोषणाओं के धरातल पर उतरने में देरी को लेकर उनकी नाराजगी सामने आई है। वहीं, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुरेश डिमरी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए उसे जमीनी स्तर पर विफल बताया है। विपक्ष इन आंदोलनों और लंबित मांगों को सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने के अवसर के रूप में देख रहा है।

भाजपा संगठन का दावा

भाजपा संगठन का दावा
भाजपा संगठन का दावा

आंदोलनों और स्थानीय असंतोष के बीच भाजपा संगठन का कहना है कि जनसमस्याओं को उठाना गलत नहीं है। पार्टी के अनुसार, विधायक और संगठन के पदाधिकारी सिमली अस्पताल, शिक्षकों की मांग तथा अन्य विकास कार्यों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव और शिक्षा मंत्री से लगातार बातचीत कर रहे हैं।संगठन ने उम्मीद जताई है कि संबंधित समस्याओं का जल्द समाधान निकलेगा। साथ ही पार्टी पदाधिकारियों से अपनी मांगें उचित मंच पर रखने की बात कही गई है। पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी से भी बातचीत करने की बात सामने आई है।

2027 से पहले भाजपा के सामने जनविश्वास बनाए रखने की चुनौती

कर्णप्रयाग में अस्पताल, स्कूल और विकास योजनाओं से जुड़े मुद्दे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अहम हो सकते हैं। भाजपा के सामने चुनौती केवल विपक्ष के सवालों का जवाब देना नहीं, बल्कि अपने कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना भी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लंबित मांगों पर कितनी जल्दी कार्रवाई होती है और क्षेत्र में उठ रहे असंतोष को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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