Uttarakhand News: पितृ विसर्जन अमावस्या पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने किया तर्पण, पूर्वजों के प्रति जताई श्रद्धा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पितृ विसर्जन अमावस्या पर तर्पण कर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने पूर्वजों को समाज की जड़ों, मूल्यों और परंपराओं की नींव बताते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। जानिए सर्व पितृ अमावस्या का धार्मिक महत्व और देशभर में कैसे मनाया गया यह पर्व।

पितृ विसर्जन अमावस्या पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने किया तर्पण

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 10, 2026

Uttarakhand News: उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को पितृ विसर्जन अमावस्या के अवसर पर अपने पूर्वजों को याद करते हुए तर्पण किया। पितृ पक्ष के अंतिम दिन सीएम ने अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया। धामी ने पूर्वजों को याद करते हुए कहा कि वो हमारी सांस्कृतिक पहचान, पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं की मजबूत नींव हैँ। उनका सम्मान करना सनातन संस्कृति का अहम हिस्सा माना जाता है।

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पूर्वजों का सम्मान परंपरा का हिस्सा: सीएम धामी

पूर्वजों का सम्मान परंपरा का हिस्सा: सीएम धामी
पूर्वजों का सम्मान परंपरा का हिस्सा: सीएम धामी

जानकारी के अनुसार, सीएम धामी ने पितृ को सांस्कृतिक सम्मान परंपरा का अहम हिस्सा माना है। पुष्कर सिंह धामी ने पितृ विसर्जन अमावस्या पर तर्पण करते हुए पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पूर्वजों से ही समाज को अपनी जड़ों, संस्कारों और परंपराओं की पहचान मिलती है। उनके योगदान और विरासत को याद रखना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने यह प्रार्थना भी की कि पूर्वजों का स्नेह, आध्यात्मिक आशीर्वाद और कृपा सभी लोगों का मार्गदर्शन करती रहे। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय संस्कृति में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा रखने और पारंपरिक रीति-रिवाजों को आगे बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया।

पितृ पक्ष के समापन का प्रतीक

हिंदू पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष 16 दिनों की धार्मिक अवधि होती है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान जैसे अनुष्ठान करते हैं। मान्यता है कि इन धार्मिक कर्मों के माध्यम से पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। पितृ विसर्जन अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या और महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है। इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में श्रद्धालु नदियों, तीर्थस्थलों और धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर पूजा-पाठ करते हैं और अपने पूर्वजों की शांति तथा मोक्ष के लिए प्रार्थना करते हैं।

बिहार के गया में उमड़ते हैं श्रद्धालु

बताते चलें कि, पितृ पक्ष के अंतिम दिन बिहार के गया में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां फल्गु नदी के किनारे पिंडदान और अन्य पारंपरिक अनुष्ठान किए जाते हैं। गया को पितरों से जुड़े धार्मिक कर्मकांडों के प्रमुख तीर्थस्थलों मे गिना जाता है। इस अवसर पर दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग अपने पूर्वजों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने आते हैं।

तमिलनाडु में नदियों और मंदिरों में विशेष पूजा

तमिलनाडु में भी महालय अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालुओं ने धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लिया। तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम क्षेत्र में कावेरी नदी के घाटों पर बड़ी संख्या में लोग पवित्र स्नान और पूर्वजों से जुड़े अनुष्ठान करने पहुंचे। तिरुचिरापल्ली, तंजावुर, अरियालुर, पेरम्बलुर, पुदुक्कोट्टई और कराईकुडी सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। कई भक्तों ने श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, तिरुवनैकावल जंबुकेश्वरर मंदिर और समयपुरम मरियम्मन मंदिर में भी दर्शन किए।

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रामेश्वरम में अग्नि तीर्थ पर धार्मिक अनुष्ठान

तमिलनाडु के रामेश्वरम में भी हजारों श्रद्धालुओं ने अग्नि तीर्थ में समुद्र के पवित्र जल में स्नान किया। इसके बाद लोगों ने अपने पूर्वजों की स्मृति में तर्पण सहित विभिन्न धार्मिक कर्म किए। महालय अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन होता है। इसके बाद देवी पक्ष की शुरुआत मानी जाती है, जो नवरात्र और दुर्गा पूजा जैसे उत्सवों के आगमन का संकेत देती है। इस तरह देशभर में श्रद्धालुओं ने धार्मिक आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस अवसर को मनाया।