Uttarakhand News: उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले का खटीमा इन दिनों जनजातीय संस्कृति, लोककला औऱ विविध परंपराओं के रंग में रंगा नजर आया। यहां 4 से 6 अक्टूबर तक तीन दिवसीय उत्तराखंड आदि रंगोत्सव का आयोजन किया गया। सीएम धामी ने दीप प्रज्जवलित कर रंगोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। इस आयोजन में उत्तराखंड के साथ-साथ देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे जनजातीय कलाकारों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य, लोकसंगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत को मंच पर जीवंत किया।
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CM धामी ने खटीमा को बताया ‘मिनी इंडिया’
आपको बता दें कि, रंगोत्सव के दौरान सीएम पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का जिक्र करते हुए इसे ‘मिनी इंडिया’ बताया। उन्होंने कहा कि खटीमा में अलग-अलग समुदायों की संस्कृति और परंपराएं एक साथ देखने को मिलती हैं। रोड शो के दौरान उन्हें विभिन्न समुदायों की भागीदारी और सांस्कृतिक विविधता के कई रंग दिखाई दिए।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, खटीमा में जनजातीय समाज के साथ बंगाली, पंजाबी, पूर्वांचली और पहाड़ी समुदायों की मौजूदगी इस क्षेत्र को खास पहचान देती है। यही विविधता खटीमा को भारत की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विविधता का छोटा रूप बनाती है।
कलाकारों के साथ थिरके CM धामी, खुद बजाया ढोल

आदि रंगोत्सव में मुख्यमंत्री धामी का अलग अंदाज भी देखने को मिला। वे जनजातीय कलाकारों के साथ सांस्कृतिक रंग में रंगे नजर आए। उन्होंने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया, उनके साथ कदम मिलाए और स्वयं ढोल बजाकर जनजातीय संस्कृति के प्रति अपना सम्मान जताया। मुख्यमंत्री के इस अंदाज ने कार्यक्रम में मौजूद कलाकारों और लोगों का उत्साह और बढ़ा दिया।
देशभर की जनजातीय संस्कृति एक मंच पर
रंगोत्सव में राजस्थान, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, मिजोरम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से कलाकार पहुंचे। अलग-अलग राज्यों के लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक परिधान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को देश की जनजातीय विविधता का बड़ा मंच बना दिया।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा। इसके जरिए जनजातीय समुदायों की संस्कृति, परंपराओं और पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जनजातीय समाज के सशक्तिकरण पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं से जोड़कर उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। सरकार का जोर जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर है।
आदि रंगोत्सव के दौरान केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने खटीमा के एकलव्य आवासीय विद्यालय के विस्तार और सुविधाओं के विकास के लिए करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की घोषणा भी की। इसके अलावा विद्यालय में लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से छात्रावास निर्माण की प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी दी गई।
सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान देने की पहल

खटीमा में आयोजित आदि रंगोत्सव ने उत्तराखंड की जनजातीय संस्कृति को देश के विभिन्न हिस्सों की लोक परंपराओं के साथ जोड़ने का काम किया। थारू, बुक्सा, जौनसारी और अन्य समुदायों की सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने के साथ यह आयोजन स्थानीय पहचान और राष्ट्रीय एकता के संदेश का माध्यम भी बना।
कुल मिलाकर, 4 से 6 अक्टूबर तक चला उत्तराखंड आदि रंगोत्सव खटीमा की सांस्कृतिक विविधता का बड़ा उत्सव बनकर सामने आया। मुख्यमंत्री धामी का ‘मिनी इंडिया’ वाला बयान भी इसी विविधता को रेखांकित करता है। आयोजन ने यह संदेश दिया कि भारत की ताकत उसकी अनेक भाषाओं, परंपराओं, लोककलाओं और संस्कृतियों के एक साथ आगे बढ़ने में है।
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