Punjab News: पंजाब में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में ‘किसान मजदूर मोर्चा’ (KMM) चैप्टर पंजाब के आह्वान पर राज्यभर में रेल रोको आंदोलन की शुरुआत कर दी गई है। अपनी मांगों को मनवाने के लिए किसानों ने रेलवे ट्रैक पर डेरा डाल दिया है, जिससे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। इस आंदोलन के तहत राज्य के करीब छह प्रमुख जिलों में रेल यातायात को पूरी तरह से बाधित किया गया है, जिससे आवागमन पर गहरा असर पड़ा है।
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मोगा में भारी पुलिस बल के बावजूद ट्रैक पर पहुंचे किसान

मोगा जिले में अपनी मांगों के समर्थन में केकेएम चैप्टर पंजाब से जुड़ी आठ अलग-अलग किसान जत्थेबंदियों ने उग्र प्रदर्शन किया। किसानों ने गांव महेश्वरी संधूया के पास रेलवे ट्रैक पर बैठकर पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और रोष प्रदर्शन किया। किसानों को रेलवे ट्रैक तक पहुँचने से रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाते हुए किसानों को रोकने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन किसानों के जोश और संख्या बल के आगे पुलिस की बैरिकेडिंग फेल हो गई। पुलिस बैरिकेड्स को पार करके किसान सीधे रेलवे ट्रैक पर पहुँचने में सफल रहे। इस दौरान रेलवे स्टेशन के बाहर किसानों और पुलिस बल के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।
इस आंदोलन के संबंध में किसान नेता बलदेव सिंह जीरा ने जानकारी दी कि पिछले काफी समय से किसान अपनी जायज मांगों को लेकर डीसी दफ्तरों और पंजाब सरकार के मंत्रियों के आवास के बाहर शांतिपूर्ण धरने दे रहे थे, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने उनकी सुध नहीं ली। मजबूर होकर किसानों को रेल की पटरियों पर उतरना पड़ा।
छह जिलों में रेल यातायात ठप और मुख्य मांगें

किसान मजदूर मोर्चा के वरिष्ठ नेता सरवण सिंह पंधेर ने बताया कि सरकार की उदासीनता के कारण यह कदम उठाया गया है। करीब एक महीने पहले मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर सभी मांगों से अवगत कराया गया था और 31 अगस्त को डिप्टी कमिश्नर कार्यालयों के बाहर भी प्रदर्शन किए गए थे, लेकिन सरकार ने कोई संवाद नहीं किया।
वर्तमान में अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोजपुर, मोगा, संगरूर और सुनाम समेत कुल छह महत्वपूर्ण स्थानों पर रेल यातायात रोक दिया गया है। इसके साथ ही, मंत्रियों के घरों के बाहर चल रहे धरने भी यथावत जारी रहेंगे।
किसानों की प्रमुख मांगों में निम्नलिखित मुद्दे शामिल हैं, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, बिजली संशोधन अधिनियम और बीज संशोधन अधिनियम पर स्पष्टीकरण। शंभू और खनौरी मोर्चे के दौरान हुए नुकसान का पूरा मुआवजा, जिसमें लगभग 3.77 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान और सैकड़ों किसानों के घायल होने की भरपाई शामिल है। मूंग, मक्का और आलू सहित कुल पांच प्रमुख फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी।
सुनाम में जाखल-लुधियाना रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन

सुनाम में भी आंदोलन उग्र रूप लेता नजर आया। यहां मंत्री के आवास के बाहर लगातार तीन दिनों तक शांतिपूर्ण धरना देने के बाद ‘भारतीय किसान यूनियन एकता आजाद’ ने अपने आंदोलन को और तेज कर दिया है। आंदोलन के चौथे दिन किसानों ने दोपहर करीब 12 बजे जाखल-लुधियाना रेलवे ट्रैक पर बैठकर मार्ग को जाम कर दिया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि दोपहर 12 बजे के बाद अगले तीन घंटे तक इस रूट पर किसी भी ट्रेन के आवागमन का समय नहीं था।
इस धरने का नेतृत्व कर रहे यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष जसविंदर सिंह लोंगोवाल ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर पूरी तरह से उदासीन बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक सरकार गहरी नींद से जागकर किसानों की सभी जायज मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक यह संघर्ष और अधिक उग्र रूप में जारी रहेगा। फिलहाल, स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए रेलवे प्रशासन और स्थानीय पुलिस पूरी मुस्तैदी के साथ नजर बनाए हुए है।
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