UP News: 2017 से पहले जिस उत्तर प्रदेश की पहचान सिर्फ बंद मिलों, पलायन और पिछड़ेपन से होती थी, आज वही यूपी देश का चौथा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। राज्य में स्टार्टअप्स का आंकड़ा 120 से छलांग लगाकर 24,000 के पार पहुंच चुका है। गलियों और छोटे कमरों से शुरू हुए आइडियाज आज 1 अरब डॉलर से ज्यादा के यूनिकॉर्न बन चुके हैं।
उत्तर प्रदेश अब केवल पारंपरिक उद्योगों, पेठा, ताले और कालीन का सूबा नहीं रह गया है।पिछले कुछ वर्षों में नीतिगत बदलावों, बेहतर कानून-व्यवस्था और इज ऑफ डूइंग बिजनेस के दम पर यूपी ने देश के तकनीकी मानचित्र पर एक गहरी लकीर खींच दी है। साल 2017 से पहले जहां प्रदेश में गिने-चुने 120 स्टार्टअप पंजीकृत थे, वहीं आज इनकी संख्या 24,000 से अधिक हो चुकी है। सबसे बड़ी बात यह है कि,राज्य के सभी 75 जिलों में कम से कम एक स्टार्टअप सक्रिय है, जो इस बात का सुबूत है कि इनोवेशन अब केवल महानगरों नोएडा-लखनऊ तक सीमित नहीं, बल्कि यूपी के टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी तेजी से बढ़ रहा है।
इकोसिस्टम की मुख्य विशेषताएं:
- 24,000+ कुल रजिस्टर्ड स्टार्टअप: देश के सबसे तेजी से बढ़ते स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित।
- 75 जिलों में पहुंच: राज्य के हर कोने से युवा उद्यमी सामने आ रहे हैं।
- चौथा सबसे बड़ा राज्य: देश के स्टार्टअप रैंकिंग में उत्तर प्रदेश शीर्ष पायदानों पर काबिज है।
किसी भी स्टार्टअप इकोसिस्टम की ताकत उसके यूनिकॉर्न (1 अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाली कंपनियां) तय करते हैं। उत्तर प्रदेश के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग की आधिकारिक सूची के अनुसार, प्रदेश की माटी से निकले आठ स्टार्टअप्स ने यूनिकॉर्न का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि एक अन्य कंपनी ‘सूनिकॉर्न’ (यूनिकॉर्न बनने की कतार में) की श्रेणी में मजबूती से खड़ी है। इन कंपनियों को फर्श से अर्श तक पहुंचने में 10 से 25 साल का कड़ा संघर्ष करना पड़ा है।
यूपी के यूनिकॉर्न और सूनिकॉर्न की पूरी लिस्ट:
| क्रम | कंपनी का नाम | किस सेक्टर से है | सफलता की खास बात |
| 1 | पेटीएम (Paytm) | फिनटेक / डिजिटल पेमेंट | वर्ष 2000 में शुरू; भारत में डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा चेहरा। वित्त वर्ष 2025-26 में परिचालन राजस्व 8,437 करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 552 करोड़ रुपये। |
| 2 | फिजिक्सवाला (PhysicsWallah) | एडटेक / एजुकेशन | 2016 में यूट्यूब चैनल से शुरुआत, 2020 में कंपनी बनी। आज ऑनलाइन, ऑफलाइन और हाइब्रिड शिक्षा का देश का सबसे बड़ा मंच। |
| 3 | पाइनलैब्स (Pine Labs) | फिनटेक / मर्चेंट कॉमर्स | मर्चेंट पेमेंट सॉल्यूशंस और पीओएस (Point of Sale) मशीनों में ग्लोबल लीडर। |
| 4 | इन्फोएज (Info Edge) | इंटरनेट / क्लासिफाइड | Naukri.com, 99acres जैसी दिग्गज कंपनियों की मूल कंपनी। |
| 5 | मोजलिक्स (Moglix) | बी2बी ई-कॉमर्स | इंडस्ट्रियल गुड्स की प्रोक्योरमेंट और सप्लाई चेन को डिजिटल बनाने वाला मंच। |
| 6 | इंडियामार्ट (IndiaMART) | बी2बी मार्केटप्लेस | भारत का सबसे बड़ा ऑनलाइन बी2बी बिजनेस-टू-बिजनेस मार्केटप्लेस। |
| 7 | इनोवेसर (Innovaccer) | हेल्थकेयर डेटा | डेटा ड्रiven हेल्थकेयर और क्लाउड सॉल्यूशंस में ग्लोबल लीडर। |
| 8 | रेटगेन (RateGain) | ट्रेवल एंड हॉस्पिटैलिटी | ट्रैवल और होटल इंडस्ट्री के लिए सॉफ्टवेयर और सास (SaaS) आधारित समाधान। |
| 9 | रैफे एमफिन (Rafe Mfin) (सूनिकॉर्न) | फिनटेक / फाइनेंस | यूनिकॉर्न क्लब में शामिल होने की दहलीज पर खड़ी अगली बड़ी कंपनी। |
पेटीएम का दबदबा: वर्ष 2000 में विजय शेखर शर्मा द्वारा शुरू किया गया पेटीएम आज देश के सबसे बड़े डिजिटल वित्तीय मंचों में शुमार है। तमाम उतार-चढ़ाव के बाद भी कंपनी ने अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत की है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इसका परिचालन राजस्व 8,437 करोड़ रुपये और सालाना शुद्ध लाभ 552 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो इसकी मजबूत व्यावसायिक रीढ़ को दिखाता है।

