Uttarakhand: यमुनोत्री मार्ग पर भूस्खलन, SDRF ने 100 श्रद्धालुओं को निकाला सुरक्षित

यमुनोत्री हाईवे पर स्यानाचट्टी के पास भूस्खलन से करीब 100 श्रद्धालु फंस गए। SDRF ने रस्सियों की मदद से सभी यात्रियों को सुरक्षित पार कराया।

Uttarakhand

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 11, 2026

Uttarakhand: उत्तराखंड में मानसून की भारी बारिश के बीच चारधाम यात्रा मार्ग पर हादसों और भूस्खलन का सिलसिला लगातार जारी है। शनिवार को यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्यानाचट्टी के समीप अचानक हुए एक भारी भूस्खलन के कारण सड़क मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया। पहाड़ी से गिरे टन टन मलबे और भारी पत्थरों की वजह से हाईवे का एक बड़ा हिस्सा बंद हो गया, जिसके चलते यमुनोत्री धाम जाने और वहां से वापस लौट रहे श्रद्धालुओं की सांसें अटक गईं। मार्ग बंद होने के कारण देखते ही देखते सैकड़ों यात्री बीच रास्ते में ही फंस गए। इस आपातकालीन स्थिति की सूचना मिलते ही राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की टीमों ने मोर्चे को संभाला और बेहद साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर करीब 100 यात्रियों को सुरक्षित रेस्क्यू किया।

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दो चौकियों से रवाना हुई SDRF की टीमें

यमुनोत्री हाईवे पर हुए इस भूस्खलन की भयावहता को देखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र तुरंत हरकत में आया। एसडीआरएफ मुख्यालय के अनुसार, मार्ग अवरुद्ध होने और यात्रियों के फंसने की जैसे ही पुख्ता सूचना मिली, तुरंत दो अलग-अलग पोस्ट से रेस्क्यू टीमों को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। पहली टीम पोस्ट बड़कोट से मुख्य आरक्षी दुर्गेश रतूड़ी के कुशल नेतृत्व में तुरंत मौके पर पहुंची। वहीं, हालात की गंभीरता को देखते हुए पोस्ट जानकीचट्टी से मुख्य आरक्षी राजेश कुमार के नेतृत्व में दूसरी बैकअप टीम को भी फौरन घटनास्थल पर तैनात किया गया। दोनों टीमों ने समन्वय बनाकर काम शुरू किया।

घटनास्थल पर पहुंचने के बाद जवानों ने देखा कि मुख्य सड़क पूरी तरह मलबे से पटी हुई थी और लगातार ऊपर से पत्थर गिर रहे थे। ऐसे में मुख्य मार्ग से यात्रियों को निकालना खतरे से खाली नहीं था। एसडीआरएफ के जांबाज जवानों ने बिना वक्त गंवाए एक सुरक्षित वैकल्पिक पहाड़ी मार्ग की तलाश की। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जवानों ने सबसे पहले उस बेहद संकरे और ढलान वाले रास्ते पर ‘रोप फिक्सिंग’ (मजबूत रस्सियां बांधने) का काम किया। इसके बाद शुरू हुआ जिंदगी बचाने का सिलसिला। जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक-एक श्रद्धालु को बेहद सावधानीपूर्वक रस्सी के सहारे उस खतरनाक पहाड़ी रास्ते को पार कराया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को विशेष प्राथमिकता दी गई। कड़ी मशक्कत के बाद लगभग 100 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालकर उन्हें उनके गंतव्य की ओर रवाना किया गया।

प्रशासन ने जारी की एडवायजरी

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से हो रही लगातार मूसलाधार बारिश के चलते यमुनोत्री और गंगोत्री समेत तमाम पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन और पहाड़ी दरकने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। स्यानाचट्टी के पास हुआ यह हादसा भी इसी मानसूनी बारिश का नतीजा है। मार्ग पर कई जगहों पर संवेदनशील डेंजर जोन सक्रिय हो गए हैं, जहां कभी भी मलबा गिरने का अंदेशा बना रहता है।

इस विकट स्थिति को देखते हुए उत्तराखंड प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने चारधाम यात्रा पर आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष चेतावनी (Advisory) जारी की है। प्रशासन ने सख्त अपील की है कि कोई भी यात्री मौसम की सटीक जानकारी और हाईवे की वर्तमान स्थिति का पता किए बिना अपनी यात्रा शुरू न करे। लगातार बारिश के दौरान यात्रा करने से बचने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही, हाईवे खोलने के लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) और स्थानीय लोक निर्माण विभाग की जेसीबी मशीनों को भी जगह-जगह तैनात किया गया है ताकि मलबे को हटाकर जल्द से जल्द यातायात को सुचारू किया जा सके, लेकिन खराब मौसम लगातार इन कार्यों में बाधा डाल रहा है।

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