फिजिक्सवाला का जलवा: साल 2016 में अलख पांडेय द्वारा एक साधारण यूट्यूब चैनल के रूप में शुरू किया गया सफर, कोविडकाल यानी 2020 में एक रजिस्टर्ड कंपनी में बदला। आज यह एडटेक सेक्टर का बेताज बादशाह है, जो छात्रों को बेहद किफायती दाम पर ऑनलाइन, ऑफलाइन और हाइब्रिड कोचिंग दे रहा है। छोटे शहरों के बच्चों के डॉक्टर और इंजीनियर बनने के सपने को पंख देने में इसकी बड़ी भूमिका रही है।

यूपी स्टार्टअप पॉलिसी से कैसे बदल रही है तस्वीर
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में यूपी स्टार्टअप पॉलिसी के तहत कई बड़े कदम उठाए हैं। राज्य में इनक्यूबेटर्स का जाल बिछाया गया है, जहां युवाओं को शुरुआती फंडिंग, मेंटरशिप और मुफ्त तकनीकी सहायता मिल रही है। इसके अलावा, सरकारी विभागों द्वारा स्टार्टअप्स के इन्नोवेटिव उत्पादों और सेवाओं को सीधे खरीदने (बिना जटिल टेंडर प्रक्रियाओं के) की नीति ने इन्हें बाजार में टिके रहने की बड़ी ताकत दी है।
टियर-2 शहरों में स्टार्टअप क्रांति
सिर्फ फंडिंग ही नहीं, बल्कि सरकार की ‘फंड ऑफ फंड्स’ योजना और टियर-2 शहरों (जैसे- गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ, कानपुर, आगरा) में बन रहे स्टार्टअप हब्स ने यह साबित कर दिया है कि टैलेंट सिर्फ महानगरों की बपौती नहीं है। यूपी का युवा अब नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बन रहा है।
वैश्विक मंच पर छाने को तैयार यूपी का स्टार्टअप इकोसिस्टम

उत्तर प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुका है जहां से पीछे मुड़कर देखना मुमकिन नहीं है। 8 यूनिकॉर्न और एक दर्जन से ज्यादा सूनिकॉर्न की पाइपलाइन यह चीख-चीख कर कह रही है कि आने वाला दशक उत्तर प्रदेश के तकनीक और उद्यमिता का दशक होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीप-टेक, एग्रीटेक और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे नए सेक्टरों में यूपी के युवा स्टार्टअप्स देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर परचम लहराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।











